पूर्व केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री Meenakshi Lekhi कैलाश मानसरोवर यात्रा के दूसरे दल में शामिल थीं। तिब्बत के दारचिन क्षेत्र में घोड़े से गिरने के कारण उनकी कमर में गंभीर चोट आई है। इस हादसे के चलते अब वे यात्रा को पूरा नहीं कर पाएंगी। घटना के बाद तुरंत उन्हें प्राथमिक इलाज के लिए पास के अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी रीढ़ की हड्डी में चोट की पुष्टि हुई है।
एक्स-रे में हुआ गंभीर चोट का खुलासा
घटना के बाद मीनाक्षी लेखी को तुरंत यात्रा मार्ग पर मौजूद अस्पताल ले जाया गया। यहां उनकी जांच कर एक्स-रे किया गया जिसमें यह स्पष्ट हुआ कि उनकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी है। डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल आराम की सलाह दी और उनकी हालत को देखते हुए भारत वापस लाने का निर्णय लिया गया। यह हादसा न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया बल्कि यात्रियों के बीच चिंता का विषय भी बन गया है।

रेस्क्यू के लिए प्रशासन ने बनाई रणनीति
पिथौरागढ़ प्रशासन ने मीनाक्षी लेखी को सुरक्षित भारत लाने के लिए रेस्क्यू योजना तैयार कर ली है। उन्हें वाहन के माध्यम से लिपुलेख लाया जाएगा। इसके बाद एक टीम उन्हें स्टेचर या अन्य संसाधनों की सहायता से पैदल नाभीढांग तक ले जाएगी। यहां से हेलीकॉप्टर की मदद से उन्हें देहरादून एयरलिफ्ट किया जाएगा। रेस्क्यू ऑपरेशन में सावधानी और त्वरित कार्रवाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
यात्रियों के लिए बना सबक और चेतावनी
इस हादसे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कैलाश मानसरोवर जैसी कठिन यात्रा के लिए पर्याप्त सुरक्षा और चिकित्सा इंतजाम मौजूद हैं। घोड़े की सवारी जैसे जोखिम भरे साधनों का उपयोग करना कई बार भारी पड़ सकता है। मीनाक्षी लेखी जैसी वरिष्ठ और अनुभवी यात्री के साथ यह घटना साबित करती है कि हर कदम पर सतर्कता बेहद जरूरी है।
यात्रा अधूरी लेकिन हौसला कायम
हालांकि मीनाक्षी लेखी अपनी इस पवित्र यात्रा को पूरा नहीं कर सकेंगी लेकिन उनका साहस और आस्था सभी के लिए प्रेरणा है। प्रशासन ने तत्परता से रेस्क्यू की योजना बनाकर यह दिखा दिया कि संकट की घड़ी में व्यवस्था मुस्तैद है। अब सभी की दुआएं हैं कि वे जल्द स्वस्थ हों और भविष्य में एक बार फिर यह यात्रा पूरी कर सकें।
