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आजादी के बाद देश में पहली बार किसी महिला को मिलेगी फांसी,प्रेमी ,संग मिलकर किया था ये कांड़

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सत्यखबर, यूपी 

पहली बार एक महिला को फांसी देने की तैयारी चल रही है। महिला का नाम शबनम है। उत्तर प्रदेश के इकलौते फांसीघर में अमरोहा की रहने वाली शबनम को फांसी देने की तैयारी चल रही है।फांसी की अभी तक तारीख निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन कोर्ट की तरफ से शबनम को फांसी की सजा सुनाई गई है। जल्लाद पवन ने फांसी की सजा सुनाने के बाद दो बार फांसीघर का निरीक्षण कर चुके हैं।घटना करीब 13 साल पहले सन 2008 में अप्रैल की 15 तारीख की है। जब उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले के बावनखेड़ी गांव की शबनम ने अपने ही सात परिजनों की बेरहमी से हत्या कर दी थी।

इस हत्याकांड में शबनम अकेली किरदार नहीं थी, बल्कि इसमें साजिश रचने में उसका प्रेमी सलीम भी शामिल था। शबनम सलीम से प्यार करती थी। शबनम पोस्ट ग्रेजुएट थी जबकि सलीम पांचवीं पास था।शबनम के परिजनों को सलीम के साथ रिश्ता मंजूर नहीं था, लेकिन शबनम सलीम से प्रेग्नेट हो चुकी थी। वह दो महीने की गर्भवती हो चुकी थी। लेकिन परिजनों को शादी से पहले प्रेग्नेट होना बर्दाश्त नहीं हुआ था।इसी के चलते शबनम ने परिजनों की हत्या की साजिश रची थी। रात के समय शबनम ने परिजनों को खाने में नींद की गोलियां दे दी थी। रात को जब सभी सो गए तो एक-एक कर सभी को कुल्हाड़ी से काट दिया था।

आखिरकार 15 जुलाई 2010 को जिला जज एसएए हुसैनी ने शबनम और सलीम को तब तक फांसी के फंदे पर लटकाया जाए तब तक उनका दम न निकल जाए का फैसला सुनाया। फैसले को दस साल हो गए। लेकिन फांसी के फंदे को दोनों की गर्दन का इंतजार है।आपको बता दें कि अमरोहा की रहने वाली शबनम ने साल 2008 में प्रेमी के साथ मिलकर अपने ही सात परिजनों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शबनम की फांसी की सजा बरकरार रखी थी, वहीं राष्ट्रपति से भी दया याचिका खारिज हो गई।

गौरतलब है कि मथुरा जेल में 150 साल पहले महिला फांसीघर बनाया गया था। लेकिन आजादी के बाद से अब तक किसी भी महिला को फांसी की सजा नहीं दी गई। वरिष्ठ जेल अधीक्षक शैलेंद्र कुमार मैत्रेय ने बताया कि अभी फांसी की तारीख तय नहीं है, लेकिन हमने तयारी शुरू कर दी है। डेथ वारंट जारी होते ही शबनम को फांसी दे दी जाएगी।

 

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