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Corona Virus

कोरोना मरीजों के चेहरे पर बेल्‍स पॉल्‍सी होने का खतरा होता है ज्यादा.. जानें

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सत्य खबर

क्या  कोरोना के मरीजों के चेहरे पर बेल्‍स पॉल्‍सी  जिसे हम लकवा  बोलते है उसका होने का खतरा ज्यादा होता है. जी हां  एक रिसर्च से पता चला है कि कोरोना के मरीजों को बेल्‍स पॉल्‍सी (लकवा) होने का 7 गुना  ज्यादा खतरा होता है।

रिसर्च की एक रिपोर्ट से पता चला है कि कोरोना के एक लाख मरीजों में बेल्स पॉल्सी के 82 मामले सामने आए हैं. इस रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने 3 लाख, 48 हजार ऐसे कोरोना मरीजों के मिलने की बात कही जिनमें 284 मरीज बेल्स पॉल्सी के थे.  इनमें 54 फीसदी मरीज ऐसे भी हैं जिनमें बेल्स पॉल्सी की हिस्ट्री नहीं रही है.

वहीं 46 फीसदी मरीज ऐसे  थे जो इस बीमारी से पीड़ित रहे हैं. इसके अलावा वैक्सीन लेने वाले एक लाख लोगों में बेल्स पॉल्सी के मात्र 19 केस मिले. ऐसे में वैज्ञानिकों की ओर से लकवे से बचाव के लिए कोरोना की वैक्सीन लगवाना जरूरी बतायाा गया है. वहीं इस रिसर्च में 74 हजार में से करीब 37 हजार लोगों ने वैक्सीन ली थी. इसके बाद 8 लोगों में बेल्‍स पॉल्‍सी के मामले देखे गए.

मांसपेशियों और पैरालिसिस से जुड़ा रोग 
बेल्‍स पॉल्‍सी मांसपेशियों और पैरालिसिस से जुड़ा रोग है. इसमें चेहरा लटक जाता है और गालों को फुलाने में परेशानी होती है. वहीं इसका मरीज की आंखों और उसकी आइब्रो पर भी प्रभाव पड़ता है. जिससे मरीज की पलकें झुकी रहती हैं. वहीं इस बीमारी के होने के पीछे असल कारण क्‍या हैं इस बारे में स्‍पष्‍ट जानकारी सामने नहीं आई है. कुछ वैज्ञानिकों के मुताबिक शरीर में रोगों से बचाव करने वाले प्रतिरक्षा तंत्र में ओवर-रिएक्शन होने से सूजन हो जाती है और नर्व डैमेज हो जाती है. इसी वजह से चेहरे पर इसका बुरा प्रभाव दिखाई पड़ता है.

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बीमारी से उबरने में  कई महीने लग सकते हैं
वहीं इस संबंध में वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर 2 महीने में इसके मरीजों को उचित इलाज मिल जाए तो इसका उपचार बेहतर ढंग से किया जा सकता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि इस रोग से उबरने में मरीजों को 6 महीने का समय तक लग सकता है.

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