Supreme Court ने मेडिकल कॉलेजों में दाखिले पर सोमवार को बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए राज्य की डोमिसाइल नीति को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगर कोई उम्मीदवार राज्य कोटे का लाभ उठाना चाहता है, तो उसे लगातार चार वर्षों तक तेलंगाना में रहना या पढ़ाई करनी होगी।
देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार यानी 1 सितंबर को तेलंगाना हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेने के लिए राज्य के डोमिसाइल नीति को रद्द कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य के मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए अगर कोई कैंडिडेट डोमिसाइल कोटा का लाभ उठाना चाहता है तो उसे लगातार चार वर्षों तक तेलंगाना में निवास या अध्ययन करना ही होगा। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चार साल की अनिवार्यता की नीति मनमाना और असंवैधानिक नहीं है।
इससे पहले हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए राज्य के अधिवास नियम को रद्द कर दिया था। तेलंगाना राज्य एवं अन्य बनाम कल्लूरी नागा नरसिम्हा अभिराम एवं अन्य मामले की सुनवाई करते हुए CJI गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने तेलंगाना सरकार के उस अधिवास नियम को बरकरार रखा, जिसके तहत 12वीं कक्षा तक लगातार पिछले चार वर्ष से राज्य में पढ़ाई कर रहे छात्रों को ही राज्य कोटे के तहत मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

CJI जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने राज्य सरकार की अपील स्वीकार कर ली और तेलंगाना मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज प्रवेश (MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में प्रवेश) नियम, 2017 को बरकरार रखा जिसे 2024 में संशोधित किया गया है। तेलंगाना सरकार ने ‘तेलंगाना मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज प्रवेश MBBS और BDS पाठ्यक्रमों में प्रवेश) नियम, 2017 को 2024 में संशोधित करते हुए यह प्रावधान जोड़ा था कि केवल वे छात्र जो कक्षा 12 तक पिछले लगातार चार वर्षों से राज्य में पढ़ाई कर रहे हों, उन्हें ही राज्य के कोटे के तहत मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश मिलेगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय को मनमाना और असंवैधानिक बताते हुए तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस नियम को खारिज करते हुए कहा था कि राज्य के स्थायी निवासियों को केवल इसलिए मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का लाभ नहीं देना गलत है कि वे कुछ समय तक राज्य से बाहर रहे हैं। बाद में इस फैसले के खिलाफ तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त को तेलंगाना सरकार की याचिका समेत उन तमाम याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिनमें इस दक्षिणी राज्य में मेडिकल कॉलेज में दाखिले को लेकर लागू अधिवास नियम को रद्द करने वाले आदेश को चुनौती दी गयी थी। अब शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार के डोमिसाइल कोटा नीति को हरी झंडी दे दी है। राज्य का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और वकील श्रवण कुमार कर्णम ने किया था।
इसका विरोध करने वालों ने अपनी याचिका में कहा था कि जिन बच्चों के माता-पिता राज्य से बाहर सरकारी/अखिल भारतीय सेवाओं/निगमों या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नौकरी करते हैं और इस वजह से जिन्हें राज्य के बाहर रहने को मजबूर होना पड़ा है, वह सरकार की डोमिसाइल नीति की वजह से स्थानीय कोटा पाने से वंचित रह जाएंगे। इसमें रक्षा और अर्धसैनिक बलों में कार्यरत कर्मियों के बच्चे भी शामिल हैं, जो मूलत: राज्य के निवासी हैं, बावजूद इसके उन्हें इस कोटे का लाभ नहीं मिल सकेगा।
