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भारत से दूर एक लघु भारत है मॉरीशस : प्रो.चौहान 

असंध :रोहताश वर्मा मॉरीशस में आयोजित 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन दुनिया में हिंदी की ध्वजा ऊंची करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  के निधन की छाया में संपन्न हुआ।विश्व भर से आए हिंदी विद्वानों ने कवि,साहित्यकार और राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।  सम्मेलन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मॉरीशस के  […]

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असंध :रोहताश वर्मा
मॉरीशस में आयोजित 11वां विश्व हिंदी सम्मेलन दुनिया में हिंदी की ध्वजा ऊंची करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी  के निधन की छाया में संपन्न हुआ।विश्व भर से आए हिंदी विद्वानों ने कवि,साहित्यकार और राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।  सम्मेलन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, मॉरीशस के  प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्नाथ और मार्गदर्शक मंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ की उपस्थिति में संकल्प लिया गया कि जिस भावना के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ में स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने हिंदी में संबोधन कर हिंदी की पताका फहराई थी उसे आगे बढ़ाते हुए हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलवाने के लिए कार्य किया जाएगा। विश्व हिंदी सम्मेलन में हरियाणा के राजकीय प्रतिनिधि के तौर पर हिस्सा लेकर लौटे हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष एवं निदेशक प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने यहां आयोजित एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की। मॉरीशस में आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलन के  अनुभवों और इसमें विचारार्थ आए मुद्दों पर चर्चा के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में नगर के प्रतिष्ठित सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि मॉरीशस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पुस्तक प्रदर्शनी में हरियाणा ग्रंथ अकादमी द्वारा हिंदी में प्रकाशित विज्ञान, प्रौद्योगिकी और हरियाणवी साहित्य व संस्कृति से संबंधित पुस्तकें दुनिया भर से आए प्रतिनिधियों के समक्ष प्रदर्शित की गयीं। उन्होंने बताया कि  मॉरीशस हिंद महासागर में एक ऐसा छोटा सा  द्वीपीय देश है जिसे लघु भारत भी कहा जा सकता है। यहां की आबादी में साठ  फ़ीसदी से अधिक हिंदू धर्मावलंबी हैं और उनमें से अधिकांश के पूर्वज अंग्रेजी राज के दौरान एग्रीमेंटिए या गिरमिटिया मजदूरों के रूप में वहां गए थे। इसलिए हिंदी और हिंदू संस्कृति का प्रभाव वहां आज भी कायम है। घरों में भोजपुरी सहित इस से मिलती-जुलती हिंदी की बोलियां सहज भाव से बोली जाती हैं। चौहान ने बताया कि  बहुसंख्यक मॉरीशस वासियों को अपने भारतवंशी होने पर गर्व है और वह भारतवासियों से बहुत आत्मीयता के साथ मिलते हैं।
 एक प्रश्न के उत्तर में प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि सम्मेलन के दौरान  प्रतिनिधियों को मॉरीशस के तीर्थ स्थान गंगा तालाब पर जाने का अवसर भी मिला जहां नियमित रूप से गंगा आरती में बड़ी संख्या में लोग शिरकत  करते हैं ।उन्होंने कहा कि गंगा तालाब, हिंदी, रामचरितमानस,  मॉरिशस की धरती पर हिंदी में रचा गया  साहित्य और सबसे अधिक मॉरीशस वासियों का उनके भारतवंशी पूर्वजों के प्रति लगाव  भारत और मॉरीशस की अभिन्न मित्रता के आधार हैं।
 कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य नागरिकों को हरियाणा ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना भी मारीशस में की गई है जो विश्व भर में हिंदी के प्रचार-प्रसार की गतिविधियों के संयोजन केंद्र के रुप में विकसित हो रहा है। उन्होंने कहा कि  भारत से हजारों मील दूर एक नन्हे भारत के भारतवंशी लोगों ने विश्व हिंदी सम्मेलन में दुनिया के  दर्जनों देशों से आए हिंदी प्रेमियों का भावपूर्ण अभिनंदन किया। उन्होंने  कहा कि मारीशस के मार्गदर्शक मंत्री और पूर्व में देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री पद को सुशोभित कर चुके वयोवृद्ध नेता अनिरुद्ध जगन्नाथ ने हिंदी में दिए अपने उद्बोधन  से प्रतिभागियों को प्रभावित किया। ऐसा ही प्रभावशाली वक्तव्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वहां की मानव संसाधन और तृतीयक शिक्षा मंत्री लीला देवी दूकु लछूमन ने सम्मेलन के उद्घाटन सत्र के दौरान दिया। चौहान ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव इस बार मॉरिशस की धरती पर भी धूमधाम से मनाया जाएगा और इस संबंध में विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान दी हरियाणा और मॉरिशस सरकार के प्रतिनिधियों के मध्य बातचीत हुई।
इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की जिला सचिव प्रदीप टाटा, मेंटेनेंस ट्रिब्यूनल के सदस्य और वरिष्ट भाजपा नेता डॉ बूटी राम, भारतीय जनता पार्टी के मंडल अध्यक्ष सुखदेव सर्राफ, पतंजलि योगपीठ के प्रभारी एडवोकेट नरेंद्र शर्मा, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष हरी कृषण अरोड़ा व सुनील वर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.
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