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खुदरा व्यापार और लघु एवं मझले उद्योग जगत का भरोसा डगमगाया: अशोक बुवानीवाला

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सत्य खबर समालखा, महाबीर मित्तल: कोविड-19 के मुश्किल दौर में खुदरा व्यापार और लघु एवं मझले उद्योग जगत का भरोसा डगमगाया हुआ है। लगातार दो लॉकडाउन से बर्बाद हो चुका व्यापारी वर्ग इस हालत में नहीं है कि अब कोविड की तीसरी लहर से आने वाले खतरे का सामना कर अपने व्यापार को बचा सकें। इसलिए खुदरा व्यापार और लघु एवं मझले उद्योग के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार को नकद सहायता के साथ एक ठोस राहत पैकेज देना चाहिए। ये बात आज राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने समालखा में व्यापारियों की बैठक को संबोधित करते हुए कही। बुवानीवाला ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए एमएसएमई के लिए नियामकीय सहूलियतों, वेतन समर्थन और ब्याज सब्सिडी जैसी राहत सरकार को देनी चाहिए। व्यापारी नेता ने कहा कि देश और प्रदेश में अनेक संगठन स्वयंभू अध्यक्ष बनकर व्यापारियों एवं लघु उद्योगों के नाम पर बेमानी दुकान चला रहे हैं, लेकिन इस मुसीबत के समय राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन दलगत राजनीति से दूर व्यापारी भाईयों की आवाज उठाने वाला एकमात्र संगठन है। उन्होंने कहा कि खुदरा व्यापारी ई-व्यापार से प्रभावित है, वहीं दूसरी ओर लघु उद्योग सरकार की बिजली व अन्य नीतियों से की वजह से परेशान है। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को वो सरकार के पटल पर रखकर समाधान करवाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि संगठन सरकार से उद्योगों, दुकानदारों व खुदरा व्यापारियों के लिए बड़े आर्थिक पैकेज की मांग करता है क्योंकि कोविड की दो लहर बीत जाने के बावजूद सरकार ने अभी तक उनकी कोई मदद नहीं की है। बुवानीवाला ने कहा कि कोविड की तीसरी लहर की चेतावनी ने व्यापारियों की चिंताऐं ओर अधिक बढ़ा दी है। ऐसे समय में उनकी उम्मीदें केन्द्र व प्रदेश सरकार पर ही टिकी हुई है। इसलिए सरकार का कर्तव्य है कि व्यापार और उद्योग जगत को एक बड़ा आर्थिक पैकेज दिया जाए।

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बैठक के दौरान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन डंग ने कहा कि कोविड माहमारी के दौरान जो छोटे दुकानदार मंदी की वजह से पहले से आर्थिक तंगी में है उनसे प्रदेश सरकार अब संपति पहचान पत्र के नाम पर लूट रही है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा दुकानदारों से 600 रूपए प्रति गज के हिसाब से विकास शुल्क वसूला जा रहा। वहीं दूसरी और पिछले 13 साल का संपति कर 30 रूपए प्रति गज के नाम पर फायर टैक्स की वसूली की जा रही है। जो दुकानदारों के साथ अन्याय है। गुलशन डंग ने कहा कि ये विडम्बना की बात है कि हमेशा नि:स्वार्थ भाव से सरकारी खजाने को भरने के साथ-साथ किसी भी विपदा के समय दिल खोल कर देश की सेवा करने वाले व्यापारियों की जरूरत के समय सरकार ने उन्हें बिल्कुल अनदेखा कर दिया है और राहत देने की बजाएं उल्टा उन्हें लूटा जा रहा है। संगठन के प्रदेश सचिव सत्यप्रकाश गर्ग ने अपने संबोधन में कहा कि खुदरा व्यापारियों के साथ-साथ छोटे दुकानदारों की कोविड बंद के दौरान पुंजी समाप्त हो गई है, जिसकी वजह से उन्हेंं व्यापार करने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की कूनीतियों की वजह से आज छोटे दुकानदार आर्थिक रूप से कमजोर होकर बेरोजगार हो गए है। उन्होंने कहा कि लघु उद्योगों पर फिक्स बिजली चार्ज एवं सिवरेज चार्ज के नाम पर कोविड काल में वसूली की जाना न्याय संगत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की लघु उद्योगों के लिए की गई घोषणा केवल कागजों तक सीमित रह गई है। बैठक में अशोक गुप्ता, मनोज मित्तल सहित अनेक व्यापारी मौजूद रहें।

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