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हांसी में एसपी कार्यालय का घेराव:थ्री लेयर सुरक्षा के लिए अतिरिक्त फोर्स तैनात

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सत्य खबर, नारनौंद । नारनौंद शहर में शनिवार को हुई किसानों की पंचायत द्वारा प्रशासन को दिया गया अल्टीमेटम पूरा हो गया है, लेकिन अभी तक उनकी मांगें नहीं मानी गई हैं। इसलिए किसान आज हांसी में एसपी कार्यालय का घेराव करेंगे। किसानों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि इस घेराव में प्रदेश के अलावा, पंजाब, राजस्थान व उत्तर प्रदेश तक के किसान हांसी पहुचेंगे।

संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसानों को हांसी पहुंचने की कॉल के बाद प्रशासन ने भी अपने स्तर पर तैयारियां की हैं। हांसी में रेंज के सभी जिलों से पुलिस फोर्स को बुलाया गया है। वहीं हालात काबू करने के लिए 11 ड्यूटी मजिस्ट्रेट को तैनात किया गया है। इनके अलावा तीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट को रिजर्व में भी रखा गया है। संयुक्त किसान मोर्चा के कई बड़े किसान नेता हांसी घेराव में पहुंचने वाले हैं।

किसानों ने दिया है एक बजे घेराव का समय

किसानों ने एसपी कार्यालय का घेराव करने के लिए दोपहर एक बजे का समय दिया है। सभी किसानों को सुबह 10 बजे ही हांसी सचिवालच में बुलाया गया है। दूसरी तरफ प्रशासन की तैयारी किसानों को सचिवालय से दूर रोकने की है। इसके लिए हांसी प्रशासन ने रात को ही सचिवालय की बेरिकेडिंग शुरू कर दी थी। प्रशासन द्वारा किसानों को जींद रोड, दिल्ली रोड व हांसी शहर की तरफ नाकेबंदी करके सचिवालय से दूर रखने की तैयारी है।

नारनौंद विवाद पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि सांसद की गाड़ी का सिर्फ शीशा टूटने पर किसानों पर 8 धाराओं में केस दर्ज किया जाता है। अभी तक तो यह भी स्पष्ट नहीं है कि शीशा पुलिस की लाठी से टूटा या किसानों ने तोड़ा है। वहीं दूसरी तरफ एक युवा किसान को सांसद व उसके साथ आए लोगों ने मरणासन्न हालत में पहुंचा दिया है। उस मामले में अभी तक केस तक दर्ज नहीं किया गया है। प्रशासन द्वारा एक तरफा की जा रही यह कार्रवाई बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
दो बार पहले बैकफुट पर आ चुका है प्रशासन

नारनौंद प्रकरण से पहले हिसार में मुख्यमंत्री मनोहर लाल द्वारा संजीवनी अस्पताल के उद्धाटन के दौरान किसानों और पुलिस में हुई झड़प में कई किसानों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया था। इसके अलावा आर्यनगर गांव में डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा की गाड़ी का शीशा टूटने के मामले में भी किसानों पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया गया था। दोनों ही मामलों में किसानों द्वारा किए गए आईजी कार्यालय के घेराव के बाद इन केसों को रद्द करना पड़ा था।