Haryana News: हरियाणा में 7 अगस्त से प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने आयुष्मान कार्ड पर इलाज बंद करने का ऐलान किया है। प्राइवेट स्थान का करीब 500 करोड़ रूपया सरकार की तरफ इस मद में अटका हुआ है। अस्पताल संचालकों ने इससे पहले जनवरी में भी इलाज बंद करने की घोषणा की थी और 3 फरवरी को एक बार इलाज बंद किया भी था लेकिन सरकार और डॉक्टर के बीच बातचीत के बाद इलाज फिर से शुरू हो गया था। पिछले 5 महीने में सरकार ने अस्पताल संचालकों को इतना पैसा भी नहीं दिया है कि जो पैसा इन 5 महीनों के दौरान बनता था। 5 महीने पहले करीब 400 करोड़ रूपया सरकार की तरफ बकाया था लेकिन अब यह राशि बढ़कर 500 करोड़ रूपया हो गई है।
60% लोगों के पास है कार्ड
हरियाणा की कुल अनुमानित आबादी 3 करोड़ 16 लाख है और 60% लोगों के पास इस समय आयुष्मान कार्ड या चिरायु कार्ड है। ऐसे में अगर इलाज बंद होता है तो यह 60% लोग प्रभावित होंगे। बात अगर हरियाणा में आयुष्मान के पैनल पर अस्पतालों की करें तो 1000 से ज्यादा निजी अस्पताल सरकार के पैनल पर है। इन स्थानों का 500 करोड़ रूपया अटका हुआ है।

क्या है समस्या
सरकार के साथ बैठकें तो होती रही लेकिन भुगतान नहीं हुआ। आईएमए के पदाधिकारियों का कहना है कि यदि आयुष्मान कार्ड धारकों का इलाज नहीं होता है तो इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के उन अधिकारियों की होगी जो बैठक करने के बावजूद उनमें होने वाले फैसले लागू नहीं करते हैं। 8 जनवरी को मुख्यमंत्री नायब सैनी के साथ बैठक में भरोसा दिया गया था कि सभी अस्पतालों के लंबित भुगतान 15 दिन में कर दिए जाएंगे। परंतु 3 फरवरी को मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव के साथ बैठक हुई जिसमें फिर भरोसा दिलाया गया की 10 मार्च के बाद सभी व्यवस्थाएं पटरी पर आ जाएंगी। लेकिन अभी तक भी किसी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पाया है।
जींद की क्या है स्थिति
इस मामले में आईएमए के जिला प्रधान डॉ अनिल जैन का कहना है कि जींद के डॉक्टर के करीब 20 करोड रुपए सरकार के पास अटके हुए हैं। उनका कहना है कि इसमें कुछ डॉक्टर के काम है और कुछ के ज्यादा लेकिन हर डॉक्टर के पैसे अटके हुए हैं। वह बताते हैं कि आज स्थित है कि जब भी कोई नया अस्पताल खुलता है वह खुद को सरकार के इस पैनल पर लाना चाहता है। क्योंकि आम आदमी का मानना है कि सरकार का पैसा लेट हो सकता है लेकिन आ जाएगा। डॉ अनिल जैन का कहना है कि यह स्थिति सही नहीं है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस सरकार के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना चलती थी और जब देश और प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ तो डॉक्टर के करोड़ों रुपए इस योजना के फंस गए और आज तक वह पैसा नहीं आया है और अब उसके आने के लिए कोई उम्मीद नहीं है। उन्होंने बताया कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत सरकार की नीतियों के अनुसार बिल तैयार किए जाते हैं लेकिन कई बार तो ऐसा होता है कि 45000 के बिल में से 5-7 हजार का भुगतान कर दिया जाता है और उसके बाद डॉक्टर मेल पर मेल करते हैं लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आता।
इलाज के लिए प्राइवेट अस्पताल की ओर जाते हैं मरीज
जिन लोगों के पास आयुष्मान कार्ड है वह सरकारी अस्पताल में जाने की बजाय प्राइवेट अस्पताल की ओर भागते हैं। हमारे द्वारा जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार 80% सर्जरी आयुष्मान कार्ड पर हो रही है। मेडिकल के मामले में सरकार ने बहुत सी बाधाएं लगा रखी है लेकिन इसके बावजूद 30% मेडिकल आयुष्मान कार्ड पर हो रहा है। अगर सरकार द्वारा यह कैप्स नहीं लगाई जाती तो यह आंकड़ा 90% तक जा सकता था। आयुष्मान कार्ड धारक यह मानता है कि जब उसके पास कार्ड है तो वह सरकारी अस्पताल में क्यों जाए? वह ऐसे अस्पताल को चुनता है, जो आयुष्मान के पैनल पर होता है।
सरकार की तरफ बढ़ता पैसा चिंता का विषय
जींद आईएमए के प्रधान डॉक्टर अनिल जैन का कहना है कि सरकार की तरफ डॉक्टर का बकाया लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि सरकार इस भुगतान को कम करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। असल में समस्या यह भी है कि सरकार की ओर से कार्ड तो बनाए जा रहे हैं लेकिन बजट बढ़ाने की तरफ कोई ध्यान नहीं है।
क्या कहती है सांसद कुमारी शैलजा
इस मामले में सांसद कुमारी शैलजा का कहना है कि प्राइवेट अस्पताल संचालकों ने 7 अगस्त की रात से आयुष्मान योजना में इलाज बंद करने की घोषणा की है। अगर जरूरतमंदों का इलाज ही बंद कर दिया गया तो सरकार की इस मनमानी के कारण बहुत से लोगों का जीवन संकट में पड़ जाएगा। उन्होंने कहा कि हर बार डॉक्टरों को कड़ा रुख अपनाना पड़ता है जो सही नहीं है।
क्या कहता है मुख्यमंत्री कार्यालय
इस मामले में जब मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर अशोक छाबड़ा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टरों का भुगतान लगातार कर रही है लेकिन अगर फिर भी कोई अड़चन है तो उसे समय रहते हल कर लिया जाएगा। अशोक छाबड़ा ने कहा कि किसी भी सूरत में लोगों को इलाज में परेशानी नहीं आने दी जाएगी।