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  • जनसुनवाई में आए मामले को देखकर महिला आयोग हैरान  कहा, ऐसा मामला जिंदगी में पहली बार देखा

    जनसुनवाई में आए मामले को देखकर महिला आयोग हैरान कहा, ऐसा मामला जिंदगी में पहली बार देखा

    महिला आयोग के सामने बहुत से मामले आते हैं लेकिन एक ऐसा अजब मामला महिला आयोग के सामने आया है जिसमें महिला आयोग ने भी कहा कि ऐसा मामला उनके सामने पहली बार आया है। सेक्टर-12 लघु सचिवालय के सभागार में हरियाणा राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई हुई। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जो हैरान करने वाले थे।

    पलवल की रहने वाली एक महिला ने आयोग के सामने अपने मायके वालों पर ही गंभीर आरोप लगाए। महिला ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बड़ी बेटियों को गुड़गांव मायके भेजा था। लेकिन अब उसके मां बाप और भाई बेटियों को बंधक बना रखा है। बेटियां शादी करने लायक हो गई हैं लेकिन उनकी शादियां नहीं होने दे रहे हैं। इस आयोग की चेयरमैन ने हैरानी जताते हुए कहा कि उनके सामने ऐसा पहला मामला आया है जहां नाना नानी और मामा पर प्रताड़ित करने का आरोप लगा है। आयोग ने गुड़गांव पुलिस के जरिए बेटियों को बुलाकर पूछताछ करने और उसके बाद फैसला सुनाने की बात कही।

    जनसुनवाई में आए मामले को देखकर महिला आयोग हैरान  कहा, ऐसा मामला जिंदगी में पहली बार देखा

    इस सुनवाई के दौरान एक खास बात यह रही कि एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर के मामले ज्यादा सक्रिय रहे। पति-पत्नी के रिश्तों में जब इतनी कड़वाहट आ जाए कि वे एक दूसरे की शक्ल तक देखना न चाहें तो मामला महिला आयोग या कोर्ट तक पहुंच जाता है। किसी ने अपने पति पर अवैध तरीके से सेक्सुअल मेडिसन की सप्लाई करने का आरोप लगाया तो बोला की पत्नी उसकी प्रॉपर्टी पर करना चाहती है।

    हरियाणा सरकार में एसडीओ ने अपने पति पर आरोप लगाया कि उनका पति सेक्सुअल मेडिसन का अवैध कारोबार करता है। वो खुद को आईटी कर्मी बताता है। उसका एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर भी है। ऐसे में इनके साथ रहना संभव नहीं हैं। पिछले पांच साल से वह घर का खर्च खुद चला रही है। उधर पति ने भी पत्नी पर भी पूर्व प्रेमी के संपर्क में रहने का आरोप लगाया है।

    आयोग की चेयरमैन रेणु भाटिया ने फरीदाबाद, पलवल, भिवानी, कुरुक्षेत्र आदि जिलों की कुल 40 से अधिक शिकायतें सुनीं। इनमें ज्यादातर घरेलु हिंसा के केस रहे। दिल्ली के एक केंद्रीय विद्यालय में पढ़ाने वाली शिक्षिका ने अपने सास ससुर पर आरोप लगाया कि उनके पति की मौत के बाद दोनों ने उसे घर से निकाल दिया और गहने आदि सामान हड़प लिए। पति की मौत कोविड काल में हो गई थी। उधर सास और ससुर ने आरोप लगाया कि उनकी पुत्रवधू बेटे के पीएफ आदि के पैसे हड़प लिए हैं। बच्चों से मिलने तक नहीं देती। वह हर तरीके से प्रताड़ित करती रहती है। इस पर आयोग ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि दादा दादी से बच्चों को मिलने से नहीं रोका जा सकता। आयोग ने कहा कि एक संडे गुड़गांव में और एक संडे भिवानी में दादा दादी बच्चों से मिलेंगे। इसके लिए आयोग की ओर से अधिकारी लगाए जाएंगे।

