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Haryana

सरकार की विकास नीतियों की धज्ज्यिां उड़ा रहे हैं नप के अधिकारी-सुभाष सिंगला

सीएम विडों में भी ठेकेदार की शिकायत का समाधान नहीं सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :- वार्ड नं. 18 में अपोलो चौंक के पास एक गली का टैंडर 12 जनवरी 2017 को ऑनलाईन भरा गया था। जिसकी सरकारी फीस भी ठेकेदार ने नगर परिषद में डीडी द्वारा जमा करवाई गई थी। लेकिन सवा साल बीत जाने […]

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सीएम विडों में भी ठेकेदार की शिकायत का समाधान नहीं

सत्यखबर, नरवाना (सन्दीप श्योरान) :- वार्ड नं. 18 में अपोलो चौंक के पास एक गली का टैंडर 12 जनवरी 2017 को ऑनलाईन भरा गया था। जिसकी सरकारी फीस भी ठेकेदार ने नगर परिषद में डीडी द्वारा जमा करवाई गई थी। लेकिन सवा साल बीत जाने के बाद भी ठेकेदार को गली बनाने के लिए नप के अधिकारियों द्वारा वर्क ऑर्डर नहीं दिया गया। जिस कारण इस गली का निर्माण कार्य नहीं हो सका। जिससे वहां के लोगों को भी दिक्कतों के सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार सुभाष सिंगला ने बताया कि गली का निर्माण कार्य शुरू करने के लिए उन्होंने नप से क ई बार वर्क ऑर्डर देने की मांग की। लेकिन अधिकारी आज तक भी वर्क आर्डर ठेकेदार को देने के लिए तैयार नहीं है। ठेकेदार ने बताया कि उन्होंने सरकार की ई-टै्रडरिंग के अनुसार गली को टैंडर लिया था। जिसके लिए उन्होंने 10 हजार रूपए अरनैस्ट मनी व 1500 रूपए टैंडर फीस खर्च की थी। लेकिन जब लम्बे समय तक ठेकेदार को वर्क ऑर्डर नहीं मिला तो उन्होंने अपनी यह समस्या सीएम विंडो में डाली। ठेकेदार ने बताया कि सीएम विडों की जांच आने के बाद अधिकारियों ने उस पर दबाव डाला गया। लेकिन उन्होंने सही जानकारी मांगी तो अधिकारियों ने सीएम विंडो के सदस्यों से झूठ बोलकर सीएम विडों की शिकायत पर हस्ताक्षकर करवाकर फाईल को बंद कर दिया। लेकिन जब ठेकेदार द्वार सीएम विडों में अपनी शिकायत की स्थिति जांची तो पता चला कि उनका यह मामला तो कई माह पहले ही बंद हो चुका है। वहीं जब उन्होंने नप के सचिव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बारे विभाग के एमई से जवाब मांगा गया है। ठेकेदार का आरोप है कि एमई व सचिव दोनों मिलकर ठेकेदार को गुमराह कर रहें हैं। जिस कारण गली का निर्माण कार्य नहीं हो सका।

सरकार की विकास नीतियों पर काम नहीं कर रहे अधिकारी
ठेकेदार सुभाष सिंगला ने बताया कि सरकार शहर में विकास कार्य करवाकर सबका साथ सबका विकास करवाना चाहती है। लेकिन नगर परिषद के अधिकारी अपने कमीशन के चक्कर में सरकार के विकास कार्यों में रोड़ा अटका रहें है। जिससे साबित हो जाता है कि इस प्रकार के अधिकारी सरकार की विकास नीतियों के खिलाफ है। वे नहीं चाहते कि शहर में कोई विकास कार्य हो और लोग सरकार से खुश हों।

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