Lalbaugcha Raja: श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती के अनुसार शुभ मुहूर्त का हमेशा ख्याल रखना चाहिए। ग्रहण काल और उसके लिए लगने वाले सूतक से पहले लाल बाग के राजा का विसर्जन हो जाना चाहिए था। इन लोगों ने विसर्जन को लेकर गलती तो की है और इन्हें इस भूल का दंड तो मिलेगा। और मिलना भी चाहिए क्योंकि आधुनिकता की चकाचौंध में परंपराओं का परित्याग नहीं करना चाहिए।
स्वामी विश्वेश्वरानंद के अनुसार जिस तरह से प्रशासन ने 6 फीट के गणपति को उनके द्वारा बनाये गये तालाब में विसर्जित करने का नियम बनाया हुआ है, उसी तरह बड़े गणपति के लिए भी कुछेक नियम बनाये जाने चाहिए। जिससे गणपति विसर्जन की मर्यादा और गणेश भक्तों की भावना दोनों बनी रहे। लाल बाग के राजा की कमेटी से जुड़े लोगों को समझना होगा कि हमारा सनातन धर्म परंपरा के आधार पर ही चल रहा है। स्वामी विश्वेश्वरानंद कहते हैं कि – यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः. अर्थात् श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही आचरण करते हैं, इसलिए गणपति की प्रतिमा का पूजन और विसर्जन हमेशा शुभ मुहूर्त में ही होना चाहिए।

लाल बाग के राजा के विसर्जन में हुई देरी और उससे लगने वाले दोष को लेकर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पुरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय का कहना है कि सामान्य परिस्थिति में गणपति विसर्जन शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा रही है। हिंदू मान्यता के अनुसार गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी करना शुभ माना गया है लेकिन यदि कोई विषम परिस्थिति है तो उसे देखते हुए व्यक्ति अपना निर्णय ले सकता है, लेकिन असामान्य परिस्थितियों में जब यह असंभव हो उसे शुभ मुहूर्त का विचार करके विधि-विधान से विसर्जन करना चाहिए।
प्रो. राम राज उपाध्याय के अनुसार यदि लाल बाग के राजा के विसर्जन में कोई त्रुटि हुई है तो उसके लिए उन्हें इसके लिए प्रायश्चित करते हुए गणपति से क्षमा प्रार्थना करना चाहिए। गणपति अथर्वशीर्ष सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति और क्षमायाचना के लिए पढ़ा जाता है। ऐसे में इस भूल के लिए उन्हें इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए तथा भविष्य में ऐसी गलती न होने पाए इसके लिए संकल्प लेना चाहिए।
लाल बाग के राजा से जुड़े लोग लंबे समय से गणपति का विसर्जन करते रहे हैं और उन्हें पता है कि उन्हें समुद्र तट पर पहुंचने में कितना समय लगता है। यदि उन्हें पता है कि गणपति को ले जाने में 12 घंटे लगते हैं तो उन्हें सुबह 08 बजे ही निकल जाना चाहिए था।
क्या होता है शुभ मुहूर्त
हिंदू मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किसी कार्य को करने से वह बगैर किसी बाधा के मनचाहे तरीके से पूर्ण होता है। शुभ मुहूर्त में काम करने पर वह जिस संकल्प के लिए किया जाता है, उस संकल्प की पूर्ति होती है। यह शुभ मुहूर्त अक्सर पंचांग की मदद से देखा जाता है। जैसे अभिजित मूहूर्त प्रतिदिन आता है और इसमें किसी कार्य को करने पर वह पूर्ण रूप से फलदायी होता है।












