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  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्लैग किया ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान का शुभारंभ, तीन सेनाओं की पहली महिला समुद्री यात्रा शुरू

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्लैग किया ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ अभियान का शुभारंभ, तीन सेनाओं की पहली महिला समुद्री यात्रा शुरू

    गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सशस्त्र बलों की पहली महिला समुद्री यात्रा अभियान का औपचारिक रूप से फलक किया। इस अभियान में तीनों सेनाओं की दस महिला अधिकारी हिस्सा ले रही हैं। अगले नौ महीनों में ये अधिकारी लगभग 26 हजार समुद्री मील की यात्रा करेंगी, जिसमें विश्व के कुछ खतरनाक समुद्री क्षेत्र भी शामिल हैं। यह अभियान न केवल साहस और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है बल्कि महिलाओं की शक्ति और सैनिकों की एकजुटता को भी दर्शाता है।

    IASV त्रिवेणी से शुरू हुई यात्रा

    महिला अधिकारी IASV त्रिवेणी जहाज से रवाना हुई हैं। इस विश्व समुद्री यात्रा अभियान का नाम ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ रखा गया है। इसे दुनिया की पहली त्रि-सेवा महिला यात्रा कहा जा रहा है। यह यात्रा मुम्बई के गेटवे ऑफ इंडिया से शुरू हुई, जबकि रक्षा मंत्री ने दिल्ली से इसे वर्चुअली फलक किया। अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने इसे ‘नारी शक्ति’ का प्रतीक बताया, जो तीनों सेनाओं की सामूहिक ताकत, आत्मनिर्भर भारत और इसके सैन्य और कूटनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने फ्लैग किया 'समुद्र प्रदक्षिणा' अभियान का शुभारंभ, तीन सेनाओं की पहली महिला समुद्री यात्रा शुरू

    भूमध्य रेखा को पार करेंगे दो बार

    रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अगले नौ महीनों में दस महिला अधिकारी IASV त्रिवेणी से लगभग 26 हजार समुद्री मील की यात्रा करेंगी। इस दौरान वे भूमध्य रेखा को दो बार पार करेंगी और तीन प्रमुख केप्स – लीविन, हॉर्न और गुड होप – के पास से गुजरेंगी। यह यात्रा न केवल साहसिक होगी बल्कि आधुनिक नौसेना संचालन और समुद्री सुरक्षा की तकनीकों को भी प्रदर्शित करेगी।

    खतरनाक समुद्री क्षेत्रों से गुजरना

    इस समुद्री अभियान के दौरान अधिकारी प्रमुख महासागरों से गुजरेंगी और विश्व के कुछ सबसे खतरनाक समुद्री क्षेत्रों, जैसे ड्रेक पासेज, का अनुभव करेंगी। यात्रा के दौरान टीम चार विदेशी बंदरगाहों पर भी रुकेगी। यह यात्रा महिला अधिकारियों के प्रशिक्षण, नेतृत्व और साहस की नई मिसाल कायम करेगी। इस अभियान से भारत की नौसैनिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसका आत्मनिर्भर दृष्टिकोण भी उजागर होगा।

    मई में मुंबई लौटेंगी अधिकारी

    यह समुद्री अभियान लगभग नौ महीने में पूरा होने की उम्मीद है। अभियान के अंत में अधिकारी मई अगले साल मुंबई लौटेंगी। यह यात्रा भारत की नौसैनिक ताकत, महिला सशक्तिकरण और देश के अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण का प्रतीक होगी। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इस अभियान से महिलाओं को प्रेरणा मिलेगी और नौसेना तथा अन्य सशस्त्र बलों में उनकी भूमिका और भी सशक्त होगी।

  • राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    सफीदों उपमंडल के गांव सरनाखेड़ी के छोरे एवं इंडियन कोस्ट गार्ड में बतौर कमांडेंट तैनात राजकमल अत्री का राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए चयन हुआ है और जल्द ही उन्हे राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्म द्वारा उन्हे यह अवार्ड प्रदान किया जाएगा। यह पदक उनके विशिष्ट वीरता, असाधारण कर्तव्यनिष्ठा और सराहनीय सेवा के सम्मान में प्रदान किया जाएगा। उनके इस उच्च स्तरीय अवार्ड के चयन की खबर पाकर गांव ही नहीं बल्कि पूरे सफीदों क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनके निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। गण्यमान्य लोग उनके पिता एडवोकेट नरेश कुमार अत्री से मिलकर बधाई दे रहे हैं।

    गौरतलब है कि 17 नवंबर 2024 को समुंद्र में भारत-पाक सीमा के पास करीब 7 मछुआरे मछलियां पकड़ते-पकड़ते गलती से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए। पाकिस्तानी मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी (पीएमएसए) का जहाज पीएमएस नुसरत इन मछुआरों को जबरदस्ती गिरफ्तार करके अपनी सीमा पर ले जा रहा था।

    
राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड से सम्मानित होंगे सफीदों के कमांडेंट राजकमल अत्री, पाकिस्तानी जहाज से बचाये थे 7 भारतीय मछुआरे

    दोपहर करीब साढे तीन बजे भारतीय तटरक्षक बल के जहाज आईसीजी अग्रिम (आईसीजी अग्रिम) के पास भारतीय फिशिंग बोट कालभैरव से एक इमरजेंसी कॉल आई। इस डिस्ट्रेस कॉल के माध्यम से मदद मांगी गईं। मदद की कॉल आने के बाद इंडियन कोस्ट गार्ड में बतौर कमांडेंट तैनात राजकमल अत्री मौके पर पहुंचे और वे जान को जोखिम में डालकर मछुआरों को बचाने के लिए अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश कर गए। उन्होंने करीब पाकिस्तानी जहाज के साथ संघर्ष करते हुए सातो मछुआरों को बचा लिया और उन्हे सुरक्षित तरीके से भारतीय सीमा में प्रवेश करवाते हुए समुंद्री तट पर ले आए।

