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पारंपरिक खेती छोड़ किसानों ने क्यों हो रहे है ड्रैगन फ्रूट की खेती में मशगुल, पढ़े ये हैरान कर देने वाली स्टोरी

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Dragon fruit

Dragon fruit farming getting rich

सत्यखबर, पलवल। पलवल जिले के किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू कर दिया है। प्रगतिशील किसान जमील अहमद ने बताया कि घरौंडा के करनाल में ड्रैगन फ्रूट की खेती को करते हुए देखा था। वहीं से प्रेरणा लेकर अपने गांव में ड्रैगन फ्रूट की खेती करना शुरू किया…उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र से ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगाए थे। ड्रैगन फ्रूट की खेती अन्य फसलों की खेती से बेहत्तर है। इस फल की खेती करने में ज्यादा पानी की जरुरत नहीं होती है। सर्दियों के मौसम में इसके पौधे को महीने में दो बार सिंचाई की जरूरत होती है जबकि गर्मियों में 8-12 दिन में सिंचाई की जरूरत होती है….Dragon fruit farming getting rich

वहीं प्रगतिशील किसान आजिल खान ने बताया कि दो वर्षों से ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। ये फसल पूरी तरह से जैविक है। इसमें गोबर का खाद डाला जाता है। फसल में रोगों की रोकथाम के लिए भी ऑर्गेनिंक दवाईयां डाली जाती है। फसल की बार बार कटिंग करनी पड़ती है। जिसके बाद फसल में अच्छा फल आता है। ड्रैगन फ्रूट की खेती मुनाफे की खेती है किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करनी चाहिए।

पूरी खबर का वीडियों नीचे गए लिंक पर देखें।

https://fb.watch/ggMqR1cvY3/

कृषि विज्ञान केंद्र मंडकौला के सेवानिवृत कृषि वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद अलीखान ने बताया कि पलवल जिले में किसानों का रूझान लगातार नई क्रॉप की तरफ बढ़ता जा रहा है। किसान परम्परागत खेती को छोडक़र बागवानी की खेती की ओर अग्रसर है। पलवल जिले के गांव नौरंगाबाद में किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने बताया कि एक बार लागत लगाने के बाद किसानों को प्रति एकड़ ढाई लाख रूपए की आमदनी हासिल होती है। और ये फसल आगामी 25 वर्षों तक लगातार फल देती है।

जिला बागवानी अधिकारी डॉ.अब्दुल रज्जाक का कहना है कि बागवानी विभाग द्वारा पलवल जिले में ड्रैगन फ्रूट की खेती करने के लिए चार एकड़ का लक्ष्य रखा गया है। विभाग द्वारा किसानों को प्रति एकड़ 1 लाख 20 हजार रूपए की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि ड्रैगन फ्रूट की खेती करें और अपनी आय को दोगुना कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के सपने को साकार करें।Dragon fruit farming getting rich

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बता दें कि अधिकारियों के मुताबिक इस ड्रैगन की फसल में सिर्फ एक बार पूंजी लगाने की जरुरत होती है। पारंपरिक खेती के मुकाबले इससे 25 वर्षों तक आमदनी ले सकते हैं। लागत की बात करें तो इसके पौधा कैक्टस की तरह होता है। इसके फलन के लिए पौधों को सहारे की जरुरत पड़ती है। इसके स्ट्रेक्चर को खड़़ा करने के लिए प्रति एकड़ ढ़ाई से तीन लाख रुपए खर्च होते हैं। एक एकड़ में 500 पिलर लगाए जाते है जिनकी हाईट 8 फुट होती है जोकि दो फुट जमीन के अंदर और 6 फिट जमीन के बाहर होती है। एक पिलर पर चार प्लांट लगाए जाते है। और 10 फीट की दूरी पर खंभा खड़ा कर उसके सहारे पौध लगाए जाते हैं। प्रति एकड़ करीब दो हजार पौधे की जरुरत होती है। एक बार मोटी रकम खर्च के बाद उसी स्ट्रेक्चर पर ये 25 वर्षो तक फसल देता है…

सत्य खबर के लिए पलवल से नितिन शर्मा की रिपोर्ट

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