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Haryana

रोडवेज कर्मचारियों पर लाठीचार्ज करना सरकार की दमनकारी नीति – रामनिवास खरकबूरा

सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :- हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर संयुक्त संघर्ष समिति, भारतीय मजदूर संघ, इंटक आदि कर्मचारी संगठनों ने 5 सितम्बर को रोडवेज विभाग के कर्मचारियों ने 700 प्राइवेट बसों के खिलाफ एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था। जिसके बाद रोडवेज कर्मचारी सभी डिपूओंं पर धरना पर बैठ गये थे। […]

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सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :-
हरियाणा ज्वाइंट एक्शन कमेटी के आह्वान पर संयुक्त संघर्ष समिति, भारतीय मजदूर संघ, इंटक आदि कर्मचारी संगठनों ने 5 सितम्बर को रोडवेज विभाग के कर्मचारियों ने 700 प्राइवेट बसों के खिलाफ एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था। जिसके बाद रोडवेज कर्मचारी सभी डिपूओंं पर धरना पर बैठ गये थे। लेकिन सरकार द्वारा कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए एस्मा लगा दिया था, जिसके तहत कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने से नौकरी से बर्खास्त किया जा सकता था। परन्तु कर्मचारियों ने एस्मा की परवाह न करते हुए हड़ताल करने का निश्चय कर लिया। इसी के मद्देनजर रोडवेज कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गये थे, लेकिन प्रदेश में अन्य स्थानों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करने के कारण जान-माल की हानि को देखते हुए उपकेन्द्र नरवाना में डीएसपी कुलवंत बिश्नोई कर्मचारियों को सरकार के आदेश बताये, जिसके बाद कर्मचारियों ने विभाग के हित को देखते हुए हड़ताल से उठ जाने का फैसला लिया। प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में बसों को बाहर की रवाना किया और प्राइवेट बसों को परिसर के अंदर कांउटर पर लगा दिया गया।
सरकार की दमनकारी नीति का कर्मचारियों ने किया विरोध
हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रैस प्रवक्ता व डिपो प्रधान जगदीप शर्मा ने कहा कि सरकार ने कर्मचारियों पर एस्मा लगाकर निर्दोष कर्मचारियों पर जीन्द में लाठी चार्ज किया गया, लेकिन कर्मचारी शांतिप्रिय तरीके से धरना दे रहे थे। परंतु सरकार ने प्रजातांत्रिक में जनता के मांगों को ना मानकर दमनकारी नीति के अनुसार निर्दोष कर्मचारियों पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने सरकारी की दमनकारी नीति की कड़े शब्दों में आलोचना की। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम पर हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों में भारी रोष है। प्रजातंत्र में अपने अधिकारों की शांतिप्रिय तरीके से आवाज उठाना यूनियन का श्रम कानूनों के तहत अधिकार है, परंतु सरकार कर्मचारियों से डरी हुई है। जिससे इस तरह के हथकंडे अपना रही हैं। पूर्व डिपो प्रधान सतबीर नैन ने बताया कर्मचारी विरोधी दमनकारी नीति के कारण कर्मचारियों को भारी नुकसान को देखते हुए कर्मचारी हित में हड़ताल को वापिस ले लिया गया। इस अवसर पर ईश्वर मोर, शमशेर सिंह, नरेन्द्र पालवां, प्रदीप शर्मा, हरदीप, वीरेन्द्र, बलबीर आदि कर्मचारी मौजूद थे।
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