    एक एचआर पति ने पत्नी पर आरोप लगाया कि उनकी शादी 17 साल पहले हुई थी। साल 2011 में बेटी पैदा हुई तो वह घर में विवाद करने लगी। उसके नाम 300 वर्ग गज का प्लाट तक करा दिया। लेकिन पत्नी और उसका पूरा परिवार उनकी पूरी प्रॉपर्टी हड़पना चाहता है। पति ने बताया कि उनके मां बाप अब इस दुनिया में नहीं है। इन सबके बावजूद वह पत्नी को अपनाना चाहता है। पत्नी ने आरोप लगाया कि पति ने साजिश के तहत उनके पिता को जान से मारने की कोशिश की थी। इस मामले में राजीनामा करने के लिए पांच बीघा जमीन उनके नाम किया था। इस पर आयोग ने नाराजगी जताई और कहा कि पति का संपत्ति पर पत्नी का ही अधिकार होता है। ऐसे में समझौते का दबाव बनाकर पत्नी का अपने नाम जमीन कराना न्यायसंगत नहीं है। दोनों पक्षों को शपथ पत्र देना होगा कि उनकी संपत्ति पर अधिकार बेटे बेटियों को होगा। आयोग ने शपथ पत्र देने के बाद फैसला करने का निर्णय लिया।

  • SYL canal dispute: दशकों पुराना झगड़ा बना सियासी अखाड़ा! पानी की लड़ाई में उलझा हरियाणा और पंजाब का भविष्य

    SYL canal dispute: दशकों पुराना झगड़ा बना सियासी अखाड़ा! पानी की लड़ाई में उलझा हरियाणा और पंजाब का भविष्य

    SYL canal dispute: नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक से एक बार फिर कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान मौजूद थे। दोनों नेताओं ने बैठक के बाद कहा कि सकारात्मक माहौल में बातचीत हुई लेकिन तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। हर बार की तरह यह बैठक भी बस ‘चर्चा’ तक सिमटकर रह गई।

    कोर्ट के आदेश और राजनीतिक खींचतान

    सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुका है और केंद्र ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी ली है। बावजूद इसके, हर बार बैठकें होती हैं और निष्कर्ष के नाम पर सिर्फ ‘सकारात्मक माहौल’ बताया जाता है। असल में यह मामला अब तकनीकी नहीं बल्कि पूरी तरह राजनीतिक हो चुका है। हरियाणा में भाजपा की सरकार है तो पंजाब में आम आदमी पार्टी की। ऐसे में दोनों सरकारें इस मुद्दे को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाती रहती हैं जिससे समाधान की उम्मीद धुंधली हो जाती है।

    SYL canal dispute: दशकों पुराना झगड़ा बना सियासी अखाड़ा! पानी की लड़ाई में उलझा हरियाणा और पंजाब का भविष्य

    पानी की जरूरत और जमीनी हकीकत

    पानी अब सिर्फ एक विवाद नहीं बल्कि दोनों राज्यों के अस्तित्व से जुड़ा सवाल बन चुका है। पंजाब को डर है कि अगर वह हरियाणा को पानी देगा तो उसके अपने खेत सूखे रह जाएंगे। वहीं हरियाणा का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है और उसे उसका हिस्सा मिलना चाहिए। दोनों राज्यों में भूमिगत जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है जिससे संकट और गहराता जा रहा है। पानी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे तत्काल बना लिया जाए। यह प्रकृति की देन है और इसका संतुलित वितरण ही एकमात्र रास्ता है।

    इतिहास में झांकते हैं तो मिलती है जड़

    इस विवाद की जड़ 31 अक्टूबर 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के समय की है जब हरियाणा राज्य बना। नदी जल के बंटवारे को लेकर ही दोनों राज्यों में मतभेद शुरू हुए। 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने हस्तक्षेप कर दोनों राज्यों को 3.5 MAF पानी देने का निर्णय लिया। लेकिन पंजाब की ओर से इस पर लगातार आपत्ति जताई जाती रही। 2004 में तो “पंजाब टर्मिनेशन ऑफ अग्रीमेंट एक्ट” लाकर इस समझौते को रद्द कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला अब तक लटका हुआ है और निर्णय की प्रतीक्षा है।

    कब मिलेगा समाधान, या और लंबा होगा इंतजार?

    एसवाईएल नहर विवाद सिर्फ एक जल बंटवारा नहीं बल्कि दो राज्यों के आपसी रिश्तों की परीक्षा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में अब अगली सुनवाई होनी है लेकिन सवाल यह है कि क्या फिर से कोई समाधान निकलेगा या यह विवाद आने वाले वर्षों तक खिंचता रहेगा। जब तक दोनों राज्य आपसी विश्वास के साथ एक समाधान की ओर नहीं बढ़ते, तब तक यह विवाद हर बैठक के बाद वहीं लौट आएगा जहां से शुरू हुआ था।