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Haryana

हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन ने किया सिविल अस्पताल का निरीक्षण

सत्यखबर, रेवाड़ी(संजय कौशिक )  विपक्ष द्वारा उठाए गए स्वास्थ्य घोटाले के बाद अब प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है और यह उसी का परिणाम कहें की नागरिक अस्पताल में चल रही अनियमितताओं को लेकर अब हरियाणा महिला आयोग ने अस्पतालों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। इसी के तहत आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन […]

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सत्यखबर, रेवाड़ी(संजय कौशिक )

 विपक्ष द्वारा उठाए गए स्वास्थ्य घोटाले के बाद अब प्रदेश सरकार भी हरकत में आ गई है और यह उसी का परिणाम कहें की नागरिक अस्पताल में चल रही अनियमितताओं को लेकर अब हरियाणा महिला आयोग ने अस्पतालों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। इसी के तहत आयोग की चेयरपर्सन प्रतिभा सुमन ने आज रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल का निरीक्षण किया और डिलीवरी के लिए यहां आने वाली प्रसूताओं को रैफर करने पर नाराजगी जताई। साथ ही स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अस्पताल में चल रही कमियों को जल्द दूर करें। अन्यथा सख्त कार्यवाही की जाएगी। इस स्पेशल विजिट के दौरान आज उन्होंने नागरिक अस्पताल के ओपीडी, महिला वार्ड, लेबर रूम, वृद्धाश्रम व महिला थाना का भी दौरा किया। उनके निरीक्षण के कारण आज अस्पताल का नजारा कुछ बदला बदला सा दिखाई दिया। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि अस्पताल में मशीनों की कमी है, डाक्टरों की नहीं। जल्द ही इस कमी को भी दूर करने के लिए वे स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेंगी। जहां तक बेटियों की सुरक्षा का सवाल है तो इस मामले में सभी दलों को एक होने की जरूरत है। विपक्षी दलों को चाहिए कि वे आरोप लगाने से पहले काम करके दिखाएं। आयोग द्वारा जागरूकता कैंप लगाकर इस दिशा में विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं करीब एक पखवाड़े पूर्व रेवाड़ी अस्पताल के डाक्टरों की लापरवाही के कारण डिलीवरी के दौरान हुई नवजात की मौत के सवाल पर उन्होंने नाराजगी जताई और कहा कि किसी भी पेसेंट को इस तरह रैफर कर करना गलत है और अगर ऐसा होता है तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। हम आपको बता दें कि गत 10 मार्च को रेवाड़ी जिले के गांव नेहरूगढ़ की रहने वाली एक प्रसूता को डिलीवरी के लिए नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रसूता के पति का आरोप है कि यहां मौजूद स्टाफ ने बजाय डिलीवरी कराने के उसे इंजेक्शन लगाकर रैफर कर दिया और इलाज में देरी के कारण उसके बच्चे की मौत हो गई थी। अब देखना यह होगा कि ऐसे मामलों को लेकर महिला आयोग और स्वास्थ्य मंत्री कितनी गंभीरता दिखाते हैं।

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