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  • Lalbaugcha Raja के विसर्जन में हुई चूक पर बोले धर्मगुरु, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और परंपरा की सच्चाई

    Lalbaugcha Raja के विसर्जन में हुई चूक पर बोले धर्मगुरु, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और परंपरा की सच्चाई

    Lalbaugcha Raja: श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी चिदंबरानंद सरस्वती के अनुसार शुभ मुहूर्त का हमेशा ख्याल रखना चाहिए। ग्रहण काल और उसके लिए लगने वाले सूतक से पहले लाल बाग के राजा का विसर्जन हो जाना चाहिए था। इन लोगों ने विसर्जन को लेकर गलती तो की है और इन्हें इस भूल का दंड तो मिलेगा। और मिलना भी चाहिए क्योंकि आधुनिकता की चकाचौंध में परंपराओं का परित्याग नहीं करना चाहिए।

    स्वामी विश्वेश्वरानंद के अनुसार जिस तरह से प्रशासन ने 6 फीट के गणपति को उनके द्वारा बनाये गये तालाब में विसर्जित करने का नियम बनाया हुआ है, उसी तरह बड़े गणपति के लिए भी कुछेक नियम बनाये जाने चाहिए। जिससे गणपति विसर्जन की मर्यादा और गणेश भक्तों की भावना दोनों बनी रहे। लाल बाग के राजा की कमेटी से जुड़े लोगों को समझना होगा कि हमारा सनातन धर्म परंपरा के आधार पर ही चल रहा है। स्वामी विश्वेश्वरानंद कहते हैं कि – यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः. अर्थात् श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, अन्य लोग भी वैसा ही आचरण करते हैं, इसलिए गणपति की प्रतिमा का पूजन और विसर्जन हमेशा शुभ मुहूर्त में ही होना चाहिए।

    Lalbaugcha Raja के विसर्जन में हुई चूक पर बोले धर्मगुरु, जानें क्या है शुभ मुहूर्त और परंपरा की सच्चाई

    लाल बाग के राजा के विसर्जन में हुई देरी और उससे लगने वाले दोष को लेकर श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पुरोहित विभाग के प्रोफेसर रामराज उपाध्याय का कहना है कि सामान्य परिस्थिति में गणपति विसर्जन शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और शुभ मुहूर्त में करने की परंपरा रही है। हिंदू मान्यता के अनुसार गणपति का विसर्जन अनंत चतुर्दशी करना शुभ माना गया है लेकिन यदि कोई विषम परिस्थिति है तो उसे देखते हुए व्यक्ति अपना निर्णय ले सकता है, लेकिन असामान्य परिस्थितियों में जब यह असंभव हो उसे शुभ मुहूर्त का विचार करके विधि-विधान से विसर्जन करना चाहिए।

    प्रो. राम राज उपाध्याय के अनुसार यदि लाल बाग के राजा के विसर्जन में कोई त्रुटि हुई है तो उसके लिए उन्हें इसके लिए प्रायश्चित करते हुए गणपति से क्षमा प्रार्थना करना चाहिए। गणपति अथर्वशीर्ष सभी प्रकार की सिद्धियों की प्राप्ति और क्षमायाचना के लिए पढ़ा जाता है। ऐसे में इस भूल के लिए उन्हें इसका श्रद्धापूर्वक पाठ करना चाहिए तथा भविष्य में ऐसी गलती न होने पाए इसके लिए संकल्प लेना चाहिए।

    लाल बाग के राजा से जुड़े लोग लंबे समय से गणपति का विसर्जन करते रहे हैं और उन्हें पता है कि उन्हें समुद्र तट पर पहुंचने में कितना समय लगता है। यदि उन्हें पता है कि गणपति को ले जाने में 12 घंटे लगते हैं तो उन्हें सुबह 08 बजे ही निकल जाना चाहिए था।

    क्या होता है शुभ मुहूर्त

    हिंदू मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किसी कार्य को करने से वह बगैर किसी बाधा के मनचाहे तरीके से पूर्ण होता है। शुभ मुहूर्त में काम करने पर वह जिस संकल्प के लिए किया जाता है, उस संकल्प की पूर्ति होती है। यह शुभ मुहूर्त अक्सर पंचांग की मदद से देखा जाता है। जैसे अभिजित मूहूर्त प्रतिदिन आता है और इसमें किसी कार्य को करने पर वह पूर्ण रूप से फलदायी होता है।

  • महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन हादसे! करंट और डूबने से कई लोगों की मौत, कई लापता

    महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन हादसे! करंट और डूबने से कई लोगों की मौत, कई लापता

    महाराष्ट्र में गणेश उत्सव का जश्न हर साल बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जाता है। यहां का उत्सव सिर्फ राज्य ही नहीं बल्कि दुनियाभर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता है। लोग अलग-अलग जिलों से इस महापर्व को देखने आते हैं और भक्तिमय वातावरण का आनंद लेते हैं। हालांकि, विसर्जन के समय सुरक्षा की कमी और भारी भीड़ के कारण कई हादसों की खबरें भी सामने आती हैं। इस साल भी विभिन्न जिलों में विसर्जन के दौरान कई दुर्घटनाएं हुईं। कहीं लोग डूबने से मारे गए, तो कहीं बिजली के करंट की चपेट में आने से श्रद्धालुओं की जान चली गई।

    विरार में समुद्र में फंसे तीन लोगों की बचाव

    विरार के मारंबळ पाडा जेट्टी पर विसर्जन के दौरान तीन लोग समुद्र की गहराई में फंस गए। इन लोगों में एक महिला भी शामिल थी। मौके पर मौजूद सुवर्णदुर्ग रो-रो सेवा के कर्मचारी और स्थानीय मछुआरों ने तुरंत स्पीड बोट की मदद से तीनों की जान बचाई। इस तरह का त्वरित बचाव कार्य हादसे की गंभीरता को कम करने में सहायक साबित हुआ। स्थानीय प्रशासन ने भी इस मामले में राहत और बचाव कार्य में तेजी दिखाई।

    महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन हादसे! करंट और डूबने से कई लोगों की मौत, कई लापता

    मुंबई में हाई टेंशन वायर का हादसा, एक की मौत

    मुंबई के साकीनाका क्षेत्र में खैरानी रोड स्थित एस. जे. स्टूडियो के पास टाटा पावर की हाई टेंशन लाइन के संपर्क में आने से पांच श्रद्धालु करंट की चपेट में आ गए। इस हादसे में बिनू शिवकुमार की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, चार अन्य लोगों का इलाज पैरामाउंट हॉस्पिटल और सेवन हिल्स हॉस्पिटल में जारी है। प्रशासन ने इस हादसे के बाद सुरक्षा के उपायों को और कड़ा करने की बात कही।

    नांदेड और पुणे में डूबने की घटनाएं

    नांदेड के गाडेगांव शिवार स्थित आसना नदी में विसर्जन के दौरान तीन लोग डूब गए। इनमें से एक को सुरक्षित बचा लिया गया जबकि बालाजी उबाळे और योगेश उबाळे अब भी लापता हैं। SDRF टीम उनकी तलाश में जुटी हुई है। वहीं पुणे के चाकण क्षेत्र में अलग-अलग जगहों पर चार श्रद्धालुओं की पानी में डूबने से मौत हो गई। इन घटनाओं ने राज्य में सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ठाणे में पांच लोग डूबे, एक का शव बरामद

    ठाणे के शहापुर क्षेत्र के आसनगांव मुंडेवाड़ी स्थित भारंगी नदी के गणेश घाट पर विसर्जन के दौरान पांच लोग डूब गए। दो को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि प्रतिक मुंढे (24) का शव बरामद हुआ। दो अन्य लोग अभी भी लापता हैं और अंधेरा होने की वजह से बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं। पुलिस और रेस्क्यू टीम लगातार बचाव कार्य में लगी हुई हैं।

    प्रशासन और रेस्क्यू टीमें अलर्ट

    गणेश विसर्जन के दौरान हुई इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया कि सुरक्षा व्यवस्था में और सुधार की आवश्यकता है। राज्य सरकार ने कहा है कि एनडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और मछुआरों के सहयोग से कई लोगों की जान बचाई गई, लेकिन अभी भी कई लोग लापता हैं। श्रद्धालुओं से भी अपील की गई है कि वे सावधानी बरतें और नदी या समुद्र में भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर अत्यधिक जोखिम न लें। सुरक्षित उत्सव के लिए प्रशासन और रेस्क्यू टीम पूरी तरह अलर्ट हैं।

