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मानव जीवन का निर्माण उसकी दृष्टि से होता है : सुभद्र मुनि

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सत्यख़बर जींद

मानव जीवन का निर्माण उसकी दृष्टि से होता है जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि। सम्यक दृष्टि गुणग्राही होती है। वह असद् में भी सद् तत्व को देख लेती है। सत्य सत्य है पर चिन्तन, विचार सत्य नहीं है तो सत्य भी असत् बन जाता है ये उद्गार जैनाचार्य श्री सुभद्रमुनि जी महाराज ने जैन स्थानक बडौदी गांव में व्यक्त किये। इस अवसर पर सभा के प्रधान धारा सिंह, सुभाष इत्यादि प्रमुख रूप से उपस्थित थे। इस अवसर पर आचार्य सुभद्रमुनि जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन अनमोल है। इस जीवन में नेत्र, मुख, हस्त, सुनने की शक्ति सब कुछ प्राप्त है परन्तु मानव अज्ञानता वश में इन इंद्रियों का सदुपयोग नहीं कर पाता। देखना है अच्छा, पर बुराईयों  पर ध्यान देता है उन बातों से जीवन में उपलब्धि नहीं मिलती। जिन जीवों ने बुराई को महत्व दिया उनका जीवन दुख से भर गया। आचार्य श्री ने कहा कि छल कपट से जीवन का पतन होता है। छल-कपट, झूठ से कभी किसी को लाभ नहीं होता। व्यक्ति न जाने कितनी जानकारी रखता है अपनी जानकारी नहीं रख पाता।