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जींद : बीरेंद्र सिंह ने कार्यक्रम में आप में जाने की चर्चाओं पर कही ये बड़ी बात

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सत्य खबर, जींद । पूर्व केंद्रीय मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन के 50 साल पूरे होने पर आज जींद के उचाना में एक कार्यक्रम का आयोजन किया. कार्यक्रम में कुर्सियां खाली नजर आई. 6000 के लगभग कुर्सियां लगाई गई थी, लेकिन हाजिरी 2500 के आसपास रही. इस मौके पर आप पार्टी हरियाणा के प्रभारी सांसद सुशील गुप्ता, पूर्व मंत्री रामबिलास शर्मा, विधायक अभय चौटाला मुख्य तौर पर उपस्थित रहे. चौधरी बीरेन्द्र सिंह के इस कार्यक्रम का संचालन खुद उनके बेटे सांसद बृजेंद्र सिंह कर रहे थे. इस कार्यक्रम में सुशील गुप्ता सांसद, पूर्व मंत्री विपुल गोयल, पूर्व मंत्री रामपाल माजरा, पूर्व मंत्री सुभाष बत्रा पूर्व मंत्री इत्यादि प्रमुख तौर पर उपस्थित रहे.

इस कार्यक्रम में उन बड़े बड़े नेताओं को आमंत्रित किया गया था जिनके साथ बीरेंद्र सिंह को 50 साल के राजनीतिक जीवन में काम करने का मौका मिला. बताया ये भी गया था कि कई पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया और कयास तो ये भी लगाए जा रहे थे कि इस कार्यक्रम रूपी रैली के माध्यम से बीरेंद्र सिंह आप पार्टी में शामिल होने का संकेत भी दे सकते हैं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. न तो कोई पूर्व मुख्यमंत्री आया, न कोई बड़ा राष्ट्रीय नेता इस कार्यक्रम में दिखाई दिया और न ही बीरेंद्र सिंह ने किसी पार्टी में शामिल होने की घोषणा की. कार्यक्रम में बीजेपी से सम्बंधित कोई भी झंडा या पोस्टर नजर नहीं आया. इससे यह तो स्पष्ट था कि कहीं न कहीं उनका बीजेपी से मोह भंग जरूर हो चुका है.

इस अवसर पर चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें बड़ा दुख है कि आज के उनके इस कार्यक्रम में कोई भी मौजूदा पार्टी का विधायक या मंत्री नहीं आया. उनका सीधा सीधा इशारा बीजेपी की तरफ था. बीरेन्द्र सिंह ने सुशील गुप्ता द्वारा उनकी पार्टी में आने पर स्वागत करने की बात पर कहा कि स्वागत में कुछ नहीं होता, उससे आगे की बात करो. यानी उनका इशारा था कि सीएम की बात करो, लेकिन उन्होंने बात को इस तरह घुमाया कि जो भी भष्टाचार से लड़ाई की बात करेगा, हम उनके साथ होंगे. उन्होंने कहा कि मैं प्रदेश के कोने कोने में जाऊंगा, गरीब हितों के मुद्दों को उठाऊंगा और फिर जो बदलाव होगा उसमें आप सब मेरा साथ देना.
इस अवसर पर आप के हरियाणा प्रभारी सुशील गुप्ता ने कहा कि आज परिवर्तन का दौर चल रहा है. दिल्ली में बदलाव आ चुका, पंजाब में आ चुका और अब हरियाणा की बारी है. चौधरी बीरेंद्र सिंह के बारे में उन्होंने कहा कि 50 साल के राजनीतिक जीवन में उन पर कोई दाग नहीं है. अगर वे पार्टी में आना चाहें तो उनका स्वागत है. उन्होंने बीरेन्द्र सिंह की तरफ ये भी इशारा किया कि उनके जो भी सपने पूरे नहीं हुए वे सब पूरे हो जाएंगे. यानी उन्हें खुल कर काम करने का मौका मिलेगा इसलिए मन बनाओ, हमारी तरफ से स्वागत है. बहरहाल जन्मदिन के बहाने जींद में आयोजित किये गए कार्यक्रम से कई मायने निकलते दिखाई दे रहे हैं. कार्यक्रम में जहां बीजेपी से सम्बंधित कोई भी पोस्टर झंडी और फ्लेक्स नजर नहीं आया वहीं बीजेपी के एक भी बड़े नेता का न आना, इससे तो यह स्पष्ट जरूर हो गया कि बीरेंद्र सिंह का बीजेपी के साथ सब कुछ सही नहीं चल रहा.

कौन हैं चौधरी बीरेंद्र सिंह?

हरियाणा में बीरेंद्र सिंह मौजूदा दौर में भी सबसे कद्दावर नेताओं में से एक माने जाते हैं. वे लगभग 50 साल से राजनीति में हैं. आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक तौर पर एक मजबूत प्रभाव रखने वाले परिवार से बीरेंद्र सिंह ताल्लुक रखते हैं. वे हरियाणा के प्रख्यात किसान नेता सर छोटू राम के पोते हैं और उनके पिता नेकी राम भी हरियाणा की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे हैं. साल 1977 में पहली बार उचाना कलां विधानसभा सीट बनी. चौधरी बीरेंद्र सिंह यहां के पहले विधायक बने. बीरेंद्र सिंह पांच बार 1977, 1982, 1994, 1996 और 2005 में उचाना से विधायक बन चुके हैं और तीन बार हरियाणा सरकार में मंत्री रह चुके हैं. बीरेंद्र सिंह साल 1984 में हिसार लोकसभा क्षेत्र से पहली दफे सांसद बने. उन्होंने इनेलो के ओमप्रकाश चौटाला को हराकर पहली बार सांसद बने थे.साल 2010 में कांग्रेस के टिकट से राज्यसभा सदस्य मनोनीत हुए, लेकिन कांग्रेस से 42 साल तक जुड़े रहने के बाद बीरेंद्र सिंह 16 अगस्त 2014 में जींद की एक रैली में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में शामिल हो गए. मोदी सरकार में बीरेंद्र सिंह केंद्रीय मंत्री रहे. जून 2016 में बीजेपी ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेज दिया. बीरेंद्र सिंह साल 2020 तक राज्यसभा सदस्य रहे. जींद से उनके बेटे और पूर्व आईएएस अधिकारी बृजेंद्र सिंह ने साल 2019 का लोकसभा चुनाव जीता तो उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. इस्तीफा देने के बाद बीरेंद्र सिंह ने भविष्य में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था.

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