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Haryana

सद्विचारों और सत्कर्मो की एकरूपता ही चरित्र है – स्वामी अग्रिदेव

सत्यखबर, सफीदों (महाबीर मित्तल) – नगर के गुरू गोबिंद सिंह सीनियर सैकेंडरी स्कूल में बुधवार को एक दिवसीय चरित्र निर्माण शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर गुरूकुल कालवा के स्वामी अग्रिदेव उपदेशक के रूप में मौजूद रहे। शिविर की अध्यक्षता स्कूल के चेयरमैन गुलाब सिंह किरोड़ीवाल ने की। अपने संबोधन में स्वामी अग्रिदेव […]

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सत्यखबर, सफीदों (महाबीर मित्तल) – नगर के गुरू गोबिंद सिंह सीनियर सैकेंडरी स्कूल में बुधवार को एक दिवसीय चरित्र निर्माण शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर गुरूकुल कालवा के स्वामी अग्रिदेव उपदेशक के रूप में मौजूद रहे। शिविर की अध्यक्षता स्कूल के चेयरमैन गुलाब सिंह किरोड़ीवाल ने की। अपने संबोधन में स्वामी अग्रिदेव ने कहा कि जीवन में चरित्रवान होना बेहद जरूरी है। बिना चरित्र के मनुष्य के पास कुछ भी नहीं है। उन्होने कहा कि सद्विचारों और सत्कर्मो की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छाओं को नियंत्रित रखते हैं और उन्हें सत्कर्मों का रूप देते हैं उन्हीं को चरित्रवान कहा जा सकता है।

संयत इच्छाशक्ति से प्रेरित सदाचार का नाम ही चरित्र है। चरित्र मानव जीवन की स्थाई निधि है। जीवन की स्थाई सफलता का आधार मनुष्य का चरित्र ही है। सेवा, दया, परोपकार, उदारता, त्याग, शिष्टाचार और सद्व्यवहार आदि चरित्र के बाह्य अंग हैं, तो सद्भाव, उत्कृष्ट चिंतन, नियमित-व्यवस्थित जीवन, शांत-गंभीर मनोदशा चरित्र के परोक्ष अंग हैं। किसी व्यक्ति के विचार इच्छाएं, आकांक्षाएं और आचरण जैसा होगा, उन्हीं के अनुरूप चरित्र का निर्माण होता है। उन्होंने बच्चों को लक्ष्य निर्धारण के लिए भी प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में चेयरमैन गुलाब सिंह किरोड़ीवाल ने स्वामी अग्रिदेव को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

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