Jind। जुलाना नगर पालिका प्रधान डॉ संजय जांगड़ा की 2 लाख 27 हजार रुपए रिश्वत के मामले में गिरफ्तारी के बाद दो बातें बहुत साफ हो गई है पहली यह कि सरकार ने एंटी करप्शन ब्यूरो को स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि वह किसी भी भ्रष्ट व्यक्ति को बचाने का काम न करे भले ही वह कितना भी बड़ा व्यक्ति क्यों नहीं हो। दूसरा यह है कि जुलाना नगर पालिका की गेंद अब पूरी तरह से सरकार के पाले में चली गई है।
जन प्रतिनिधित्व कानून और हरियाणा निकाय कानून में साफ है कि किसी भी जनप्रतिनिधि को मामला दर्ज होने या उसके जेल जाने पर स्वत: सस्पेंड या डिसक्वालीफाई नहीं किया जाएगा। इन मामलों में कहा गया है कि सरकार आरोपों की गंभीरता और उनकी प्रकृति को देखते हुए सस्पेंड कर सकती है।
एक ओर जहां किसी भी कर्मचारी के रिश्वत के मामले में गिरफ्तार होने पर वह ऑटोमेटिक सस्पेंड हो जाता है लेकिन जन प्रतिनिधि के मामले में नियम अलग हैं।

जींद के अधिवक्ता विनोद बंसल बताते हैं कि सरकार 6 महीने या केस के अंडर ट्रायल रहने के दौरान जनप्रतिनिधियों को सस्पेंड कर सकती है। उनका कहना है कि इस प्रकार से संजय जांगड़ा रिश्वत के मामले में पकड़े गए हैं ऐसे में सरकार नहीं चाहेगी कि बिल्ली को दूध की रखवाली बैठाया जाए। उनका कहना है कि यह सीधे-सीधे कमीशन खोरी का मामला है और इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि अगर उन्हें चार्ज दिया जाए तो वह भविष्य में इस प्रकार के मामलों में शामिल नहीं होंगे या वह इस केस को प्रभावित नहीं करेंगे।
इस मामले में भाजपा भी कदम उठा सकती है। संजय जांगड़ा की जमानत के बाद पार्टी उनसे इस्तीफा लेकर यहां नगर पालिका प्रधान का चुनाव दोबारा करवाए जाने की बात भी हो सकती है।
इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि यहां उप प्रधान का चुनाव हो चुका है और बहुत हद तक संभावना यह है कि डॉक्टर संजय जांगड़ा को सस्पेंड करके उप प्रधान को प्रधान का अतिरिक्त चार्ज दिया जाएगा। उन्हें कार्यवाहक अध्यक्ष बनाकर फिलहाल जुलाना नगर पालिका के विकास कार्यों को गति देने का काम किया जाएगा।
जहां तक सवाल एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई का है तो सरकार की ओर से उसे ऐसे मामलों में पहले ही पूरी छूट दी गई है लेकिन फिर भी जब मामला सत्ताधारी दल के प्रभावशाली नेता का आता है तो उसने विभागीय आला अधिकारियों से इस बारे में चर्चा जरूर की होगी। इसके बाद नेताओं से भी चर्चा के बाद यह कार्रवाई की गई है।
हालांकि देश भर में नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम के मुखियाओं के रिश्वत मामले में पकड़े जाने के कोई बहुत ज्यादा मामले नहीं हैं, लेकिन जींद जिले में ही यह दूसरा मामला है। इससे पहले उचाना नगर पालिका की प्रधान ऐसे ही मामले में फंस चुकी है। उनका मामला भी अभी अंडर ट्रायल है।
