Tag: Delhi court bail rejection

  • Abhay Singh का एआई पर हमला, कहा हमारा डाटा लेकर हमें ही परोस रहा ठग

    Abhay Singh का एआई पर हमला, कहा हमारा डाटा लेकर हमें ही परोस रहा ठग

    Abhay Singh: उत्तर प्रदेश विधानसभा में एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर विशेष सत्र के दौरान सदस्यों ने अपनी अपनी राय रखी। इस मुद्दे पर चर्चा में भाग लेते हुए समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक Abhay Singh ने जब बोलना शुरू किया तो सदन हंसी में डूब गया। अभय सिंह ओपन एआई चैटजीपीटी के साथ अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि एआई में आप जो भी इनपुट डालते हैं, उसे कैलकुलेट कर संबंधित डेटा ओपन एआई की ओर से जारी किया जाता है। वह अपनी तरफ से कुछ भी नहीं बताता है। इसमें कई बार बड़ी गलती के गुंजाइश रहती है। उन्होंने कहा कि हमने चैटजीपीटी से राजयोग को लेकर सवाल किया था। हमें जवाब मिला आपका राजयोग इस समय से इतने समय तक रहने वाला है। अब आप देख लीजिए। दरअसल, उन्होंने समाजवादी पार्टी से खुद को निष्कासित किए जाने पर यह चुटकी ली।

    गोसाईगंज से विधायक Abhay Singh के बयान पर सदन में खूब ठहाके लगे। अभय सिंह ने चैटजीपीटी जैसे एआई टूल्स को ठग बताते हुए कहा कि इनके पास अपनी कोई जानकारी नहीं होती। ये एआई टूल्स हमारा ही डेटा लेकर हमें वापस देते हैं।

    Abhay Singh का एआई पर हमला, कहा हमारा डाटा लेकर हमें ही परोस रहा ठग

    सपा से निष्कासित किए गए अभय सिंह ने कहा कि एआई का डेटा भरोसेमंद नहीं है। यह जनता का असली मूड या किसी विधानसभा क्षेत्र में किस पार्टी की लहर है, यह नहीं बता सकता। उन्होंने मजाकिया लहजे में बताया कि जब उन्होंने चैटजीपीटी से पूछा कि वर्ल्ड वॉर हुआ तो क्या होगा, तो उसने उन्हें अमेरिका के साथ बैठा दिया।

    अभय सिंह ने कहा कि हमने एआई को याद दिलाया कि अमेरिका तो पाकिस्तान का सहयोगी है। इसके बाद एआई ने जवाब दिया कि वे रूस के साथ जा सकते हैं। इस प्रकार एआई अपनी समझ से कुछ नहीं बताता। वह फीडेड इनपुट के आधार पर जानकारी देता है।
    अभय सिंह ने एक और किस्सा सुनाते हुए कहा कि उन्होंने एआई से अपनी कुंडली में राजयोग की अवधि पूछी, तो उसने एक समयसीमा बताई। लेकिन जब उन्होंने बताया कि पंडित जी ने अलग समय बताया है। इस पर एआई ने मान लिया कि वह गलत है, क्योंकि उसने उनका मूल नक्षत्र नहीं देखा था।

    विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बीच में टिप्पणी की कि यही एआई है, जो इस सत्र में समझाने का मकसद है। इस पर अभय सिंह ने कहा कि अगर हम इस पर निर्भर हो गए तो यह हमें उसी तरह गिरा देगा, जैसे गूगल मैप कई बार गाड़ियों को गिरा देता है।
    हालांकि, अभय सिंह ने माना कि तात्कालिक जानकारी पाने में एआई उपयोगी हो सकता है, लेकिन इस पर पूरी तरह भरोसा करना खतरनाक होगा। अभय सिंह के इन बयानों का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

  • सावधान: ठगी करने का ठगों ने अपनाया नया तरीका, बिना बुक किए कोरियर भेजकर साइबर ठग कर रहे ठगी

    सावधान: ठगी करने का ठगों ने अपनाया नया तरीका, बिना बुक किए कोरियर भेजकर साइबर ठग कर रहे ठगी

    पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने कहा कि समय के साथ ऑनलाइन मार्केटिंग का प्रचलन बढ़ा है। ऐसे में ऑनलाइन प्रोडक्ट की बुकिंग करने के बाद उसकी डिलीवरी घर या किराए के कमरे पर होती है। इसी का फायदा अब साइबर शातिर उठा रहे हैं। वह कोरियर और गिफ्ट पहुंचाने के नाम पर ठगी कर रहे हैं।

    ये बरतें सावधानी

    चूंकि आमतौर पर पहले भी कोरियर के जरिए सामान मिल चुका होता है, लिहाजा कोई भी व्यक्ति तुरंत भरोसा कर लेता है। अब आपको सतर्क रहने की आवश्यकता है। ध्यान देना होगा कि आपने जो सामान ऑनलाइन बुक किया था, उसी के संबंध में किसी से बातचीत हो रही है या नहीं। अगर उससे संबंधित नहीं है तो किसी भी दशा में अपनी गोपनीय जानकारी जैसे एटीएम कार्ड, बैंक खाते की डिटेल और ओटीपी शेयर नहीं करना है।

    इसमें लक्ष्य करके किसी को भी शिकार बनाकर उसके पते पर कोरियर के जरिए एक पार्सल भेजा जाता है जो उसने कभी ऑर्डर ही नहीं किया होता। जाहिर है कि वह ऑर्डर रिसीव करने से मना कर देगा। फिर डिलिवरी ब्वाय उस पार्सल भेजने वाले को फोन लगाएगा जिसका नंबर ‘कस्टमर केयर’ के रूप में लेबल पर दिया होगा। शिकार की फोन पर बात कराई जाएगी। उसे समझाया जाएगा कि अगर ऑर्डर उसने नहीं किया तो वह इस आर्डर को कैंसिल करा सकता है।

    मोबाइल पर आया OTP न बताएं

    बस इसके लिए मोबाइल पर आया OTP बताना होगा। पीछा छुड़ाने के लिए शिकार व्यक्ति जल्दबाजी में OTP बता देता है और यहीं पर चूक हो जाती है। कॉल पर OTP मिलते ही दूसरी ओर बैठे ठग शिकार का बैंक खाता खाली कर देते हैं। ऐसे में बिना आर्डर किए कोई कोरियर घर पहुंचता है तो ठगी हो सकती है। ऐसा कोई कोरियर पहुंचता है तो उसकी शिकायत पुलिस को दें। ठगी होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या 112 पर कॉल करें।

     

     

  • ओएलएक्स पर सामान खरीदने का झांसा देकर 1.23 लाख रुपये की ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

    ओएलएक्स पर सामान खरीदने का झांसा देकर 1.23 लाख रुपये की ठगी, एक आरोपी गिरफ्तार

    जांचकर्ता ने बताया कि नयागांव निवासी महावीर प्रसाद ने अपनी शिकायत में बताया कि 07 अगस्त को मेरा बेटा यश ओएलएक्स पर अपना क्रिकेट का सामान बेच रहा था। खरीदने वाले ने उनके बेटे को अपने झांसे में लेकर अलग-अलग बैंक खातों से 1 लाख 23 हजार रुपये की ट्रांजैक्शन फोन-पे के माध्यम से करा ली। ठगी का पता लगने पर उन्होंने मामले की शिकायत साइबर थाना पुलिस रेवाड़ी को दी।

    साइबर थाना पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के बाद पुलिस ने मंगलवार को मामले में एक आरोपी राजस्थान के जिला भरतपुर के गांव जोत गमेती निवासी राशिद को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को अदालत में पेश करके एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है। पुलिस ने आरोपी से ठगी की रकम में से 77 हजार रुपये बरामद कर लिए हैं। रिमांड के दौरान आरोपी से उसके अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी।

     

  • रेवाड़ी में महिला से पार्ट टाइम जॉब दिलाने के नाम पर 1.5 लाख की ठगी

    रेवाड़ी में महिला से पार्ट टाइम जॉब दिलाने के नाम पर 1.5 लाख की ठगी

    मिली जानकारी के मुताबिक रेवाड़ी शहर के परशुराम कॉलोनी निवासी कविता ने पार्ट टाइम जॉब को लेकर गूगल पर सर्च किया था. सर्च के दौरान उसे एक व्हाट्सएप नंबर मिला. जब उसने  नंबर पर बात की तो उसने अपनी कंपनी का प्रोसेस बताते हुए एक लिंक भेजा. इस लिंक के जरिए महिला ने खरीददारी की और उसके पैसे वापस भी मिल गए.

