Shibu Soren Tribute:प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को नई दिल्ली के गंगाराम अस्पताल पहुंचकर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता स्वर्गीय शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने उनके पार्थिव शरीर के समक्ष पुष्प अर्पित कर नमन किया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। इस अवसर पर उन्होंने शिबू सोरेन के पुत्र व झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बहू कल्पना सोरेन और अन्य परिजनों से मुलाकात कर गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने शिबू सोरेन को एक जमीनी नेता बताते हुए कहा कि उन्होंने आदिवासी समाज, गरीबों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई में पूरा जीवन समर्पित किया।

शिबू सोरेन के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री मोदी ने शिबू सोरेन के सामाजिक योगदान और संघर्षपूर्ण जीवन को याद करते हुए कहा कि वे केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा के प्रतीक थे। उन्होंने गरीबों की आवाज़ को संसद तक पहुंचाया और आदिवासियों की दशा सुधारने के लिए अनगिनत प्रयास किए। पीएम मोदी ने कहा कि शिबू सोरेन ने जनता के बीच रहकर काम किया और अपने सादगी भरे जीवन से लाखों लोगों को प्रेरित किया। उन्होंने इस दुख की घड़ी में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कल्पना सोरेन और दिवंगत नेता के सभी शुभचिंतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

हेमंत सोरेन का भावुक क्षण, प्रधानमंत्री ने बढ़ाया हौसला
पिता के निधन से व्यथित मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गमगीन माहौल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते ही खुद को संभाल नहीं पाए और उनके गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगे। यह क्षण वहां उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर गया। प्रधानमंत्री ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य रखने की सलाह दी। बहू कल्पना सोरेन की आंखों से भी अश्रुधारा थम नहीं रही थी। इस दौरान पीएम मोदी की आंखें भी नम हो गईं, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि शिबू सोरेन के निधन ने उन्हें भी अंदर से झकझोर दिया।

झारखंड में तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित
शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरे झारखंड में शोक की लहर फैल गई है। उनके सम्मान में राज्य सरकार ने तीन दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की है। इस दौरान सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा और कोई भी सरकारी समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा। ‘दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन का योगदान झारखंड के निर्माण, आदिवासी अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक रहा है। उनका जाना न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति है। आने वाले दिनों में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।


