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  • जोमैटो और स्विगी पर GST की मार, 200 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा की लगेगी चपत

    जोमैटो और स्विगी पर GST की मार, 200 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा की लगेगी चपत

    धीमी ग्रोथ रेट से जूझ रही जोमैटो और स्विगी पर GST की मार पड़ी है। जोमैटो को इस जीएसटी की मार से करीब 200 करोड रुपए सालाना का फर्क पड़ने वाला है। इससे दोनों कंपनियों के डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई घट सकती है। साथ ही जोमैटो-स्विगी जैसे ऐप्स से फूड मंगाने वाले करोड़ों लोगों को अब ज्यादा पैसे देने पड़ सकते हैं। यह जीएसटी के कारण होगा।

    हरियाणा में जोमैटो का कारोबार काफी ज्यादा है। गुरुग्राम में कंपनी का मुख्यालय होने के कारण राज्य कंपनी के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है। कंपनी की विस्तार योजनाएं और नए स्टोर्स की संख्या में वृद्धि उसके समग्र संचालन की सफलता का एक संकेतक है।
    दरअसल, जीएसटी काउंसिल ने यह स्पष्ट किया है कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस को डिलीवरी कर्मचारियों की तरफ से 18 फीसदी जीएसटी का भुगतान करना होगा, ये पहले जीएसटी के दायरे से बाहर थे। ऐसे में जोमैटो और स्विगी को सालाना करीब 200 करोड़ रुपये का अतिरिक्त जीएसटी भरना होगा। कंपनियां यह अतिरिक्त लागत ग्राहकों और डिलीवरी पार्टनर्स पर ट्रांसफर कर सकती हैं।

    एक रिपोर्ट में जोमैटो के अधिकारी के हवाले से कहा गया, ‘यह अतिरिक्त टैक्स आंशिक रूप से डिलीवरी वर्कर्स पर डाला जाएगा और इससे निकट भविष्य में उनकी कमाई कम होने की संभावना है। वहीं, ग्राहकों पर भी थोड़ी लागत ट्रांसफर करने की योजना है।’ रिपोर्ट के अनुसार, स्विगी के एक अधिकारी ने भी कहा कि कंपनी टैक्स का बोझ ट्रांसफर करने की योजना बना रही है।

    जोमैटो और स्विगी पर GST की मार, 200 करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा की लगेगी चपत

    बता दें कि जीएसटी काउंसिल की इस क्लेरिफिकेशन ने फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स और सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझा दिया है। विवाद यह था कि क्या कंपनियां उनके द्वारा कलेक्ट की गई उस डिलीवरी फीस पर टैक्स देने के लिए उत्तरदायी हैं, जो वे डिलीवरी करने वाले गिग वर्कर्स को पे करती हैं। दिसंबर 2024 में जोमैटो को जीएसटी अधिकारियों से 2019 से 2022 की अवधि के लिए 803 करोड़ रुपये के बकाया टैक्स का नोटिस मिला था। इसमें जुर्माना और ब्याज भी शामिल था। स्विगी को भी इस मुद्दे पर एक प्री-डिमांड नोटिस जारी किया गया था। काउंसिल के स्पष्टीकरण का इन नोटिसों पर क्या असर पड़ेगा, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन माना जाता है कि दोनों कंपनियों को 2019 से अब तक का जीएसटी भरना पड़ेगा।

    ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अनुसार, लोकल डिलीवरी सर्विसेज पर 18% जीएसटी लगाना जोमैटो और स्विगी के लिए थोड़ा नकारात्मक होगा। यह डेवलपमेंट ऐसे समय में आया है, जब दोनों कंपनियां धीमी ग्रोथ से जूझ रही हैं। दोनों कंपनियों ने हालिया तिमाहियों में फूड डिलीवरी ग्रॉस ऑर्डर वैल्यू में 20 फीसदी से कम की ग्रोथ दर्ज की है, जो पहले की तुलना में काफी धीमी है।

  • अब ऑनलाइन बिकेंगी मछलियां, मत्स्यसेतु ऐप में दिया गया ये खास फीचर

    अब ऑनलाइन बिकेंगी मछलियां, मत्स्यसेतु ऐप में दिया गया ये खास फीचर

    देश में कृषि के कार्य से जुड़े उद्योग धंधों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार कई योजनाएं चलाती है, जिससे कि किसानों की आय दोगुनी की जा सके। ऐसे में केंद्र सरकार मत्स्य यानि मछली पालन से जुड़े किसानों के लिए भी कई योजनाएं चला रही है। मछुआरों को मछली पकड़ने, उसके लिए बाजार के अलावा मौसम की सटीक जानकारी देने समेत कई सुविधाओं पर काम किया जा रहा है। इसी के तहत अब मछली की खरीद और बेच के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है।

