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Haryana

शिक्षा भारती विद्यालय में बच्चों व शिक्षकों को दिलवाया स्वदेशी दिपावली मनाने का संकल्प

स्वदेशी दिपावली मनाकर प्रकृति सौंदर्य वृद्धि में देना होगा योगदान – योगेश शास्त्री सत्यखबर, सतनाली मंडी (मुन्ना लाम्बा) – समय के साथ-साथ हमारे अनेकों पवित्र त्यौहारों को मनाने के तौर-तरीकों में इनकी मूल भावना के विरुद्ध विकृति पैदा हो गई है। हमारे समस्त महापुरुषों ने जहां प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए अनेकों मर्यादाएं […]

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स्वदेशी दिपावली मनाकर प्रकृति सौंदर्य वृद्धि में देना होगा योगदान – योगेश शास्त्री
सत्यखबर, सतनाली मंडी (मुन्ना लाम्बा) – समय के साथ-साथ हमारे अनेकों पवित्र त्यौहारों को मनाने के तौर-तरीकों में इनकी मूल भावना के विरुद्ध विकृति पैदा हो गई है। हमारे समस्त महापुरुषों ने जहां प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाने के लिए अनेकों मर्यादाएं निभाई तथा कई नई परंपराओं की शुरुआत की। वहीं आज उन्हीं महापुरुषों को स्मरण करने के अवसर पर हम प्रकृति माता के साथ अन्याय व शोषण करते हैं। दिवाली जैसे पवित्र अवसर पर हम पर्यावरण के सौंदर्य एवं स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने का कार्य करते हैं। इस बार स्वदेशी दिवाली मनाकर इन विकृतियों को समाप्त करना हैं।

यह संकल्प क्षेत्र के गांव नांवा स्थित शिक्षा भारती विद्यालय संचालक योगेश शास्त्री ने विद्यार्थियों तथा शिक्षकों को दिलाया। उन्होंने कहा कि दीपावली के अवसर पर यदि पटाखों और चाइनीज सामानों पर लगने वाला रुपया यदि दीयों पर लगाया जाए तो इससे ना केवल पर्यावरण प्रदूषित होने से बचेगा, बल्कि इससे विपरीत हम प्रकृति मां की शुद्धि की दिशा में बड़ी सेवा कर पाएंगे। इसके साथ ही देश का रुपया देश से बाहर चीन जैसे आतंक सहयोगी देशों के पास जाने की बजाय देश के ही कुम्हार समाज के उत्थान में काम आ सकेगा। इसलिए संकल्प लीजिए की अबकी बार दिवाली केवल दीपों वाली।

इस अवसर पर शास्त्री ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से आग्रह किया कि जिस कार्य के करने से भारत माता का उत्थान होता हो वह कार्य अवश्य रूप से बढ़ाना चाहिए तथा जिसके करने से भारत माता पर किसी भी प्रकार का कलंक लगता हो वह कार्य हमें रोकना चाहिए। इसलिए इस दिवाली से पूर्ण स्वदेशीकरण की ओर हमें कदम बढ़ाने चाहिए। उन्होंने बाजार की मिठाइयों के प्रति भी सतर्क रहने की सलाह दी। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने यथासंभव चाइनीज सामानों के बहिष्कार तथा अधिकतम दीयों तथा स्वदेशी उत्पादों के प्रयोग का संकल्प लिया।

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