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उत्तराखण्ड में मिले मांसाहारी पौधे, जानिए कौन से हैं और क्या खाते हैं

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सत्य खबर, देहरादून

वैज्ञानिक के शोध में एक पौधे को लेकर अजीब तथ्य सामने आए हैं। जिसको लेकर बॉटनी के साइंटिस्ट्स का भी माथा चकरा रहा है। वैज्ञानिकों ने इस अनोखे पौधे को लेकर कहा कि ये प्रोटोजोआ से लेकर कीड़े, मच्छर लार्वा और यहां तक​​​​कि टैडपोल को भी अपना आहार बना लेता है।
पश्चिमी हिमालय के क्षेत्र में मिला दुर्लभ पौधा पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में पहली बार एक बहुत ही दुर्लभ मांसाहारी पौधा पाया गया है। वैज्ञानिकों यूट्रीकुलरिया फुरसेलटा प्रजाति के रुप में इसकी पहचान की है। यह खोज उत्तराखंड वन विभाग की शोध टीम ने की है।

 

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वैज्ञानिकों का शोध 106 पुरानी पत्रिका में प्रकाशित उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र में मिले दुर्लभ पौधे से जुड़ी रिसर्च को वैज्ञानिकों ने साझा किया है। इसे प्रतिष्ठित ‘जर्नल ऑफ जापानी बॉटनी’ में प्रकाशित किया गया है। ये पत्रिका बॉटनी के विषयों को लेकर लेख और सूचनाएं प्रकाशित करती है। वैज्ञानिकों ने यूट्रीकुलरिया फुरसेलटा प्रजाति के पौधा को मांसाहारी बताया है।उत्तराखंड के मुख्य वन संरक्षक (रिसर्च) संजीव चतुर्वेदी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि यूट्रीकुलरिया फुरसेलटा प्रजाति का पौधा न केवल उत्तराखंड में बल्कि पूरे पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में पहली बार पाया गया है।
कीड़े, मच्छर, लार्वा और टैडपोल भी खा जाता है प्लांट वैज्ञानिकों ने दुर्लभ प्रजाति के पौधे का मिलना उत्तराखंड के लिए गर्व का क्षण माना है। शोधकर्ताओं ने कहा कि ये पौधा प्रोटोजोआ से लेकर कीड़े, मच्छर लार्वा और यहां तक​​​​कि युवा टैडपोल तक को खा जाता है। उन्होंने कहा कि ये मांसाहारी पौधा एक जीनस से संबंधित है जिसे आमतौर पर ब्लैडरवॉर्ट्स के रूप में जाना जाता है। ये रिसर्च उत्तराखंड में कीटभक्षी पौधों के एक परियोजना अध्ययन के एक भाग के रूप में सामने आई है।

दूसरा पौधा बेहद ‘खतरनाक’ एक अन्य मांसाहारी पौधे जिसे वीनस फ्लाईट्रैप कहा जाता है, पर एक ताजा अध्ययन में एक और खुलासे हुए हैं। नवीनतम अध्ययन से पता चलता है कि जब वीनस फ्लाईट्रैप शिकार पर अपना मुंह बंद कर लेता है, तो यह अपने चारों ओर एक कमजोर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न कर सकता है। पौधे में एक बड़ा ‘मुंह’ होता है जो कीड़ों को आकर्षित करता है। एक बार जब शिकार धोखे के लिए गिर जाता है, तो मुंह बंद हो जाता है।