     

    कविता का कहना है कि उसके बाद लिंक पर दोबारा क्लिक किया तो उसके खाते से नकदी कटनी शुरू हो गई. गूगल-पे के जरिए उसके खाते से 12 बार में 1 लाख पांच हजार रुपए निकाले गए. इतने सारे पैसे निकलने का मैसेज आने पर उसने तुरंत बैंक अधिकारियों से संपर्क किया तो धोखाधड़ी का पता चला. जिसके बाद कविता ने बैंक से जुटाई जानकारी के आधार पर मॉडल टाउन थाना पुलिस को शिकायत दी.

     

    पुलिस ने कविता की शिकायत पर धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर, अब उन खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए. इसके साथ ही जिस नंबर पर कविता ने संपर्क किया उसकी भी डिटेल निकलवाई गई है. पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा.

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  • एक क्लिक में साफ़ हो सकता है बैंक बैलेंस, ये गलती बिलकुल ना करें

    एक क्लिक में साफ़ हो सकता है बैंक बैलेंस, ये गलती बिलकुल ना करें

    टेक्नोलॉजी के इस दौर में हमने तेजी से डिजिटल ट्रांजेक्शन और ऑनलाइन शॉपिंग सहित अपने तौर तरीके बदल लिए है. साइबर धोखाधड़ी करने वाले ठग भी अलग –अलग तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे है. ओटीपी या बैंक डिटेल्स शेयर करके  या फिर लोटरी लगने का झांसा देकर ठगी करने का तरीका पुराना हो गया है. अब ठग मदद करने के नाम पर एक लिंक पर क्लिक करने के लिए बोलते है. जैसे ही आप क्लिक करें तो आपका बैंक बैलेंस साफ़ हो जायेगा.

     

    उदाहरण के दौर पर आप हिमांशु के साथ हुई ठगी के मामले से समझियें, हिमांशु यूपी के रहने वाले है और बिलासपुर के पास एक निजी कम्पनी में काम करते है. हिमांशु ने एक शोपिंग साईट पर 199 रूपए कि हाथ की घड़ी पसंद कर खरीद ली. ऑर्डर के बावजूद घड़ी जब उसे नहीं मिली तो उसने गूगल से हेल्पलाइन नंबर लेकर संपर्क किया. हिमांशु को नहीं पता था कि जिस नम्बर पर वो सम्पर्क कर रहा है वो ठग का नम्बर है.

     

    ठग ने मदद के लिए हिमांशु को कहा कि वो व्हाट्सएप पर लिंक भेज रहा है. उस पर क्लिक करें. हिमांशु ने क्लिक किया तो कुछ देरी बाद ही उसके खाते से 30500 रूपए की नगदी साफ़ हो गई. थोड़ी देर बाद जब हिमांशु को ठगी का पता चला तो उसने साइबर क्राइम के ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत की.

     

    दरअसल ठग ने लिंक के जरिये हिमांशु की बैंक डिटेल्स ली और फिर बैंक खाते में सेंध लगा दी. हाल में जो ठगी के मामले सामने आ रहे है. उसमें देखा गया है कि मदद के लिए लोग गूगल पर हेल्पलाइन सर्च करते है. लेकिन यहाँ सर्च में ठगों के नम्बर ऊपर आते है. जिसपर कॉल करने के बाद लोग ठगी का शिकार हो जाते है.

     

    ये गलती ना करें

    • मोबाइल पर आये किसी भी लिंक को बिना सोचे समझे क्लिक ना करें.
    • वेरीफाई शोपिंग साईट से ही शोपिंग करें.
    • गूगल पर सर्च करने पर आयें सभी हेल्पलाइन सही नहीं होते इसलिए सम्पर्क करने से पहले नम्बर की जाँच जरुर कर लें.
    • किसी के मदद करने की बात पर विश्वास ना करके कोई भी एप अपने फोन में इंस्टोल ना करें.
    • अपनी पर्सनल इन्फोर्मेशन पब्लिक डोमेन में शेयर ना करें.

    कृपया जागरूकता के लिये इस इनफार्मेशन को शेयर जरुर करें.