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Haryana

योगेंदर यादव पहुंचे नूंह , अनाज मंडी में किसानों से की मुलाकात

सत्यखबर,नूंह (ऐ के बघेल  ) देश के किसान की हालत अच्छी नहीं है। किसानों को उनकी फसलों का समर्थन मूल्य यानि एमएसपी ठीक मिल रहा है या नहीं इसके लिए उन्होंने यात्रा की शुरुआत कर्नाटक से की उसके बाद राजस्थान , तेलंगाना , एमपी , हरियाणा सहित कई राज्यों में गया। अनाज मंडी में जाकर देखा […]

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सत्यखबर,नूंह (ऐ के बघेल  )

देश के किसान की हालत अच्छी नहीं है। किसानों को उनकी फसलों का समर्थन मूल्य यानि एमएसपी ठीक मिल रहा है या नहीं इसके लिए उन्होंने यात्रा की शुरुआत कर्नाटक से की उसके बाद राजस्थान , तेलंगाना , एमपी , हरियाणा सहित कई राज्यों में गया। अनाज मंडी में जाकर देखा तो किसान की फसल को सस्ते दामों में खरीदा जा रहा। सरकारी खरीद की बजाय आढ़ती फसल खरीद रहा है। हद तो तब हो गई जब नूंह मेवात जिले में एक भी खरीद केंद्र सरकार द्वारा आज तक नहीं बनाया गया। पडोसी जिलों में तो खरीद केंद्र हैं , लेकिन मेवात के साथ दोगला बर्ताव किया जा रहा है। किसानों को जागरूक करने के लिए यात्रा शुरू की है। कई जगह किसानों ने यात्रा के बाद आंदोलन भी शुरू कर दिए हैं। मेवात के किसान और कई सामाजिक संगठनों का सहयोग भी मिला है। यह बात पत्रकारवार्ता के दौरान स्वराज अभियान नेता योगेंद्र यादव ने नूंह अनाज मंडी का दौरा करने उपरांत कही।  योगेंद्र यादव ने बड़ी बात कहते हुए कहा कि एक साल बाद चुनाव होने वाले हैं। चुनाव में मुद्दा क्या रहेगा , यह बड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि जवान – किसान या फिर हिंदू – मुसलमान रहेगा। योगेंद्र का कहीं ने कहीं इशारों – इशारों में भाजपा पर निशाना है। जवान को नौकरी देने या रोजगार देने के अलावा किसान को सहूलियत देने का मुद्दा होगा या फिर हिंदू मुसलमान का होगा। यह बेहद अहम है। स्वराज अभियान नेता यादव बोले कि मेवात सरसों उत्पादन में अच्छा स्थान सूबे में रखता है , उसके बावजूद खरीद केंद्र आज तक क्यों नहीं खोला गया। सौतेला और दोगला बर्ताव मेवात के किसान के साथ कब तक होता रहेगा। योगेंद्र यादव ने कहा कि समाजसेवी अन्ना हजारे से कुछ दिन पहले उनकी मुलाकात हुई थी। अन्ना को पहले भी उनका समर्थन रहा है ,अगर किसानों की दुर्दशा पर अन्ना आंदोलन की शुरुआत करते हैं , तो उनका समर्थन साथ रहेगा। उन्होंने कहा कि एमएसपी सत्याग्रह यात्रा  शुरुआत इसी माह कर्नाटक से हुई , अभी कई राज्यों में जाना है। योगेंद्र यादव की यात्रा ने इतना तो साफ कर दिया कि धरती पुत्र की हालत देश में अच्छी नहीं है। सरकार बात भले ही बड़ी – बड़ी किसानों को लेकर करती रही हो , लेकिन उनकी फसलों को बेचने  में ही उन्हें करोड़ों का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यादव की यात्रा में कई सामाजिक संगठन मेवात से जुड़े। योगेंद्र यादव चुनावी दौर से लेकर अकसर मेवात के लोगों के दुःख – सुख में शामिल होते रहे हैं।