Connect with us

Jind

खरीद एजेंसी ने रोका किसान की गेंहू की फसल का भुगतान, एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

Published

on

सफीदों, महाबीर मित्तल
उपमंडल के गांव छापर के किसान जसपाल सिंह की गेंहू की फसल का भुगतान खरीद एजेंसी हैफेड द्वारा रोक लिए जाने के मामले में भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) के जिलाध्यक्ष लीलूराम की अगुवाई में किसानों ने बुधवार को मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नाम एक ज्ञापन एसडीएम सत्यवान मान को सौंपा। इसके अलावा किसानों ने हैफेड के प्रबंध निदेशक को भी एक नोटिस भेजा है। किसानों ने सरकार, प्रशासन व खरीद एजेंसी को चेताया कि पीडि़त किसान जसपाल सिंह को 15 दिन के भीतर ब्याज सहित भुगतान नहीं किया गया तो किसान यूनियन सफीदों के सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना देने को विवश होगी। किसान नेताओं ने बताया कि अप्रैल 2021 में जसपाल सिंह ने 249 क्विंटल 50 किलो गेहूं सफीदों की अनाज मंडी में हैफेड एजेंसी को बेची थी। एजेंसी ने करीब पांच माह बाद सितम्बर 2021 में किसान को जो भुगतान किया उसमें 73 हजार रुपये का भुगतान रोक लिया और बाद में किसान को बताया गया कि सरकार यह मानती है कि एक एकड़ में 33 क्विंटल से अधिक गेहूं की पैदावार नहीं हो सकती। बताया गया कि पोर्टल पर लोड किये गेहूं क्षेत्र अनुसार प्रति एकड़ अधिकतम 33 क्विंटल गेहूं की खरीद होनी थी लेकिन किसान ने इस मात्रा से अधिक गेहूं बेची है जिसका भुगतान रोका गया है। उन्होंने कहा कि ऐसी गेहूं का भुगतान 73 हजार रुपये बनता है जो तत्काल प्रभाव से किसान के खाते में जमा कराया जाए। किसान नेता का कहना है कि यह एक तरह से किसान से शर्मनाक लूट है जिसकी दुनिया की कोई अदालत या पंचायत इजाजत नहीं देती है। लीलूराम ने कहा कि पीडि़त किसान ने सीएम विंडो में शिकायत की जिसमे भाजपा के एमिनेंट पर्सन्स ने सिफारिश की है कि सरकार या तो किसान को भुगतान करे या फिर उसकी गेहूं लौटा दे लेकिन इसके बावजूद किसान को भुगतान नहीं किया। किसान नेता ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यदि निर्धारित मात्रा से अधिक खरीद हुई तो गलती एजेंसी की है औऱ लूटा किसान को जा रहा है। इस बारे हैफेड के नेटवर्क सुपरवाईजर अरुण सिंगला ने बताया कि मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर अपलोड क्षेत्र के मुताबिक किसान ने 33 क्विंटल प्रति एकड़ की निर्धारित अधिकतम सीमा से अधिक जितनी गेहूं बेची है उसका भुगतान जिला के उपायुक्त के निर्देश पर रोका गया है। उन्होने बताया कि यह मामला अब उनकी एजेंसी के हाथ मे नहीं इसका फैसला तो सरकार करेगी।
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *