चेतराम राजमिस्त्री (चिनाई) का काम करता है। पत्नी रेखा, 21 साल का बेटा शिवम, 18 साल की बेटी और 8 साल का एक बेटा अरुण है। पांच सदस्यों का यह परिवार एक कमरे के छोटे से मकान में रहता था। घर की हालत कुछ ज्यादा ठीक नहीं थी।
मरोड़ा से 5 किलोमीटर दूर गांव अटेरना है। चेतराम करीब 6 साल से इसी गांव में दिहाड़ी करने जाता था। खासकर शाहिद के घर में निर्माण का काम करता आ रहा था। चेतराम के पास मुस्लिम मजदूर अल्ली काम करता है, जो बलई गांव का रहने वाला है। शाहिद का नगीना के बड़कली चौक पर बिरयानी बेचने का काम है। कहा जाता है कि चेतराम अब शाहिद से इतना प्रभावित था कि जहां वो काम के लिए भेजता था, चेतराम वहीं जाता था। चेतराम सुबह 5 बजे घर से निकल जाता था और रात को करीब 11 बजे लौटता था।
चेतराम अब मोहम्मद इकराम, रेखा अब रुखसार और बड़े बेटे शिवम के मोहम्मद माहिर हो गए हैं। इसके अलावा बाकी दो बच्चों के नाम शबनम और रेहान लिखे थे। शपथपत्र में लिखा है, इस्लाम धर्म की अच्छाई से प्रभावित होकर अपनी मर्जी से बगैर किसी डर या लालच के खुद, पत्नी व बेटी-बेटे के साथ इस्लाम कबूल लिया है। अब नाम चेतराम से मोहम्मद इकराम हो गया है। भविष्य में इसी नाम से पुकारा जाए।

चेतराम से मौहम्मद इकराम बनने के बाद वह और उसका परिवार नगीना के बड़कली चौक के पास 3 कमरों के बड़े और नए मकान में रह रहा है। दिल्ली-अलवर रोड पर जिस जमीन पर यह मकान बना है, वो एकदम रोड के किनारे है और काफी कीमती है। यह शाहिद की जमीन बताई जा रही है और इस मकान का निर्माण चेतराम से ही करवाया गया था। 26 अगस्त को ही सतबीर और अन्य परिजनों ने चेतराम से संपर्क किया। चेतराम ने कहा कि इस्लाम अपना लिया है, यहीं रहेगा।
मौहम्मद इकराम का कहना है, मैंने पूरी तरह से इस्लाम कबूल किया है, अब नहीं बदलूंगा। आपको भी कबूलना है तो कबूल लें, नहीं तो यहां से जाएं, ये हमारी जिंदगी है…।
भले ही चेतराम यह क्या कर रही है कि उसने बिना किसी लालच की धर्म परिवर्तन किया है लेकिन पिछले 15 दिनों की उसकी जिंदगी यह बता रही है कि इन विवादों के बीच भी उसका रहन-सहन बदल गया है। इस मामले में जहां पुलिस ने मामला दर्ज कर रखा है वही एनआईए जांच की मांग भी की जा रही है।
