Connect with us

Haryana

इनेलो किसान सैल के प्रदेशाध्यक्ष ने जाना किसानों व आढ़तियों का हाल

लदान न होने से आढ़ती परेशान, सरकार की नाकामी – निशान सिंह सत्यखबर, टोहाना (सुशील सिंगला) – निशान सिंह ने कहा कि खरीद ऐजंसियों को सरकार द्वारा बार बार बदलने से गेंहू के लादान में समस्या आ रही है जिससे आढ़ती की परेशानी बढ़ रही है ऐसे में मौसम खराब हो जाता है तो हजारों […]

Published

on

लदान न होने से आढ़ती परेशान, सरकार की नाकामी – निशान सिंह

सत्यखबर, टोहाना (सुशील सिंगला) – निशान सिंह ने कहा कि खरीद ऐजंसियों को सरकार द्वारा बार बार बदलने से गेंहू के लादान में समस्या आ रही है जिससे आढ़ती की परेशानी बढ़ रही है ऐसे में मौसम खराब हो जाता है तो हजारों टन गेंहू बरबाद हो जाएगा जिसका असर सीधे तौर पर आढ़तियों के कारोबार पर पढ़ेगा। उन्होने कहा कि एक ओर सरकार किसान की आमदनी दौगुणा करने की बात कर रही है दुसरी ओर सरकार किसान को मुलभूत सुविधाऐं देने में नाकाम साबित हो रही है।

वहीँ आढ़तिया ने आरोप लगाया है कि लदान करने के लिए ट्रक चालक उनसे पैसे लेते है इस बात का संबधित विभाग के अधिकारियों को भी पता है उन्होने कहा कि जब लदान नही होता है तो खराब मौसम को देखते हुए उन्हे मजबुरन यह सब कुछ करना पड़ता है। जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है। आढ़तियों की माने तो सरकार कहती है कि गेंहू खरीद के बाद 72 घंटे में उसका भुगतान कर दिया जाएगा लेकिन आज 15 दिन बीत जाने के बाद भी खरीद ऐजंसियों ने एक पैसे का भुगतान नही किया है ऐसे में किसान की जरूरतों के उन्हे अपने नीजी कोष से पैसा देना पड़ रहा है।

सरकारी ऐजंसियां का कहना है कि पहले लादान करवाए तभी खरीदी गई गेंहू के पैसों का भुगतान किया जाएगा। लादान करवाना आढ़ती की जिम्ंमेदारी नही है यह सरकार की जिंमेदारी है ऐसे में आढ़ती को जान छुड़ाने के लिए मजबूरी में लादान के लिए रिश्वत देनी पड़ती है जिससे उन्हे आर्थिक रूप से भी नुकसान उठाना पड़ रहा है अगर सरकार व प्रशासन ने जल्द इसका समाधान नही किया तो आढ़ती सड़कों पर उतरने को तैयार होगा जिसकी जिंमेदार प्रशासन व सरकार होगी। बता दें कि खुले आसमान के तले पड़े गेंहू का सही समय पर लादान नही हुआ तो अगर मौसम ने करवट लेली हजारों टन गेहू पानी की भेट चढ़ जाएगा। जिसका सीधे तौर पर आढ़ती का नुकसान होना तय है।

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.