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Haryana

शिल्पी देव विश्वकर्मा ने दिया हर हाथ को हुनर -रामचंद्र जांगड़ा

सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :- श्री विश्वकर्मा मंदिर एवं धर्मशाला प्रबंधक कमेटी के तत्वाधान में श्री विश्वकर्मा दिवस पर मंदिर परिसर में विशाल समारोह का आयोजन कि या। समारोह में पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा बतौर मुख्यातिथि शरीक हुए। उन्होंने अपने संबोधन में श्री विश्वकर्मा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि […]

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सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :- श्री विश्वकर्मा मंदिर एवं धर्मशाला प्रबंधक कमेटी के तत्वाधान में श्री विश्वकर्मा दिवस पर मंदिर परिसर में विशाल समारोह का आयोजन कि या। समारोह में पिछड़ा वर्ग कल्याण महासभा के चेयरमैन रामचंद्र जांगड़ा बतौर मुख्यातिथि शरीक हुए। उन्होंने अपने संबोधन में श्री विश्वकर्मा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि शिल्पी देव विश्वकर्मा की प्रेरणा से करोड़ों लोग हाथ से काम करके अपना परिवार चला रहे हैं। उन्होंने हाथ से काम करने वाले हर कारीगर को शिल्पी देव विश्वकर्मा को मानने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए तथा मेद्यावी छात्रों को सम्मानित किया। समिति के सदस्यों ने रामचंद्र जांगड़ा को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इससे पूर्व सुबह पांच बजे प्रभात फेरी निकाली गई। मंदिर में हवन किया गया और सभा का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर सुनीता दुग्गल, बलविन्द्र धीमान, प्रधान सतबीर धीमान, देवेंद्र जांगड़ा, एडवोकेट दयाल धरौदी, बलविन्द्र धीमान, जगदीश पांचाल, विजय खरल, बलजीत जांगड़ा, रिया जांगड़ा, मा. नाथीराम, जयकिशन आदि सहित अनेक लोग मौजूद थे।
वहीं गांव ढाबी टेक सिंह के विश्वकर्मा मंदिर में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे युवा कांग्रेस नेता सतबीर दबलैन ने ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान श्री विश्वकर्मा जी सम्पूर्ण समाज के शिल्पकारों के भाग्य विधाता हैं, उनके द्वारा निर्मित किए औजारों की बदौलत आज करोड़ों लोगों को रोजगार मिल हुआ है। विश्वकर्मा को पूजने वाला कोई भी व्यक्ति भूखा नही सो सकता। युवाओं को भगवान श्री विश्वकर्मा के दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए, उन्होंने द्वारिका नगरी, हस्तिनापुर नगर और रावण की सोने की लंका का ही निर्माण नहीं किया, बल्कि देवताओं के सभी अस्त्र-शस्त्र जैसे कि विष्णु का सुदर्शन, शिव का त्रिशूल एवं इंद्र का वज्र भी उन्होंने ही बनाया। ऐसे सृष्टि के प्रथम शिल्पकार को हम सब नमन करते हैं।

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