  • Ganesh Utsav: 100 करोड़ से ज्यादा की सोने चांदी से सजे हैं गणपति बप्पा, 474 करोड़ रुपए से ज्यादा का करवाया गणेश उत्सव का बीमा

    Ganesh Utsav: 100 करोड़ से ज्यादा की सोने चांदी से सजे हैं गणपति बप्पा, 474 करोड़ रुपए से ज्यादा का करवाया गणेश उत्सव का बीमा

    Ganesh Utsav: आजकल धार्मिक आयोजनों में भगवान को इस प्रकार सजाया जाता है कि वह देखने वालों को आकर्षक लगे। एक से बढ़कर एक ऐसे आयोजन किए जाते हैं जिनमें करोड़ों-अरबों रुपए खर्च किए जाते हैं। अभी जन्माष्टमी पर मथुरा में 100 करोड रुपए की लागत से कृष्ण का श्रृंगार किए जाने की खबर थी लेकिन अब महाराष्ट्र के मुंबई से गणेश उत्सव को लेकर खबर है कि यहां गणपति बप्पा को 66 किलो सोने के आभूषणों और 336 किलो चांदी से सुशोभित किया गया है। पूरे कार्यक्रम का 474 करोड रुपए से ज्यादा का बीमा भी करवाया गया है।

    मुंबई के जीएसबी सेवा मंडल ने गणेश उत्सव का 474 करोड़ रुपए से ज्यादा का बीमा करवा कर नया रिकॉर्ड बनाया है। मंडल ने सार्वजनिक नहीं किया जा सकने वाले समझौते का हवाला देते हुए प्रीमियम की राशि का खुलासा नहीं किया है। न्यू इंडिया एश्योरेंस द्वारा दी गई बीमा पॉलिसी में सोने-चांदी की वस्तुएं, व्यक्तिगत दुर्घटना कवर, आग और भूकंप जैसे अन्य खतरे, और सार्वजनिक देयता शामिल हैं।

    Ganesh Utsav: 100 करोड़ से ज्यादा की सोने चांदी से सजे हैं गणपति बप्पा, 474 करोड़ रुपए से ज्यादा का करवाया गणेश उत्सव का बीमा

    जीएसबी सेवा मंडल, किंग्स सर्कल ने इस साल रिकॉर्ड 474.46 करोड़ रुपये का बीमा करवाया है, जबकि पिछले साल की पॉलिसी 400 करोड़ रुपये की थी। यह बढ़ोतरी सोने-चांदी की वस्तुओं के बढ़े हुए मूल्यांकन और ज्यादा स्वयंसेवकों व पुजारियों की भर्ती के कारण हुई है। 474 करोड़ रुपये की सभी जोखिम बीमा पॉलिसी, जिसमें सोना, चांदी और रत्न शामिल हैं। सोने की कीमत 67 करोड़ रुपये है, जो 2024 में 43 करोड़ रुपये और 2023 में 38 करोड़ रुपये थी। सबसे ज़्यादा 375 करोड़ रुपये व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा के लिए हैं और इसमें स्वयंसेवकों, पुजारियों, रसोइयों, सेवकों और सुरक्षा गार्डों को कवर किया गया है।

    भूकंप सहित मानक अग्नि और विशेष जोखिम कवर 2 करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्षों से अपरिवर्तित है। पंडालों, स्टेडियमों और श्रद्धालुओं के लिए 30 करोड़ रुपये की सार्वजनिक देयता बीमा है। आयोजन स्थल परिसर के लिए मानक अग्नि और विशेष जोखिम कवर में 43 लाख रुपये शामिल हैं। जीएसबी सेवा मंडल के अध्यक्ष अमित पई ने कहा, “सोने और चांदी के मूल्यांकन में वृद्धि इस बढ़ी हुई राशि के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है। स्वयंसेवकों और पुजारियों को भी इसमें जोड़ा गया है।”

