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Haryana

समाज के ठेकेदार बने हुए हैं क्या वे निभाते हैं नियम: साध्वी

महाराणा प्रताप जयंती 9 मई को एक जगह पर एकत्रित होकर मनाए सत्यखबर, सतनाली मंडी (मुन्ना लाम्बा)। महाराणा प्रताप जयंती मनाने के पीछे जो समाज राजपूत तथा राजपूतों के ठेकेदार बने हुए हैं, क्या वह पूरी तरह से नियमों को निभाते हैं? यह प्रश्र देवा इंडिया फाउंडेशन डायरेक्टर साध्वी देवा ठाकुर ने जारी एक प्रैस […]

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महाराणा प्रताप जयंती 9 मई को एक जगह पर एकत्रित होकर मनाए

सत्यखबर, सतनाली मंडी (मुन्ना लाम्बा)। महाराणा प्रताप जयंती मनाने के पीछे जो समाज राजपूत तथा राजपूतों के ठेकेदार बने हुए हैं, क्या वह पूरी तरह से नियमों को निभाते हैं? यह प्रश्र देवा इंडिया फाउंडेशन डायरेक्टर साध्वी देवा ठाकुर ने जारी एक प्रैस विज्ञप्ति में पूछा। साध्वी देवा ठाकुर ने कहा कि आज समाज में जयंतियां मनाने की जो एक-दूसरे से हौड़ लगी हुई है। कोई सफीदों में शूरवीर महाराणा प्रताप की जयंती मनाता है तो कोई करनाल, सहारनपुर या संपूर्ण प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर मनाते हैं। लेकिन प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि वे 9 मई को शूरवीर महाराणा प्रताप की जयंती एक जगह पर एकत्रित होकर मनाए ताकि व्यर्थ के अधिक खर्च व जातिवाद की विडंबना से बचा जा सके। इससे हिंदुत्व में भी दरार नहीं आएगी।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग जगह पर भिन्न-भिन्न तरीकों से मनाई जा रही जयंतियों पर जो कुल मिलाकर लाखों रूपये का खर्च होता है, उसे राजपूत व अन्य समाजों के हितों में या फिर किन्हीं सामाजिक, आमजन हित कार्यों जैसे गरीब कन्याओं की शादी में सहायता राशि, प्रकृति को बचाने के लिए पेड़ लगाना, गरीब बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध करवाना आदि में लगा देना चाहिए ताकि किसी गरीब व्यक्ति को अपनी जमीन न बेचनी पड़े, किसी लडक़ी को आत्महत्या, ससुराल पक्ष द्वारा जलाकर न मारना, युवाओं को रोजगार के अवसर मिलना तथा किसी बच्चे का भविष्य संवर सके। उन्होंने कहा कि मैं महाराणा प्रताप की जयंती के खिलाफ नहीं हूं।

महाराणा प्रताप भारत के महान शूरवीरों में एक थे जिन्होंने प्रत्येक वर्ग की भलाई, मातृसेवा व देशभक्ति के लिए अपना संपूर्ण जीवन न्यौछावर कर दिया था। आज हमें उनके जीवन से प्ररेणा लेकर देश की सेवा करनी चाहिए जिससे स्वयं के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति का भला हो सके। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय तलवार से लडऩे का नहीं अपितु समाज व देश के विकास के लिए भावी पीढ़ी को शिक्षित बनाने का है ताकि समाज में प्रचलित अनेकों विडंबनाओं का जड़ से उखाड़ फेंका जा सके।

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