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Chandigarh

हरियाणा के गृह मंत्री विज बोले- खुद भी करें कोरोना से बचाव, देश, समाज व परिवार की चिंता करें लोग

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सत्यखबर, चढ़ीगढ़

जैसे-जैसे कोरोना का असर बढ़ रहा है, लोगों ने उसे गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। कोरोना से बचाव के लिए उपयोगी मास्क, सेनीटाइजर और फिजिकिल डिस्टेंसिंग के नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे लोगों को कोरोना पूरी मजबूती के साथ दबोच रहा है।

हरियाणा में कोरोना से अभी तक 77 हजार लोग संक्रमित हो चुके हैैं, जबकि ठीक होने वाले लोगों का आंकड़ा 60 हजार भी संतोषजनक है। अभी भी करीब 17 हजार केस ऐसे हैैं, जो एक्टिव हैैं, लेकिन 810 लोगों की मौत ने पूरे सिस्टम तथा लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। इन लोगों के जाने का दर्द क्या है, यह तो उनके परिवार के लोग ही जानते हैैं, लेकिन जिस तरह से अधिकतर लोग अब कोरोना को नजरअंदाज कर अपनी रूटीन की दिनचर्या में लौट आए हैैं, उसके किसी भी समय घातक नतीजे सामने आ सकते हैैं।

बता दे की हरियाणा सरकार और प्रशासनिक अधिकारी अपनी क्षमता के अनुसार संक्रमित लोगों का इलाज कर रहे हैैं। प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज के नाम पर उनके मोट-मोटे बिल बनाकर खाल उतारने को तैयार बैठे हैैं। बीमार व्यक्ति की नेगेटिव रिपोर्ट को पाजिटिव बनाकर पैसे बनाने का धंधा भी अब तेजी से चल रहा है। ऐसे में कोरोना से बचाव की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सरकार या प्रशासन की तो है ही, लेकिन लोगों की भी है।

प्रदेश के लोगों का इम्युनिटी सिस्टम जबरदस्त है। करीब 22 लाख यानी आठ फीसद लोगों में कोरोना आकर चला भी गया। इसके बावजूद 92 प्रतिशत लोगों को यह नहीं समझ लेना चाहिए कि कोरोना का असर कम या खत्म हो रहा है। प्रदेश में इम्युनिटी बढ़ाने वाली दवाइयों की बिक्री में करीब 70 फीसद का उछाल आया है। प्राइवेट सेक्टर के अस्पतालों का कारोबार 35 फीसद तक बढ़ गया है, जबकि सरकारी अस्पतालों में इलाज को लेकर उतनी गंभीरता नहीं रही, जितनी आरंभ में होती थी।

हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज अपने एसीएस राजीव अरोड़ा के साथ हर रोज पूरे प्रदेश की समीक्षा कर रहे हैैं। जरूरी सामान और दवाइयों की कोई कमी नहीं रहने दी जा रही है, लेकिन कोरोना से बचाव के लिए सिर्फ सरकार पर ही जिम्मेदार रहना कहीं की समझदारी नहीं है। कोरोना से बचाव के लिए जहां सामाजिक संगठनों को एक बार फिर लोगों को जागरूक बनाने का अभियान तेजी से चलाना होगा, वहीं गांवों की पंचायतों को भी आगे बढ़कर छिड़काव व जागरूकता अभियान को गति देने की जरूरत है।