Haryana News: हरियाणा सरकार ने हाल ही में जब अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद पर विकास बराला की नियुक्ति की तो यह फैसला तुरंत ही विपक्ष के निशाने पर आ गया। विकास बराला वही नाम है जो वर्ष 2017 में वर्णिका कुंडू छेड़छाड़ मामले में सुर्खियों में आया था। उनके खिलाफ अब भी कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को लेकर पूरे राज्य में विवाद खड़ा हो गया।
विपक्ष का हमला और सरकार की फजीहत
जैसे ही सरकार ने विकास बराला का नाम अपनी लीगल टीम में शामिल किया वैसे ही कांग्रेस और इनेलो जैसे दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। विपक्ष ने सवाल उठाया कि एक आरोपी को सरकार का प्रतिनिधि कैसे बनाया जा सकता है। इस कदम को उन्होंने महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया और बीजेपी की नीति और नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

सरकार का यू-टर्न और हटाने का आदेश
लगातार दबाव और आलोचना के बीच सरकार को आखिरकार बैकफुट पर आना पड़ा। सोमवार दोपहर सरकार ने विकास बराला को अतिरिक्त महाधिवक्ता के पद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। ये वही सरकार थी जो कुछ दिन पहले तक उनकी नियुक्ति का बचाव कर रही थी। लेकिन जब राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ने लगी तो सरकार ने यू-टर्न ले लिया।
विकास बराला की नियुक्ति पर बीजेपी की दलीलें
जब विकास बराला की नियुक्ति पर बीजेपी नेताओं से सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि नेताओं के बेटे भी तो कोई नौकरी या पेशा अपना सकते हैं। लेकिन जब उनसे यह पूछा गया कि क्या यह उचित है कि एक ट्रायल फेस कर रहा व्यक्ति राज्य का कानूनी अधिकारी बने तो वे सवालों से बचते नजर आए। इससे उनकी स्थिति और भी असहज हो गई।
विपक्ष ने छीना सरकार का मुद्दा
विकास बराला को हटाने के इस फैसले से यह साफ हो गया कि सरकार विपक्ष के हमलों को झेलने की स्थिति में नहीं थी। सरकार ने एक ऐसा फैसला वापस लिया जिसे लेकर विपक्ष ने माहौल बना लिया था। अब यह कहना गलत नहीं होगा कि विकास बराला का नाम सरकार के लिए राजनीतिक सिरदर्द बन गया था जिसे हटाकर ही राहत मिली।
