Ambala News: केंद्रीय खेल मंत्रालय द्वारा पद्म अवार्ड के लिए नामित सरबजोत अंबाला के बराड़ा क्षेत्र के गांव धीन के रहने वाले हैं। 2016 में उन्होंने शूटिंग के लिए तैयारी शुरू की। इस दौरान उन्होंने अंबाला में ही अभिषेक राणा के पास शूटिंग सीखना शुरू किया। यही उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। चूंकि शूटिंग रेंज उनके घर से 35 किलोमीटर दूर थी। घर दूर होने के चलते वे बस से रेंज तक आया करते थे।
यानी रोज 70 किलोमीटर का सफर, जिसमें पूरा दिन चला जाता था। सरबजोत ने बताया कि 2021 में कोविड के दौरान शूटिंग रेंज बंद हो गई। अब सबसे अधिक परेशानी का समय था। पिता जितेंद्र सिंह ने उनका पूरा सहयोग किया और घर में ही एक अस्थाई रेंज बनाई, जिससे उनकी प्रैक्टिस नहीं रुकी।

सरबजोत को यदि पद्म पुरस्कार मिलता है तो वह सम्मान पाने वाले अंबाला के पहले खिलाड़ी बनेंगे। इससे पहले खेल के लिए किसी भी अंबाला वासी को पद्म पुरस्कार नहीं मिला है। सरबजोत को अर्जुन अवॉर्ड मिल चुका है। पेरिस ओलिंपिक में मिक्स्ड टीम 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में सरबजोत और मनु भाकर की जोड़ी ने ब्रॉन्ज जीता था। खेल मंत्रालय ने जिन खिलाड़ियों की पद्म अवार्ड के लिए सिफारिश की है उनमें चार खिलाड़ी ऐसे हैं जिन्हें पेरिस ओलंपिक में पदक मिले हैं।
सरबजोत को पद्म अवार्ड के लिए नामित किए जाने के बाद अब अंबाला के खेल क्षेत्र में खुशी की लहर देखी जा सकती है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सरबजोत की कामयाबी से अंबाला में खेलों का विकास होने की उम्मीद की जा सकती है।
किसी भी खिलाड़ी को ओलंपिक तक पहुंचने में काफी समय लगता है लेकिन सरबजोत की मेहनत ने 8 साल में ही ओलंपिक में दस्तक देकर पदक हासिल कर लिया यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