    गणेशोत्सव 2024 में मुंबई में 24 कैरेट सोने की कीमत 77,000 रुपये प्रति 10 ग्राम थी. वर्तमान में कीमतें बढ़कर 1,02,000 रुपये हो गई हैं. जीएसबी के देवता को 66 किलो सोने के आभूषणों और 336 किलो चांदी से सुशोभित किया गया है। जीएसबी 27 से 31 अगस्त तक अपना पाँच दिवसीय गणेशोत्सव आयोजित करेगा। इस वर्ष मंडल ने प्रवेश व्यवस्था में बदलाव किए हैं और पूजा दाताओं के लिए प्रवेश की व्यवस्था बढ़ा दी है। पई ने कहा, “हमने भीड़ प्रबंधन के लिए एक अलग एजेंसी नियुक्त की है।”

  • झुंझुनू की दरगाह में जन्माष्टमी का अनोखा उत्सव! एक दरगाह जहां कृष्ण जन्म के समय गूंज उठी लहर बोले- हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की

    झुंझुनू की दरगाह में जन्माष्टमी का अनोखा उत्सव! एक दरगाह जहां कृष्ण जन्म के समय गूंज उठी लहर बोले- हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की

    देशभर के मंदिरों में शनिवार रात जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई गई। लेकिन राजस्थान के झुंझुनू जिले के नरहड़ में इस त्योहार का अंदाज थोड़ा अलग है। यहां शरीफ हजरत हजीब शकरबार की 14वीं शताब्दी की दरगाह पर हिंदू और मुस्लिम समुदाय मिलकर भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मनाते हैं। यह परंपरा सदियों से चल रही है और हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बन चुकी है।

    तीन दिवसीय भव्य आयोजन

    इस साल भी जन्माष्टमी के अवसर पर दरगाह में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शुक्रवार से शुरू हुए इस उत्सव में भगवान कृष्ण को समर्पित भजन, कीर्तन, कव्वाली और नाटक का आयोजन किया गया। देश और विदेश से हजारों श्रद्धालु इस खास उत्सव में शामिल होने पहुंचे। दरगाह के खादिम करीम पीर बताते हैं कि शोभा यात्रा में हिंदू श्रद्धालुओं का स्वागत मुस्लिम समुदाय फूलों से करता है।

    झुंझुनू की दरगाह में जन्माष्टमी का अनोखा उत्सव! एक दरगाह जहां कृष्ण जन्म के समय गूंज उठी लहर बोले- हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की

    सदियों पुरानी परंपरा

    स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा सदियों पुरानी है। पुराने समय में एक हिंदू परिवार ने यहां जन्माष्टमी मनाने की शुरुआत की थी। तभी से हर साल यह आयोजन होता है। दरगाह को लेकर कोई लिखित दस्तावेज नहीं है, लेकिन स्थानीय लोग बताते हैं कि उनके बाप-दादाओं से भी यह उत्सव इसी तरह मनाने की बातें सुनते आए हैं। इस दरगाह की सबसे खास बात यह है कि सभी धर्मों के लोग अपनी मान्यता के अनुसार दुआ और पूजा कर सकते हैं।

    दरगाह में आशीर्वाद की मान्यता

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यदि दंपति यहां आकर दुआ करते हैं तो उनकी गोद सूनी नहीं रहती। इसलिए शादी-विवाह के बाद कई हिंदू और मुस्लिम दंपति यहां आकर पूजा करते हैं। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि किसी परिवार की गाय या भैंस जब बच्चा देती है, तो वह दही लेकर दरगाह में चढ़ाते हैं। यह परंपरा इस क्षेत्र में धार्मिक और सामाजिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।

    एकता और भक्ति का प्रतीक

    शकर बाबा की दरगाह अब सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि धर्मों की एकता और भाईचारे का प्रतीक बन चुकी है। यहां हर साल जन्माष्टमी मनाने के लिए अलग-अलग समुदाय के लोग एकत्र होते हैं और भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो जाते हैं। यह उत्सव स्थानीय संस्कृति और सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखता है।

  • देश का सबसे महंगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार, ग्वालियर के गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी पर करोड़ों रुपये के आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण

    देश का सबसे महंगा राधा-कृष्ण का श्रृंगार, ग्वालियर के गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी पर करोड़ों रुपये के आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण

    ग्वालियर के गोपाल मंदिर की स्थापना 1921 में ग्वालियर रियासत के शासक माधवराव प्रथम ने करवाई थी। 105 साल पुराने इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां भगवान राधा-कृष्ण को 100 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के आभूषणों से श्रृंगारित किया जाता है। उन्होंने भगवान की पूजा और श्रृंगार के लिए हीरे, मोती, पन्ना और अन्य बेशकीमती रत्नों से जड़े सोने के आभूषण बनवाए थे।

    आभूषणों की परंपरा और सुरक्षा

    आजादी से पहले भगवान राधा-कृष्ण हमेशा इन आभूषणों से सजे रहते थे। स्वतंत्रता के बाद इन्हें बैंक के लॉकर में सुरक्षित रख दिया गया। वर्ष 2007 में मंदिर नगर निगम की देखरेख में आने के बाद, जन्माष्टमी के दिन इन बेशकीमती आभूषणों को भगवान को पहनाने की परंपरा फिर से शुरू हुई। दोपहर 12 बजे आभूषण बैंक के लॉकर से निकाले जाते हैं और नगर निगम के महापौर द्वारा राधा-कृष्ण को पहनाए जाते हैं।

    देश का सबसे महंगा राधा कृष्ण का श्रृंगार, ग्वालियर के गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी पर करोड़ों रुपये के आभूषणों से सजे राधा-कृष्ण

    श्रृंगार और महा आरती का आयोजन

    भगवान के श्रृंगार के बाद मंदिर में महा आरती की जाती है। इस दिन मंदिर के द्वार भक्तों के लिए 24 घंटे खुले रहते हैं। दूर-दूर से श्रद्धालु इस अद्वितीय दर्शन का अनुभव करने पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि जन्माष्टमी के दिन राधा-कृष्ण के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन

    मंदिर और आभूषणों की सुरक्षा के लिए डेढ़ सौ से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाती है। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। यह सुनिश्चित किया जाता है कि श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में भगवान के दर्शन कर सकें।

    श्रद्धालुओं के अनुभव और आस्था

    मंदिर के पुजारी कृष्णदास बताते हैं कि राधा-कृष्ण का यह श्रृंगार देखने के लिए श्रद्धालु सालभर इंतजार करते हैं। श्रद्धालु राखी और वर्षा का कहना है कि करोड़ों के गहनों से सजे भगवान के दर्शन अद्वितीय अनुभव हैं। जन्माष्टमी पर गोपाल मंदिर आस्था, भव्यता और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन जाता है, जहां भगवान का श्रृंगार और भक्तों की श्रद्धा एक अनोखा संगम रचती है।

  • हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम में आगमन, तेल मिलों और कृषि कार्यक्रमों का किया शुभारंभ

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम में आगमन, तेल मिलों और कृषि कार्यक्रमों का किया शुभारंभ

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर कुरुक्षेत्र स्थित गुर्जर धर्मशाला पहुंचे। उनका यहां मौजूद जनसैलाब ने भव्य स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में बने मंदिर में सिर झुकाकर पूजा की और दीप प्रज्वलित किया। शनिवार को मुख्यमंत्री पूरे दिन कुरुक्षेत्र में रहेंगे और धार्मिक, औद्योगिक और कृषि से जुड़े कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

    राज्य स्तरीय मधुमक्खी पालन कार्यशाला में मुख्यमंत्री

    सूचना के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सैनी लगभग 12 बजे कुरुक्षेत्र पहुंचे। गुर्जर धर्मशाला में कार्यक्रम के बाद उन्होंने मल्टी आर्ट कल्चर सेंटर में आयोजित मधुमक्खी पालन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मधुमक्खी पालन किसानों के लिए आय का नया साधन बन सकता है और इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार तकनीकी मदद भी प्रदान कर रही है।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी का कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण जन्माष्टमी कार्यक्रम में आगमन, तेल मिलों और कृषि कार्यक्रमों का किया शुभारंभ

