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मांगों को लेकर एसडीओ के खिलाफ गरजे बिजली कर्मचारी

निसिंग, सोहन कस्बे के बिजली बोर्ड कार्यालय में कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर निगम प्रशासन व एसडीओ के खिलाफ  मोर्चा खोलते हुए जमकर नारेबाजी की। जिसकी अध्यक्षता सब डिविजन प्रधान कर्मबीर ने की। उन्होंने बताया कि निसिंग सब डिविजन करनाल की सबसे बड़ी डिविज है। जिसमें दस हजार से अधिक खेतों के कनैक्षन है। […]

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निसिंग, सोहन
कस्बे के बिजली बोर्ड कार्यालय में कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर निगम प्रशासन व एसडीओ के खिलाफ  मोर्चा खोलते हुए जमकर नारेबाजी की। जिसकी अध्यक्षता सब डिविजन प्रधान कर्मबीर ने की। उन्होंने बताया कि निसिंग सब डिविजन करनाल की सबसे बड़ी डिविज है। जिसमें दस हजार से अधिक खेतों के कनैक्षन है। लेकिन स्टोर से ट्रांसफार्मर सहित अन्य सामान लाने हेतु गाडी उपलब्ध नही है। पूरा सीजन बीत गया, लेकिन बार बार मांग के बाद भी अधिकारियों के कान पर जूं तक नही रेंगी। उन्होंने कहा कि कंप्लेंड पर जाने के लिए उपलब्ध गाडी को एसडीओ ले जाते है। कर्मचारियों से 24 घंटे काम लिया जा रहा है। वहीं कर्मचारियों को चार्जशीट की धमकी देकर दबाव बनाया जा रहा है। बिना वजह उनकी बदली की जा रही है। आरोप है कि उनसे अभद्र व्यवहार किया जाता है। जिससे कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान है। बिजली सप्लाई सुचारू रूप से चलाने हेतु उनके पासे सामान का अभाव है। यदि जेई स्टोर से सामान लाते है, तो उनके बिल पास नही किए जाते। उन्होंने  अपनी मांगों के बारें में बताते हुए कहा कि 24 घंटे काम लेने के बाद भी एक साल से कच्चे कर्मचारियों की सैलरी नही दी जा रही। वही दो साल का ऐरियर भी रोक रखा है। कार्यालय में कंप्लीट कंप्यूटर का अभाव है। जिसके चलते कर्मचारियों के काम अटके पड़े रहते है। कार्यालय की बिजली फिटिंग, पानी की टंकी व दरवाजों की हालत खस्ता है।जिनकी रिपेयर नही की जा रही। हांलाकि विभाग कर्मचारियों की कमी से झूझ रहा है। साथ ही उपभोक्ता को बेहतर सप्लाई देने हेतु उनके पास संसाधनों का भारी अभाव है। उन्होंने निगम प्रशासन को कर्मचारियों की मांगों पर शीघ्र विचार कर पूरा करने की मांग की है। ताकि उपभोक्ताओं को बिजली सप्लाई को लेकर कोई परेशानी न हो।  इस संबंध में विभाग के एसडीओ युवराज सिंह ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना था कि गाडी खराब हो गई थी। हर कार्य एसडीओ के हाथों में नही है। समस्याओं को  संज्ञान में देना कर्मचारियों को भी फर्ज बनता है। उन्हें लिखित में शिकायत देनी होती है। जो नही दी गई।

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