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Ambala

महिला पुलिस अधिकारी न्याय दिलाते बजाये समझौता कागजों पर हस्ताक्षर का बना रहे दबाव

सत्यखबर,अम्बाला (रोज़ी बहल) सुंदर नगर की रहने वाली विवाहिता ने ससुराल पक्ष पर मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का आरोप लगाते अम्बाला पुलिस से न्याय की मांग की थी ! गुलविंदर चौहान का आरोप है कि अपने संडौरा निवासी पति की सियासी पहुँच के चलते महिला पुलिस थाना की अधिकारी उसकी मदद करने की बजाये उसे कागजों […]

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सत्यखबर,अम्बाला (रोज़ी बहल)

सुंदर नगर की रहने वाली विवाहिता ने ससुराल पक्ष पर मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का आरोप लगाते अम्बाला पुलिस से न्याय की मांग की थी ! गुलविंदर चौहान का आरोप है कि अपने संडौरा निवासी पति की सियासी पहुँच के चलते महिला पुलिस थाना की अधिकारी उसकी मदद करने की बजाये उसे कागजों पर हस्ताक्षर करके समझौते का दबाव बना रही है ! वहीँ अम्बाला की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक से ऐसी किसी भी शिकायत मिलने से इंकार किया है ! शहर के सुंदर नगर की रहने वाली गुलविंदर चौहान अपनी तीन वर्षीय बेटी के भविष्य के प्रति चिंतित नजर आ रही है ! उसका कहना है कि पहले 2010 में उसकी शादी नंगल (पंजाब) में हुई थी और उसे जब पति के मानसिक रोगी होने का पता चला तो उसने तालाक ले लिया ! उसके बाद उसकी शादी संडौरा में तय हो गई और 7 सितंबर को कुछ शर्तों के तय होने पर वे दिनेश के साथ परिणय सूत्र में बांध गई ! जब वे प्रेग्नेंट हुई तो उसके ससुराल वालों को पता चला तो उसका अल्ट्रा साउंड से गर्भ में बेटी का पता चला तो उसे वे मायके छोड़ गए और बोले जब बेटा होगा तो आना ! गुलविंदर ने रोते हुए बताया कि आखिर जब उसके बेटी हुई तो सुचना देने पर उसके ससुराल वाले नहीं आये ! उसका कहना है कि आखिर उसने इन्साफ पाने के लिए अम्बाला के पुलिस अधीक्षक को न्याय के लिए प्रार्थना की और उन्होंने मामला की जाँच महिला पुलिस थाने को भेज दी ! लेकिन महिला पुलिस अधिकारी उसकी बात सुनकर न्याय दिलाते बजाये इसके उसे समझौता कागजों पर हस्ताक्षर का दबाव बनाने लग गए ! उसका आरोप है इस सारे फसाद की जड़ उसकी जेठानी है ! पीड़िता का आरोप है कि अपनी सियासी पहुँच के चलते उसका पति कोई कार्रवाई नहीं होने देता !  पिछले तीन वर्षों से अपनी बेटी को गरीबी की हालत में पाल रही गुलविंदर की माँ का कहना है कि सरकार एक तरफ “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” की बात करती है लेकिन इस सरकार में कई बेटियां इन्साफ के लिए दर दर की ठोकरे खाने पर मजबूर हैं ! लगता है यह सब कागजों तक सिमित है ! उनका आरोप है कि जहाँ भी वे इन्साफ मांगने गई उन्हें असफलता ही हाथ लगी ! सुदेश का कहना है कि उन्हें लगता है गरीब के लिए इस प्रदेश में नये कहीं नहीं है ! उनका कहना है कि उसके दामाद की सियासी पहुंच आज उनकी बेटी व नाती पर भारी पढ़ रही है ! उन्होंने सरकार से इन्साफ की मांग की है !