    दरअसल, ‘मत्स्यसेतु’ मोबाइल ऐप में ऑनलाइन मार्केटप्लेस फीचर ‘एक्वा बाजार’ का शुभारंभ किया गया। यह ऑनलाइन मार्केटप्लेस मत्स्य किसानों और हितधारकों को मत्स्य संस्कृति के लिए आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराएगा। इसका उद्देश्य जलीय कृषि क्षेत्र में शामिल विभिन्न हितधारकों को आपस में जोड़ना है।

    क्या है एक्वा बाजार फीचर का खासियत

    अब मत्स्य सेतु मोबाइल एप पर ऑनलाइन मार्केट प्लेस क्वा बाजार की मदद से मछली किसानों और हितधारकों को जोड़ा जा रहा है, जिससे मछली के बीज, चारा, दवाएं और मछली पालन से जुड़े दूसरे संसाधनों के स्रोत मुहैया करवाये जायेंगे। इसके अलावा मछली किसान इस ऐप पर रजिस्ट्रेशन करके एक्वा बाजार फीचर से जुड़ सकते हैं, जिसके बाद मछली पालन के आवश्यक सेवाओं के अलावा इससे संबंधित सामानों को सूचीबद्ध करके शॉपिंग प्लेटफॉर्म तैयार कर सकते हैं।

    यह फीचर मत्स्य पालकों को मछली की कीमतों के साथ उपलब्धता की तारीख इंगित करने का विकल्प देती है। मछली खरीदने की इच्छा रखने वाले खरीदार मत्स्य पालक किसानों से संपर्क करेंगे और उन्हें कीमतों की पेशकश करेंगे। निश्चित रूप से यह किसानों को मछली खरीदारों या खरीदार एजेंटों से ज्यादा व्यावसायिक जानकारी प्राप्त करने में मदद करेगा, जिससे बाजार की स्थिति के बारे में जागरूकता उत्पन्न करने और किसानों के उत्पाद को बेहतर कीमत प्रदान करने का मार्ग प्रशस्त होगा।

    मत्स्य पालकों को होने वाली समस्याएं

    दरअसल कई बार देखा गया है कि मत्स्य किसानों को मत्स्य पालन वाले मौसम में महत्वपूर्ण और गुणवत्तापूर्ण इनपुट जैसे मछली के बीज, चारा, चारा सामग्री, उर्वरक, पौष्टिक-औषधीय पदार्थ, एडिटिव्स, दवाएं आदि प्राप्त करने में कठिनाइयां होती है। इन इनपुटों की प्राप्ति में हुई किसी प्रकार की देरी से उनके मत्स्य पालन की उत्पादकता बुरी तरह प्रभावित होती है। कभी-कभी, किसानों को सेवाओं की भी आवश्यकता होती है- जैसे कि खेत निर्माण, किराये की सेवाएं, मछली पकड़ने के लिए जनशक्ति आदि। इसी प्रकार, कभी-कभी, मत्स्य पालकों को बाजार में अपना उत्पाद बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है या फिर वे अपने द्वारा उत्पादन की गई मछली को बेचने के लिए केवल कुछ खरीदारों या एजेंटों पर ही भरोसा करते हैं।

    ऐप दूर करेगा समस्याएं

    इन समस्याओं का समाधान करने के लिए आईसीएआर-सीआईएफए और एनएफडीबी ने सभी हितधारकों को एक मंच पर लाने के लिए इस डिजिटल प्लेटफॉर्म को विकसित किया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से, कोई भी रजिस्टर्ड विक्रेता अपनी इनपुट सामग्री को सूचीबद्ध कर सकता है। ऐप उपयोगकर्ताओं के लिए सूचीबद्ध वस्तुओं का बाजार में प्रदर्शन, उनकी भौगोलिक समीपता के आधार पर किया जाएगा।

    सूचीबद्ध वस्तुओं का वर्गीकरण निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों में किया गया है; मछली के बीज, इनपुट सामग्री, सेवाएं, नौकरियां और टेबल मछली। प्रत्येक लिस्टिंग में विक्रेताओं का संपर्क विवरण होने के साथ-साथ उत्पाद, मूल्य, उपलब्ध मात्रा, आपूर्ति क्षेत्र आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की जाएगी। जरूरतमंद किसान या हितधारक विक्रेताओं से संपर्क कर सकते हैं और अपनी खरीद आवश्यकताओं को पूरी कर सकते हैं।

    केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला ने बताया कि केंद्र सरकार ने पहली बार आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत लक्षित मत्स्य उत्पादन प्राप्त करने के लिए उद्यमियों द्वारा स्टार्टअप को बढ़ावा देना शुरू किया है।