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  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आह्वान! भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों में आत्मनिर्भर बनाना चाहिए

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आह्वान! भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों में आत्मनिर्भर बनाना चाहिए

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए भारत को दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उनका कहना था कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने राष्ट्रीय जियोसाइंस अवार्ड कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि देश की विकासशील और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में यह कदम अहम साबित होगा।

    दुर्लभता का विज्ञान और तकनीकी चुनौती

    राष्ट्रपति ने बताया कि ये तत्व दुर्लभ इसलिए हैं क्योंकि इन्हें पहचानने की प्रक्रिया जटिल है। स्वदेशी तकनीक के विकास से इस जटिल प्रक्रिया को पूरा करना आसान होगा। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय और उद्योगों से आग्रह किया कि वे इन तत्वों के उत्पादन और तकनीकी अनुसंधान में और अधिक निवेश करें।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आह्वान! भारत को राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास के लिए दुर्लभ पृथ्वी तत्वों में आत्मनिर्भर बनाना चाहिए

    एआई, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा में महत्व

    द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि यह युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों का है। स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकों में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की अहम भूमिका है। ये तत्व 17 विशेष रासायनिक समूहों से संबंधित हैं और आधुनिक तकनीक के लिए आवश्यक हैं।

    खनन क्षेत्र में AI और मशीन लर्निंग का योगदान

    राष्ट्रपति ने कहा कि खनन मंत्रालय सतत विकास और नवाचार के प्रति प्रतिबद्ध है। खनन क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और ड्रोन-आधारित सर्वेक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, खदानों की अवशिष्ट सामग्री से मूल्यवान तत्व निकालने पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में कई हिस्सों में भारी वर्षा और भूस्खलन से लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है। ऐसे प्राकृतिक आपदाओं की समय पर जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है।

    प्राकृतिक आपदाओं पर शोध का आह्वान

    राष्ट्रपति ने भूवैज्ञानिक समुदाय से अनुरोध किया कि वे बाढ़, भूस्खलन, भूकंप और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर अधिक शोध करें। उनका कहना था कि इससे न केवल आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी बल्कि देश की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में और अधिक नवाचार और अनुसन्धान करें।