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चुनाव आयोग चाहे फांसी तोड़ दे, फरसा रहेगा साथ – जयहिन्द

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सत्यखबर चंडीगढ़ (ब्यूरो रिपोर्ट) – आम आदमी पार्टी प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिन्द ने आज चुनाव आयोग केनोटिस का जवाब में सवालों कि बौछार करते हुए कहा कि वह ये फरसा मैंने आत्मरक्षा के लिए अपने साथ रखा हुआ है। क्या कानून व् संविधान की पालना चुनाव के दौरान व् पहले अलग-अलग होती है ? मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर जी ने हर्षमोहन भारद्वाज को सरेआम गर्दन काटने की बात कही थी लेकिन कोई कार्यवाही नही हुई। खट्टर साहब ने माफ़ी तक माँगना उचित नही समझा। अमित शाह को जब लाठी भेंट की गई, मुख्यमंत्री खट्टर जब गदा भेंट की गई व अन्य भाजपा के नेताओ को इस तरह गदा, फरसे, तलवार भेंट की जा रही है, तो क्या चुनाव आयोग को किसी भी भाजपा नेता का गदा, फरसा, तलवार पर आचार संहिता का उल्लंघन दिखाई नही दिया, सिर्फ मेरा ही फरसा दिखाई दिया।

प्रदेशाध्यक्ष ने आगे कहा कि मेरा मकसद लोगों को ये दिखाना है कि मुख्यमंत्री घमंड में चूर है और सरेआम गर्दन काटने की बात करता है, लोगों को जगाना और बताना है कि गर्दन काट मुख्यमंत्री का ध्यान रखा जाए। मेरा फरसा रखने का मतलब सिर्फ दिखाने के लिए है लोगों की गर्दन काटने के लिए नही बल्कि बचाने के लिए है। और मैं ये फरसा एक जगह नही बल्कि हर जगह साथ रखता हूँ।

फरसा एक धार्मिक चिन्ह है। चुनाव आयोग के लिए अगर फरसा शस्त्र है तो गदा भी तो शस्त्र है, भीम ने दुर्योधन को गदा से ही मारा था। जिस तरह भीम अपने साथ गदा रखते थे वैसे ही भगवान परशुराम भी अपने साथ फरसा रखते थे, जो किसी की गर्दन काटने के लिए नही बल्कि पापियों से बचाने के लिए है।

प्रदेशाध्यक्ष ने चुनाव आयोग को जानकारी देते हुए कहा कि फरसा किसी भी रिकॉर्ड में हथियार के रूप में नही है, चुनाव आयोग ने गाय-माँ का दूध पिया है तो पहले बीजेपी के नेताओ पर कार्यवाही करें फिर मुझ पर कानून व संविधान के अनुसार मुझ पर कार्यवाह बनती है करें।

भाजपा के नेता खुलेआम सरकारी मशीनरी का चुनाव प्रचार-प्रसार में दरुपयोग कर रहे है और जनता के टैक्स के पैसे की बर्बादी कर रहे है। क्या चुनाव आयोग को यह सब दिखाई नही दे रहा है ?

कभी बीजेपी के नेता हरियाणवियों को पाकिस्तानी बता रहे है। जबकि हरियाणा के जवान सबसे ज्यादा सेना में है और देश के लिए शहादत देते है। क्या चुनाव आयोग धृतराष्ट्र बन गया है। जो बीजेपी द्वारा बार-बार किया जा रहा आचार-संहिता का उल्लंघन दिखाई नही देता।

मुझे उम्मीद है कि माननीय चुनाव आयोग पूरी निष्पक्षता से एक ऐसा ही नोटिस मुख्यमंत्री खट्टर जी को भी भेजेगा। उनसे गर्दन काटने वाले बयान पर सफाई मांगी जायेगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो देश की नजरों में माननीय चुनाव आयोग की छवि की छवि धूमिल होगी। अगर माननीय चुनाव आयोग चाहता है तो मुख्यमंत्री खट्टर जी के खिलाफ मैं शिकायतकर्ता के तौर पर पेश होने को तैयार हूँ। आशा है कि माननीय चुनाव आयोग कि भव्य चुनावी रैलियों और हेलीकॉप्टरों पर भी वैसी ही नजर है जैसी हमारे भगवान के प्रतीक फरसे पर। प्रदेशाध्यक्ष ने अपने हरयाणवी अंदाज में कहा कि कानूनन व संविधान के अनुसार जो करणा सै कर ल्यो, चाहे फांसी दे दयो फरसा गैल्या राखुन्गा।

मुख्यमंत्री खट्टर करा रहे है साक्षात् शकुनि का रोल – जयहिन्द
प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि वही दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर जी एक महिला नेता को मरी हुई चुहिया बता रहे है जो न ही भारतीय संस्कृति है और न ही हरियाणवी संस्कृति है। क्या चुनाव आयोग को एक महिला अपमान दिखाई नही दे रहा है। इस तरह की भाषा सिर्फ शकुनि सोच का आदमी ही इस्तेमाल कर सकता है। माँ-बहन-बेटियां सबकी बराबर होती है और सम्माननीय होती है। क्या चुनाव आयोग की आत्मा मर गई है या सिर्फ सफेद हाथी के रूप में चुनाव आयोग बीजेपी एजेंट बन कर काम रहा है। चुनाव आयोग दोगला व्यवहार अपना रहा है।

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