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Charkhi Dadri

नोटबंदी के दो साल बाद भी नहीं उबर सका बाजार? जानिए पूरा मामला

सत्यखबर चरखी दादरी( विजय कुमार ) – नोटबंदी की मार से जहां व्यापारी और आम आदमी दो साल बाद भी नहीं उबर पाए है। वहीं, बैंकों में लेनदेन बढ़ा है। बाजारों पर नोट बंदी के दो साल व्यवस्था पटरी पर आई है। हालांकि कुछ असर जरूर दिखाई दे रहा है। उम्मीद है कि अगले वर्ष […]

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सत्यखबर चरखी दादरी( विजय कुमार ) – नोटबंदी की मार से जहां व्यापारी और आम आदमी दो साल बाद भी नहीं उबर पाए है। वहीं, बैंकों में लेनदेन बढ़ा है। बाजारों पर नोट बंदी के दो साल व्यवस्था पटरी पर आई है। हालांकि कुछ असर जरूर दिखाई दे रहा है। उम्मीद है कि अगले वर्ष तक व्यापारियों और आम आदमी की स्थिति भी सुधर जाएगी।

आठ नवम्बर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नोटबंदी का एलान कर दिया था। इसके बाद देश भर में हडक़ंप की स्थिति दिखी थी। कई महीनों तक बैंकों में लोगों की लाइनें लगी देखी गईं। लोगों के शादी विवाह प्रभावित हुए, लेकिन अब हालात में सुधार हो रह है। अब बैंकों में लोगों की लाइनें तो नहीं हैं लेकिन दो वर्ष में व्यापार और आम आदमी प्रभावित हुआ है। वहीं नोटबंदी से बैंकों को बड़ा लाभ हुआ है।

नोटबंदी की मार आज भी बाजार पर है। आमजन नीरज मिश्रा ने बताया कि मोदी जी ने नोटबंदी कर देश की अर्थव्यवस्था में सुधार की शुरूआत की थी। नोटबंदी के दौरान कुछ समय के लिए दिक्कतें आई थी। आज पूरी व्यवस्था सही हो गई है और देश में सुधार की गुंजाइश बन गई है। दुकानदार विनोद कुमार ने कहा कि नोटबंदी के बाद मोबाइल व्यापार प्रभावित हुआ था। धीरे-धीरे अब सुधार की ओर बढ़ रहा है। हालांकि नोटबंदी के कारण व्यापार की प्रगति दो वर्ष पीछे चली गई है। नोटबंदी के कारण हर चीज महंगी हुई है, जिसकी मार आम आदमी पर पड़ी। नोटबंदी का असर आज भी दिख रहा है।

किसान सुनील कुमार ने कहा कि मोदी जी ने नोटबंदी करके धनाढयों पर शिकंजा कसा था। आज नोटबंदी के बाद आमजन को राहत मिली है। अब सभी वर्गों को समान रूप से उनका हक मिल रहा है। दुकानदार गणेश ने बताया कि नोटबंदी का असर आम आदमी पर भी पड़ा है। आम आदमी के पास इतना समय नहीं था कि वह बैंकों के चक्कर काटे। अब हर काम बैंक के माध्यम से ही होता है, जिससे आम आदमी का कार्य प्रभावित हो रहा है। दुकानदार संजय शर्मा कहते हैं कि नोटबंदी के बाद पहले काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। जिसके कारण उनको घाटा भी हुआ। अब कुछ हद तक व्यवस्था पटरी पर आ गई है और व्यापार में बढौतरी की संभावना है।

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