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    Haryana News: राम शरणम कॉलोनी विवाद में नया बवाल! राजनीतिक प्रभाव से कॉलोनी विकसित करने का आरोप

    Haryana News: हरियाणा के हांसी में स्थित राम शरणम के पास की जमीन पर अवैध कॉलोनी विकसित करने के मामले में कांग्रेस नेता तेलु राम जांगड़ा ने बीजेपी विधायक विनोद भयाना पर सीधे आरोप लगाए हैं। जांगड़ा ने दावा किया कि विधायक की मौन सहमति से कॉलोनी विकसित की गई और इसमें फर्जी रजिस्ट्रियों का भी इस्तेमाल हुआ है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में एक सोची-समझी साजिश के तहत काम हुआ और इसका मकसद सरकारी जमीन पर कब्जा करना था।

    तेजी से आगे बढ़ी प्रक्रिया पर उठे सवाल

    जांगड़ा ने बताया कि 20 अप्रैल 2025 को एक एग्रीमेंट साइन किया गया और उसके बाद पूरी प्रक्रिया कुछ ही दिनों में पूरी कर ली गई। 20 मई को पंचायत से प्रस्ताव पास हुआ और 25 जून को सड़क निर्माण का टेंडर निकाला गया। 4 जुलाई को टेंडर खोला गया और 8 जुलाई को जमीन दान में दी गई। उसी दिन उसकी रजिस्ट्री भी हो गई। 9 जुलाई को इंतकाल हुआ और 21 जुलाई तक तहसीलदार से फाइनल अप्रूवल भी मिल गया।

    Haryana News: राम शरणम कॉलोनी विवाद में नया बवाल! राजनीतिक प्रभाव से कॉलोनी विकसित करने का आरोप

    दानपात्र बना नकली व्यक्ति

    कांग्रेस नेता ने इस पूरी प्रक्रिया को साजिश बताया और कहा कि नगर परिषद की तरफ से एक व्यक्ति राजकुमार को दानपात्र दिखाया गया जबकि असली हितग्राही कोई और है। जांगड़ा का आरोप है कि यह सब विधायक की जानकारी और समर्थन से हुआ। उन्होंने कहा कि इतनी जल्दी सरकारी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होना तभी संभव है जब राजनीतिक दबाव हो।

    विधायक विनोद भयाना का पलटवार

    बीजेपी विधायक विनोद भयाना ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले से अनजान हैं और जो भी आरोप लगाए गए हैं वे पूरी तरह झूठे हैं। भयाना ने साफ कहा कि “2012 में जब मैं सीपीएस था तब इस रोड का निर्माण हुआ था और अब उसे केवल चौड़ा किया जा रहा है।” उन्होंने मार्केटिंग बोर्ड से हुई ट्रांसफर प्रक्रिया की पुष्टि की और कहा कि यह डेढ़ साल पहले हुई थी और इसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है।

    राजनीति छोड़ने की चुनौती

    विनोद भयाना ने कहा कि वह सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी से कार्य करते आए हैं और कोई भी आरोप यदि सिद्ध हो जाता है तो वह राजनीति से संन्यास ले लेंगे। उनका यह बयान इस विवाद में नया मोड़ लाता है क्योंकि अब पूरा मामला केवल जमीन पर कॉलोनी विकसित करने तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह एक राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है।