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Karnal

आरटीओ से बचने के लिए ट्रांसपोर्टरों ने लिया सोशल मीडिया का सहारा, फिर हो गया यह काम

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Transporters took the help of social media to avoid RTO

सत्य खबर, करनाल 

करनाल में पुलिस ने रोड एंड ट्रांसपोर्ट ऑफिसर यानि आरटीओ की सूचना को लीक करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर चार लोगों को दो गाड़ियों से गिरफ्तार किया है। यह गिरोह ओवरलोड वाहनों की चेकिंग के लिए निकलते ही आरटीओ की सूचना ओवरलोड ट्रक चलाने वाले ड्राइवरों तक पहुंचाता था। जिससे ओवरलोड चलाने वाले ट्रक ड्राइवर आरटीओ की छापेमारी से बच जाते थे। पुलिस की डिटेक्टिव स्टाफ की टीम ने इस गिरोह को गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार आरोपियों ने जय माता दी, आजाद परिंदा, बिल्ला भाई व जी लाइव, शर्मा जी हेल्पलाइन, तुंगनाथ महादेव, गोल्डी हेल्पलाइन, आज तक न्यूज लाइव व गोल्डी सोरा हेल्पलाइन सहित दर्जनों ऐसे वाट्सएप ग्रुप बनाए हुए थे, जिनके खुलते ही ट्रांसपोर्ट विभाग की टीम की लोकेशन मोबाइल पर आ जाती थी। जिसके बाद वाहन चालक तुरंत ही दूसरा रास्ता बदल लेते हैं और टीम को खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ता था।

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ट्रांसपोर्टरों ने नेटवर्क खड़ा किया

मिली जानकारी के अनुसार, विभाग की टीम द्वारा की जाने वाली कार्रवाई से बचने के लिए रेत, बजरी व अन्य सामान से ओवरलोड वाहनों को धड़ल्ले से चलाने वाले ट्रांसपोर्टरों ने यह नेटवर्क खड़ा किया हुआ है। जो टीम के कार्यालय से निकलते ही रेकी शुरू कर देता है और अंत तक उसके पीछे रहते है और आरटीओ की लोकेशन भेजते रहते।

डिटेक्टिव स्टाफ की टीम में एएसआई देवेंद्र कुमार ने बताया कि उनकी टीम शनिवार दोपहर को अपराध की रोकथाम के लिए बलड़ी बाईपास पर खड़ी थी। इस दौरान सूचना प्राप्त हुई कि चार आरोपियों का गिरोह है जो आरटीओ की लोकेशन ग्रुप में भेजते है। सूचना के बाद टीम ने हाईवे किनारे एक ढाबे के पीछे से चारों आरोपियों गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों में एक आरोपी रोहतक का तो तीन आरोपी यूपी के रहने वाले थे।

ये हुआ खुलासा

सदर थाना में दर्ज एफआईआर में आरोपी जुबेर निवासी गांव केरटु यूपी से 500 रुपए का एक नोट व एक मोबाइल बरामद किया गया, जिसकी जांच की तो राकीब नाम से सेव किए नंबर पर गाड़ियों की क्रॉसिंग को लेकर चैटिंग की हुई थी। उसके साथ कार में बैठे दूसरे आरोपित समीर उर्फ अंकुश निवासी गांव चुलियाना जिला रोहतक से एक हजार रुपए व मोबाइल बरामद हुआ। इसके मोबाइल में कई वाट्सएप ग्रुप बनाए हुए थे, जिसमें आरीटए स्टाफ की गाडियों की चेकिंग लोकेशन को लेकर चैटिंग की हुई है। जिस गाड़ी में यह दोनों आरोपी सवार थे, वह गाड़ी आरोपी जुबेर की मिली।

फीस नाम से था ग्रुप

दूसरी कार से आरोपी शाहिर निवासी गांव केरटु से दो हजार रुपए व एक मोबाइल मिला। मोबाइल में दर्जनों वाट्सएप ग्रुप बनाए हुए थे। वहीं इसी मोबाइल में तुंगनाथ महादेव, बागपत के किंग व दीपक केकेआर 2 के नाम से बिजनेस ग्रुप बने हुए हैं। इसी मोबाइल में एसटीसी, भाईचारा ग्रुप, हापुड़ किंग व गाजियाबाद एक्सप्रेस वे के नाम से ग्रुप भी पाए गए। इन सभी में आरटीओ टीम की लोकेशन को लेकर चैटिंग की हुई है। इसी कार में दूसरे आरोपित आजम वासी गांव शेखपुरा जागीर से 2800 रुपए व मोबाइल मिला, जिसकी जांच की तो कई वाट्सअप ग्रुप पाए गए। आरोपी ने फीस नाम से भी एक ग्रुप बनाया था। जिसमें लोकेशन भेजने को लेकर ली गई रकम का हिसाब लिखा हुआ था। यह कार शाहिर चौधरी वासी गांव केरटु यूपी के नाम पर पाइ गई।

मिली रही थी शिकायतें

आरटीओ विभाग के पास ट्रांसपोर्टरों द्वारा रेत, बजरी समेत अन्य सामान से ओवरलोड वाहन दिल्ली व उत्तर प्रदेश की ओर यमुनानगर से करनाल होते हुए धड़ल्ले से चलाए जाने की शिकायतें लगातार मिल रही थी, जिसके चलते विभाग ने इस पर शिकंजा कसने के लिए छापेमारी तेज कर दी थी। लेकिन इससे बचने के लिए ही ट्रांसपोर्टरों ने यह नेटवर्क खड़ा किया था।