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नाबालिब से शादी करने के मामले हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए फैसले की बड़ी बातें

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सत्यखबर, चण्डीगढ़

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट चण्डीगढ़ ने फैसला सुनाया है कि अगर कोई नाबालिक लडक़ी किसी पुरुष के साथ विवाह करती है, ऐसे में वो शख्स उसका स्वाभाविक अभिभावक होने का अधिकार रखता है। कोर्ट ने कहा कि यह हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट 1956 के तहत हो सकता है।
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने ये फैसला पानीपत के एक शख्स की याचिका पर सुनावाई करते हुए कहा है। पानीपत में युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कहा गया था कि उसने नाबालिग मुस्लिम लडक़ी का अपहरण किया है । लडक़े और लडक़ी में पति-पत्नी का रिश्ता कोर्ट इस एफ आईआर को रद्द करवाने के लिए युवक ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिस पर हाई कोर्ट के जस्टिस एचएस गिल ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाईकोर्ट के जस्टिस ने कहा कि नाबालिग लडक़ी ने लडक़े से अपनी इच्छा से विवाह किया है। ऐसे में हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट.1956 के अनुसार युवक और लडक़ी का पति-पत्नी का रिश्ता है और युवक उस नाबालिग लडक़ी का स्वभाव एक अभिभावक का अधिकार रखता है।

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युवक पर अपहरण का केस नहीं बनता : कोर्ट
याचिका में युवक ने यह भी कहा था कि लडक़ी ने अपनी इच्छा से उससे शादी की है ना कि वो लडक़ी को घर से भगा कर लेकर आया। उसके पास मैरिज सर्टिफिकेट भी है जो कि संबंधित थाने में दिखाया भी गया है। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि युवक पर अपहरण का केस नहीं बनता। वहीं कोर्ट और अधिकारियों के समक्ष लडक़ी ने अपने ब्यानों में कबूल किया कि उसने अपनी मर्जी से उस व्यक्ति से शादी की थी और वह अपने पति के साथ रह रही है और उसी के साथ रहना चाहती है।

कोर्ट ने कहा कि गार्जियनशिप एंड वाइज एक्ट 1890 के तहत माता-पिता कानूनी अभिभावक होते हैं और क्योंकि यह शादी हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत अवैध ठहराए जाने योग्य है, लेकिन दंपत्ती ने माता-पिता की मर्जी के विरुद्ध जाकर अपने पार्टनर का चयन किया और दोनों साथ रहकर अपना रिश्ता निभा रहे हैं, ऐसे में यह कोर्ट गार्जियंस एंड वार्डस एक्ट 1890 की धारा 25 के तहत इन तथ्यों का संज्ञान ले सकता है। कोर्ट ने कहा कि लडक़ी का कल्याण सबसे ऊपर है। जिसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में क्योंकि उसने अपनी मर्जी से शादी की है और अपनी ससुराल में वह खुश है। इसलिए याचिकाकर्ता पर कोई अपराधिक मामला दर्ज नहीं हो सकता। कोर्ट की तरफ से युवक की याचिका को मंजूर किया गया। इसके साथ ही उसे स्वाभाविक अभिभावक का अधिकार भी दिया गया।

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