    तेल मिलों की स्थापना और कृषि को बढ़ावा

    मुख्यमंत्री ने कार्यशाला में बताया कि कुरुक्षेत्र में सूरजमुखी की खेती अधिक है, इसलिए शाहाबाद में तेल मिल स्थापित की जाएगी। इसके अलावा, रेवाड़ी में सरसों के उत्पादन को देखते हुए तेल मिल स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को खेती के लिए तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है और उनका ध्यान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर होना चाहिए, ताकि कृषि उत्पाद विदेशों में निर्यात किए जा सकें।

    मधुमक्खी पालन में अंतरराष्ट्रीय मानकों पर ध्यान

    सीएम नायब सैनी ने कहा कि मधुमक्खी से केवल शहद ही नहीं बल्कि विष (वेनोंम) भी प्राप्त होता है, जो आय का स्रोत बन सकता है। उन्होंने किसानों को सुझाव दिया कि यदि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करेंगे, तो उनका शहद विदेशी बाजारों में भेजा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने मधुमक्खी को कर्मयोगी बताते हुए कहा कि सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की पूरी कोशिश कर रही है।

    गौशाला चेक वितरण और जन्माष्टमी महोत्सव

    लगभग 3 बजे मुख्यमंत्री गीता ज्ञान संस्थानम पहुंचे, जहां गौशाला आयोग के अध्यक्ष के साथ मिलकर गौशाला संचालकों को चेक वितरित किए। यह चेक गायों के चारे के लिए प्रदान किए गए, जिससे गौशालाओं को मजबूती मिलेगी। शाम को मुख्यमंत्री लधवा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में भाग लेंगे और श्रद्धालुओं के साथ भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव का आनंद उठाएंगे।

  • Mansa Devi Temple Stampede: मनसा देवी मंदिर बना मातम का मंजर – भीड़ में कैसे छिन गईं 6 ज़िंदगियां?

    Mansa Devi Temple Stampede: मनसा देवी मंदिर बना मातम का मंजर – भीड़ में कैसे छिन गईं 6 ज़िंदगियां?

    Mansa Devi Temple Stampede: हरिद्वार के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में आज सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। मंदिर परिसर में अचानक भगदड़ मच गई जिससे 6 श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। सुबह की आरती और दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ी थी। लेकिन इस आस्था की भीड़ में अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब सीढ़ियों पर एक श्रद्धालु फिसल गया और उसके बाद बाकी लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए।

    सीढ़ियों पर हुआ हादसा

    यह हादसा मंदिर की सीढ़ियों के पास हुआ जहां चढ़ाई के दौरान अचानक कई लोग फिसलकर गिर गए। जैसे ही कुछ लोग नीचे गिरे उनके ऊपर पीछे से आ रहे लोग चढ़ते चले गए जिससे हालात बेकाबू हो गए। मंदिर परिसर में मौजूद लोग चीखने-चिल्लाने लगे और भगदड़ का माहौल बन गया। कुछ श्रद्धालु बेसुध पड़े रहे जबकि कई को पैरों के नीचे कुचलने जैसी हालत हो गई।

    Mansa Devi Temple Stampede: मनसा देवी मंदिर बना मातम का मंजर – भीड़ में कैसे छिन गईं 6 ज़िंदगियां?

    पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

    हादसे की जानकारी मिलते ही प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू किया गया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। स्थानीय लोगों और मंदिर स्टाफ ने भी घायलों को बाहर निकालने में मदद की। पुलिस का कहना है कि अब स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है और मंदिर में दर्शन भी रोक दिए गए हैं ताकि जांच की जा सके।

     भीड़ प्रबंधन में चूक की जांच

    अधिकारियों ने कहा है कि इस हादसे की असली वजहों की जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी में भीड़ प्रबंधन में बड़ी चूक की बात सामने आई है। त्योहार और सावन माह की वजह से मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी लेकिन पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसा कैसे और कब हुआ।

    श्रद्धालुओं में डर और गुस्सा

    इस हादसे के बाद पूरे हरिद्वार शहर में शोक और आक्रोश का माहौल है। श्रद्धालु डरे हुए हैं और लोग मंदिर प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। मंदिर एक धार्मिक स्थान है जहां लोग शांति और आस्था के लिए आते हैं लेकिन इस तरह की घटनाएं न सिर्फ विश्वास को हिला देती हैं बल्कि प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े करती हैं।