    सातों मछुआरों को पकड़कर पाकिस्तान ले जाने का प्लान था, जोकि असफल रहा। कमांडेंट राजकमल अत्री के इस साहसिक कार्य की इंडियन कोस्ट गार्ड में काफी प्रशंसा हुई। इंडियन कोस्ट गार्ड के अधिकारियों ने भी उनकी तारीफ करते हुए उन्हे अनेक प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए और उनका नाम राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए भेजा गया। अब उनका इस अवार्ड के लिए चयन हो गया है।

    पिता नरेश कुमार अत्री ने बताया कि उनका परिवार शुरू से ही देश सेवा के प्रति समर्पित है। राजकमल अत्री शुरू से ही देश सेवा में जाना चाहता था। काफी मेहनत करके वह आगे बड़ा और उसकी नियुक्त भारतीय तटरक्षक सेवा में हो गई। राजकमल शुरू से ही निडर स्वभाव का रहा है और उसी के बल पर उसने पाकिस्तानी सेना के छक्के छुडाते हुए 7 भारतीय मछुआरों को वह सुरक्षित बचाकर ले आया।

    उसकी उपलब्धि को देखते हुए उसका चयन राष्ट्रपति तटरक्षक अवार्ड के लिए हुआ है, जोकि स्वयं उनके लिए, परिवार के लिए, गांव के लिए व समूचे सफीदों इलाके के लिए गौरवपूर्ण बात है। उनका सीना आज गर्व के साथ चौड़ा हो गया है। उन्होंने बताया कि जब राजकमल गांव में आएगा तो उसका भव्य स्वागत किया जाएगा।

    देश सेवा से जुड़ा है परिवार

    कमांडेंट राजकमल अत्री का परिवार शुरू से ही देश सेवा से जुड़ा हुआ है। ख्खुद तो राजकमल अत्री भारतीय तटरक्षक सेवा में कंमाडेंट हैं ही, साथ ही साथ उनके छोटे भाई भारतीय वायुसेना में स्क्वाड्रन लीडर हैं। वहीं उनके पिता नरेश कुमार अत्री भारतीय वायुसेना व परमाणू ऊर्जा विभाग से रिटायर्ड हैं। फिलहाल वे सफीदों सिविल कोर्ट में वकालत कर रहे हैं।

  • Adaso Kapesa: कैसे एक गांव की लड़की बनी प्रधानमंत्री की ढाल? अदासो कपेसा की अद्भुत यात्रा

    Adaso Kapesa: कैसे एक गांव की लड़की बनी प्रधानमंत्री की ढाल? अदासो कपेसा की अद्भुत यात्रा

    Adaso Kapesa ने वह कर दिखाया है जो आज से पहले कभी नहीं हुआ। मणिपुर के सेनापति जिले के एक छोटे से गांव कैबी से आने वाली अदासो अब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात हैं। वह पहली महिला हैं जो एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की उस टीम का हिस्सा बनी हैं जो देश के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति की सुरक्षा करती है। यह केवल उनके गांव या राज्य के लिए नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व का पल है।

    अनुशासन और समर्पण से बनाई पहचान

    अदासो पहले सशस्त्र सीमा बल यानी एसएसबी की 55वीं बटालियन में इंस्पेक्टर थीं। वहां भी उन्होंने अपने अनुशासन और समर्पण से सबको प्रभावित किया। उनकी मेहनत और लगन ने ही उन्हें एसपीजी में पहुंचाया। एसपीजी में शामिल होने के लिए उन्होंने कठिन कमांडो ट्रेनिंग ली और हर स्तर पर खुद को साबित किया। उनका यह सफर आसान नहीं था लेकिन उनके हौसले ने हर मुश्किल को पार किया।

    Adaso Kapesa: कैसे एक गांव की लड़की बनी प्रधानमंत्री की ढाल? अदासो कपेसा की अद्भुत यात्रा

    अधिकारियों का संकोच बना प्रेरणा

    जब अदासो का नाम एसपीजी में शामिल करने के लिए सामने आया तो कुछ अधिकारियों को संकोच हुआ। उन्हें लगा कि क्या एक महिला को इतनी जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन फिर उन्होंने सोचा कि अगर काबिलियत है तो लिंग भेद क्यों। और यही सोच ने इतिहास रच दिया। अदासो को उनकी योग्यता के दम पर चुना गया और उन्होंने साबित कर दिया कि यह फैसला एकदम सही था।

    महिलाओं के लिए बनी मिसाल

    आज अदासो कपेसा देश की करोड़ों बेटियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उन्होंने यह दिखा दिया है कि अगर महिला ठान ले तो वह कुछ भी हासिल कर सकती है। महिला अब अबला नहीं बल्कि शक्तिशाली है। अदासो का यह सफर हर उस लड़की को प्रेरित करता है जो कुछ बड़ा करने का सपना देखती है।

    महिला सशक्तिकरण की नई परिभाषा

    अदासो कपेसा की यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यक्ति की जीत नहीं बल्कि महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल है। उन्होंने यह सिद्ध किया है कि महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर नहीं बल्कि कई बार उनसे आगे निकल सकती हैं। प्रधानमंत्री की सुरक्षा जैसी अहम जिम्मेदारी उठाना यह दर्शाता है कि महिलाएं हर कसौटी पर खरी उतर सकती हैं।