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कृषि मंत्री- दुनिया को पता है कि पानी से खेती होती है, खून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है

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सत्यखबर

राज्यसभा में शुक्रवार सुबह जब किसानों के मुद्दे पर बहस शुरू हुई, तो करीब तीन घंटे तक सांसदों के तल्ख तेवर नजर आए। इस दौरान शिवसेना सांसद संजय राउत और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने सरकार को जमकर घेरा और जब कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की बारी आई तो उन्होंने भी विपक्ष पर तल्ख टिप्पणियां कीं। जानिए राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में क्या हुआ.

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1. राउत ने पूछा- देशप्रेमी कौन हैं? अर्नब, कंगना या किसान?
शिवसेना सांसद संजय राउत ने अर्नब गोस्वामी और कंगना रनोट के मुद्दे पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा- ‘देशप्रेमी कौन हैं हमारे देश में? अर्नब गोस्वामी, जिसकी वजह से महाराष्ट्र में एक निरपराध व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली? या कंगना रनोट देशप्रेमी हैं? प्रकाश जावडेकर के बारे में अर्नब ने किस भाषा का इस्तेमाल किया? आपको शर्म आनी चाहिए कि आपने उन्हें शरण दे रखी है। जिसने ऑफिशियल सीक्रेट कोड तोड़ते हुए बालाकोट स्ट्राइक के बारे में पहले ही बता दिया, वो आपकी यानी केंद्र सरकार की शरण में है, उसको आपका प्रोटेक्शन है। …लेकिन अपने हक के लिए लड़ने वाला किसान देशद्रोही है।’

‘सच बोलने से मोक्ष प्राप्त होता है, लेकिन सच बोलने वाले को गद्दार भी कहा जाता है’
राउत ने कहा, ‘कल धर्मेंद्र प्रधानजी बोल रहे थे और हमारी ओर बार-बार कटाक्ष कर रहे थे कि सच बोलो, इससे मोक्ष प्राप्त होता है। लेकिन आज देश में माहौल यह है कि सच बोलने वाले को गद्दार भी कहा जाता है। जो सरकार से सवाल पूछता है, उसे देशद्रोही बोल दिया जाता है। सदन में हमारे सदस्य हैं संजय सिंह, उन पर राजद्रोह का मुकदमा है। राजदीप सरदेसाई जाने-माने पत्रकार हैं, उन पर देशद्रोह का मुकदमा कर दिया है। सिंघु बॉर्डर पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों और लेखकों पर भी देशद्रोह कानून के तहत मुकदमा ठोक दिया गया।’

2. आनंद शर्मा के तेवर तल्ख थे, बोले- माइक नहीं है तो चिल्लाना पड़ेगा ना
कांग्रेस नेता आनंद शर्मा के तेवर बेहद तल्ख थे। उनके तेवर देखकर सांसदों ने कहा, ‘आप गुस्से में हैं।’ शर्मा बोले, ‘माइक नहीं है तो चिल्लाना पड़ेगा ना।’ इसके बाद माइक ठीक किया गया। सांसदों ने भी चुटकी ली कि आपकी तो आवाज वैसे भी बुलंद है।

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‘किसानों को संघर्ष के लिए मजबूर किया गया’
शर्मा ने अपने भाषण की शुरुआत में प्रवासी मजदूरों और किसानों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के बाद देश के हालात सबको पता हैं। उन लोगों को भी, जिनके रोजगार गए, परिवार तबाह हो गए। किसानों को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने को मजबूर किया गया। इसकी जिम्मेदार सरकार है। राष्ट्रपति के अभिभाषण में महामारी के दौरान सरकार की उपलब्धि तो बता दी गई, लेकिन लॉकडाउन के समय प्रवासी और लाखों मजदूर परेशान हो गए, पैदल चलने को मजबूर हो गए। एक बच्चा स्टेशन पर अपनी मरी हुई मां के शरीर से कंबल हटा रहा था। यह संवेदनहीनता है, लेकिन इसकी कोई चर्चा नहीं की गई।

‘सरकार का हर फैसला जनता स्वीकार करे, यह संभव नहीं’
उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति का अभिभाषण सरकार का निराशाजनक प्रशंसापत्र है। इसमें कृषि कानूनों का अनावश्यक जिक्र दुर्भाग्यपूर्ण है। हम जानते हैं कि राष्ट्रपति वही पढ़ते हैं, जो सरकार देती है। एक तरफ संघर्ष चल रहा है, दूसरी तरफ अभिभाषण में कृषि कानूनों की तारीफ हो रही है, इससे बढ़कर दुख की बात नहीं हो सकती। प्रजातंत्र में एकमत हो, एक विचार हो, यह न संभव है और न ही स्वीकार्य। सरकार के हर नीति-निर्णय को जनता स्वीकार करे और विपक्ष इसका अनुमोदन करे, यह भी न तो संभव है, न स्वीकार है और न कभी होगा।’

3. कृषि मंत्री बोले- विपक्ष ने हमें कोसने में कंजूसी नहीं की
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की जब बारी आई तो उनके तेवर भी अलग थे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को धन्यवाद कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की। सरकार को कोसने में कंजूसी भी नहीं की और कृषि कानूनों को जोर देकर काला कानून बताया। मैं किसान यूनियन से दो महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है, लेकिन मुझे जवाब नहीं मिला।

‘खून से खेती सिर्फ कांग्रेस कर सकती है’
कृषि मंत्री ने कहा कि अगर सरकार किसी भी संशोधन के लिए तैयार हैं तो इसके ये मायने नहीं लगाना चाहिए कि कृषि कानून में कोई गलती है। कॉन्ट्रैक्ट एक्ट में कोई एक प्रावधान बता दीजिए जो किसान विरोधी हो। एक ही राज्य का मसला है। किसानों को बरगलाया गया है। दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है, खून से खेती सिर्फ कांग्रेस ही कर सकती है, भाजपा ऐसा नहीं कर सकती।

‘हमारा एक्ट टैक्स को खत्म करता है’
कृषि मंत्री ने कहा कि हम लोगों ने ट्रेड एक्ट बनाया। उसमें यह प्रावधान किया कि APMC मंडियों के बाहर जो इलाका होगा, वह ट्रेड एरिया होगा। वह किसान का घर या खेत भी हो सकता है ताकि वह कहीं से भी अपनी उपज बेच सके। APMC के बाहर होने वाले ट्रेड पर राज्य या केंद्र का कोई टैक्स नहीं होगा। केंद्र सरकार का एक्ट टैक्स को खत्म करता है। कई राज्य सरकारों के एक्ट APMC में टैक्स देने के लिए बाध्य करते हैं।

‘देश में उल्टी गंगा बह रही है’
उन्होंने कहा, ‘मैं खासकर पंजाब के किसानों से पूछना चाहता हूं कि हमने टैक्स को फ्री किया, आपके यहां राज्य सरकार टैक्स ले रही है। जो टैक्स लगा रहा है, उसके खिलाफ आंदोलन करेंगे या जो टैक्स फ्री कर रहा है, उसके खिलाफ आंदोलन करेंगे? लेकिन देश में आज उल्टी गंगा बह रही है। पंजाब के एक्ट में किसानों ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को तोड़ा तो उसे जेल भेजने का प्रावधान है। हमारे एक्ट में ऐसा नहीं है।’

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