Aam Aadmi Party ने अब औपचारिक रूप से इंडिया गठबंधन से अलग होने का ऐलान कर दिया है। यह ऐलान राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने किया। इस फैसले की अटकलें पहले से ही चल रही थीं लेकिन अब यह साफ हो गया है कि पार्टी अब खुद की राजनीतिक राह पर चलेगी। संजय सिंह ने बताया कि यह फैसला पार्टी के आंतरिक विचार विमर्श के बाद लिया गया है।
हरियाणा में पहले से अलग था रुख
हालांकि इस फैसले का हरियाणा की राजनीति पर खास असर नहीं पड़ेगा क्योंकि आम आदमी पार्टी ने पहले ही हरियाणा में इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली थी। लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुशील गुप्ता ने चुनाव लड़ा लेकिन कांग्रेस ने उनका समर्थन नहीं किया। यही बात आम आदमी पार्टी को खटकी और हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी पार्टी ने अकेले ही लड़ा।

इंडिया गठबंधन की शुरुआत और अंत की कहानी
इंडिया गठबंधन की शुरुआत भाजपा के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए की गई थी। मकसद था कि विपक्षी वोटों का बंटवारा न हो। लेकिन शुरुआत से ही इस गठबंधन में दरारें दिखने लगी थीं। कई दल एक-दूसरे के खिलाफ सीटों पर लड़ते नजर आए। कई बार यह गठबंधन फ्रेंडली मैच जैसा लगने लगा था। सत्ता न मिलने पर आपसी मतभेद और ज़्यादा बढ़ गए।
अब अकेले लड़ेगी AAP की राजनीतिक लड़ाई
अब आम आदमी पार्टी ने तय कर लिया है कि वह लोकसभा और राज्यसभा दोनों में अलग लाइन पर राजनीति करेगी। पार्टी को अब कांग्रेस या अन्य विपक्षी दलों की जरूरत नहीं है। आम आदमी पार्टी अब अपने दम पर सीटें जीतने और लोगों तक पहुंचने की योजना पर काम करेगी। पार्टी के नेता मानते हैं कि इससे उनकी पहचान और साफ होगी।
AAP की राष्ट्रीय पहचान और भविष्य की राह
देश की राजनीति में आम आदमी पार्टी अब एक मजबूत राष्ट्रीय दल बन चुकी है। दिल्ली और पंजाब में सरकार बना चुकी यह पार्टी गुजरात और गोवा में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करवा चुकी है। हालांकि हरियाणा और कुछ अन्य राज्यों में सफलता नहीं मिली लेकिन कम समय में पार्टी ने जो ग्रोथ दिखाई है वह उल्लेखनीय है। अब गठबंधन से बाहर होकर पार्टी को नई रणनीति बनानी होगी।
