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Bhiwani

पिछडा वर्ग के मसीहा थे वीपी सिंह -अमन तंवर राघव

  भिवानी । पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह की 87वीं जयंती मंडल दिवस के रूप में भिवानी में ग्वार फैक्ट्री के पीछे एमसी कॉलोनी स्थित कम्युनिटी सेंटर में आयोजित की गई।आरक्षण को लेकर डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के बाद दूसरा मसीहा होने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को ही जाता है। मुख्यअतिथि श्रीमती अमन […]

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भिवानी ।
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह की 87वीं जयंती मंडल दिवस के रूप में भिवानी में ग्वार फैक्ट्री के पीछे एमसी कॉलोनी स्थित कम्युनिटी सेंटर में आयोजित की गई।आरक्षण को लेकर डॉक्टर भीम राव अंबेडकर के बाद दूसरा मसीहा होने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह को ही जाता है। मुख्यअतिथि श्रीमती अमन तंवर राघव महिला प्रदेशाध्यक्ष लोकतंत्र सुरक्षा मोर्चा हरियाणा थी।जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता गणेशी लाल वर्मा ने की।
इस मौके पर मुख्यातिथि अमन तंवर राघव ने कहा कि सांसद राजकुमार सैनी भी सभी वर्गो को समानता का अधिकार दिलाने के लिए सौ फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे हैं।सांसद सैनी को हमारी आने वाली सन्ताने व पीढियां भी याद किया करेंगी।अमन तंवर राघव ने कहा कि वे समाज की पीड़ा से निकली हैं।कुरूतियों व एक दूसरे को पीछे खिंचने में ही समाज नकारात्मक सोच में पड़ा रहता है। जबकि हम एकजुट होकर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा सकतें हैं। तंवर ने कहा कि वीपी सिंह ना सिर्फ ईमानदार थे बल्कि दलित, पिछड़े समुदायो के प्रति उनके दिल में बेहद करुणा थी!
कार्यक्रम अध्यक्ष बाबू गणेशी लाल वर्मा ने वीपी सिंह के जन्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत गणराज्य के आठवें प्रधानमंत्री थे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके है। राजीव गांधी सरकार के पतन के कारण प्रधानमंत्री बने विश्वनाथ प्रताप सिंह ने आम चुनाव के माध्यम से 2 दिसम्बर 1989 को यह पद प्राप्त किया था। श्री वीपी सिंह जी ना सिर्फ बेहद ईमानदार थे बल्कि दलितों पिछडो और वंचित समुदायों के प्रति उनके दिल में बेहद करुणा थी। उनका जन्म 25 जून 1931 उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद जिले में हुआ था। वह राजा बहादुर राय गोपाल सिंह के पुत्र थे।
1989 का लोकसभा चुनाव में भाजपा के पास 86 सांसद थे और वामदलों के पास 52 सांसद। इस तरह राष्ट्रीय मोर्चे को 248 सदस्यों का समर्थन प्राप्त हो गया। लेकिन चन्द्रशेखर और देवीलाल भी प्रधानमंत्री पद की दौड़ में शरीक़ हो गए। ऐसे में यह तय किया गया कि वी. पी. सिंह की प्रधानमंत्री पद पर ताजपोशी होगी और चौधरी देवीलाल को उपप्रधानमंत्री बनाया जाएगा। 27 नवम्बर 2008 को 77 वर्ष की अवस्था में वी. पी. सिंह का निधन दिल्ली के अपोलो हॉस्पीटल में हो गया।
कैप्टन राजेन्द्र प्रसाद जांगडा ने कहा कि आज वीपी सिंह के जन्मदिवस पर हमें अपने आप से वादा करना चाहिए कि बहन-बेटियो की सुरक्षा को लेकर हम सब एकजुटता दिखाएंगे। यह भी फैसला स्ंवय से करें कि गली व मोहल्लों की समस्याओं को लेकर एकजुट हो कर आवाज उठाएंगे।
रामअवतार जोगी ने सभा को संबोधिक करते हुए कहा कि हमे वीपी सिंह के दिखाए मार्ग पर चलना होगा। उन्होंने हमारे हितो के लिए बहुत कुछ किया है अब हमें भी अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।
इस अवसर पर अशोक राघव, संजय परमार, रोहताश वर्मा, रोशन लाल पार्षद प्रतिनिधि, शिवकुमार प्रजापत, रामकिशन वर्मा, सुरेश जोगी, सुशीला, राजेश बिष्ट, धनपती, विद्यादेवी, गिरणी, कमला देवी, सावित्री देवी ,कृष्ण परमार, मोहर सिंह चौहान, संजय परमार, बृजपाल तंवर, पृथ्वी सैन, राजीव सैन, ओमपाल चौहान आदि मौजूद रहे!

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