Panipat News: पानीपत, जिसे ‘हैंडलूम सिटी’ के नाम से भी जाना जाता है, अब नई हरित क्रांति का नेतृत्व कर रहा है। तीन ऐतिहासिक युद्धों के लिए प्रसिद्ध यह शहर अब दुनिया का सबसे बड़ा वस्त्र रीसाइक्लिंग केंद्र बनकर उभर रहा है। यहां की औद्योगिक इकाइयां बिना केमिकल डाई और पानी की बर्बादी के पुराने कपड़ों को रीसाइक्ल कर उन्हें विश्व स्तर पर उपयोगी बना रही हैं। यहां हर दिन लगभग 30 लाख किलोग्राम रीसाइक्ल कपड़ा तैयार किया जा रहा है। इस धागे से बने उत्पाद केवल भारत के विभिन्न हिस्सों में ही नहीं, बल्कि विश्व के कई बाजारों में भी निर्यात किए जा रहे हैं। पानीपत के इस बदलाव ने इसे केवल उद्योगिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी अग्रणी बना दिया है।
‘मन की बात’ में पीएम मोदी ने की पानीपत की तारीफ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 120वें एपिसोड में पानीपत की इस पहल की खुले दिल से प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “पानीपत ने अन्य शहरों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह शहर वैश्विक वस्त्र रीसाइक्लिंग का प्रमुख केंद्र बन रहा है।” पीएम मोदी के इस संदेश ने न केवल पानीपत के उद्योगपतियों और कारीगरों में उत्साह बढ़ाया, बल्कि इस प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान भी दिलाई। इससे देश में कचरे के प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरणा मिली है, जिससे अन्य शहर भी रीसाइक्लिंग की ओर कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे।

तुर्की को पछाड़ कर पानीपत ने हासिल किया खिताब
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष और नॉर्दर्न इंडिया रोलर स्पिनर्स एसोसिएशन के सलाहकार प्रीतम सचदेवा ने बताया कि तुर्की को पीछे छोड़ पानीपत ने यह खिताब हासिल किया है। उनके अनुसार, जिले की करीब 200 स्पिनिंग मिलों में प्रतिदिन करीब 300 टन पुराने कपड़ों का रीसाइक्लिंग किया जा रहा है। वहीं, एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय गुप्ता ने जानकारी दी कि पुराने कपड़े जर्मनी, स्पेन, बेल्जियम, इटली, फ्रांस, कनाडा, बांग्लादेश और अमेरिका जैसे देशों से सस्ते दामों पर मंगाए जाते हैं। इन कपड़ों को धागे में बदल कर उनसे बाथ मैट, बेडशीट, कंबल, कालीन, शॉल और परदे जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यह व्यवसाय करीब 25 साल पहले पानीपत में शुरू हुआ था और अब 30-40 नई इकाइयां भी स्थापित हो रही हैं, जिससे इस क्षेत्र में करीब 70,000 लोगों को रोजगार मिल रहा है।
निर्यात से वैश्विक बाजार में बन रही पहचान
पानीपत चैप्टर के अध्यक्ष और प्रमुख निर्यातक विनोद धमीजा ने बताया कि पानीपत में तैयार हो रहे रीसाइक्ल धागे का 80-90 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जा रहा है। कपड़ों को रंग के आधार पर अलग-अलग करके धागा बनाया जाता है। सफेद कपड़ों से ताजा धागा बनता है, जबकि रंगीन कपड़ों से रंगीन धागा तैयार किया जाता है। यह धागा मिंक कंबल, फ्लोर कवरिंग और अन्य वस्त्र उत्पादों में इस्तेमाल होता है। रीसाइक्लिंग प्रक्रिया में बचा हुआ बाय-प्रोडक्ट भी फर्श कवरिंग में सस्ते धागे के रूप में उपयोग में लाया जाता है। इसके अलावा, इस प्रक्रिया में बचने वाली धूल को भी बेकार नहीं फेंका जाता, बल्कि उसका उपयोग गद्दे और सोफे भरने के लिए किया जाता है। इस प्रकार पानीपत ने न केवल देश में बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक नई पहचान बनाई है और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हुए रोजगार सृजन का भी माध्यम बन गया है।
