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  • कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु के एमएस रमैया अस्पताल में भर्ती, तेज बुखार के बाद हालत पर डॉक्टर कर रहे निगरानी

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु के एमएस रमैया अस्पताल में भर्ती, तेज बुखार के बाद हालत पर डॉक्टर कर रहे निगरानी

    कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी (AICC) के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे को तेज बुखार के कारण बेंगलुरु के एमएस रामैया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि फिलहाल कोई गंभीर चिंता का कारण नहीं है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा जाएगा।

    बुखार की शिकायत पर तुरंत इलाज

    सूत्रों के अनुसार, मंगलवार रात को खड़गे को लगातार बुखार की शिकायत के बाद एमएस रामैया अस्पताल लाया गया। अस्पताल में तुरंत कई परीक्षण किए गए। डॉक्टरों का कहना है कि यह प्रक्रिया उनकी स्थिति को स्थिर रखने और बुखार के कारण का पता लगाने के लिए जरूरी है। चिकित्सक लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु के एमएस रमैया अस्पताल में भर्ती, तेज बुखार के बाद हालत पर डॉक्टर कर रहे निगरानी

    अस्पताल में चल रही जांच

    अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि बुखार के कारणों का पता लगाने के लिए विभिन्न जांचें चल रही हैं। डॉक्टर मरीज की स्थिति को देखते हुए उपचार कर रहे हैं। मेडिकल टीम का कहना है कि खड़गे की हालत फिलहाल स्थिर है। जैसे ही जांच पूरी होगी, अस्पताल से और जानकारी साझा की जाएगी।

    कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की चिंता

    खड़गे के अस्पताल में भर्ती होने की खबर से कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में चिंता की लहर दौड़ गई। सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पार्टी नेताओं ने उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की शुभकामनाएं दी हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ़ से भी स्वास्थ्य लाभ की कामनाएं आ रही हैं।

    जनता और पार्टी में सहानुभूति की लहर

    मल्लिकार्जुन खड़गे की स्वास्थ्य स्थिति ने पार्टी और जनता में सहानुभूति की लहर पैदा कर दी है। कार्यकर्ताओं ने उनकी जल्दी से जल्दी स्वस्थ होने की कामना की है। सभी यह उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही खड़गे अस्पताल से स्वस्थ होकर पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

  • पंजाब में मान सरकार का विशाल अभियान! 2300 गांवों में मलबा हटाने और स्वास्थ्य सेवा का वादा

    पंजाब में मान सरकार का विशाल अभियान! 2300 गांवों में मलबा हटाने और स्वास्थ्य सेवा का वादा

    पंजाब में बाढ़ के बाद जीवन को सामान्य करने और किसानों की मदद करने के लिए आम आदमी पार्टी की मान सरकार ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है। बाढ़ का पानी कई इलाकों से वापस चला गया है, लेकिन मिट्टी, कीचड़ और मलबा हर गांव में बिखरा हुआ है। मान सरकार ने जीवन को सामान्य करने, बीमारी रोकने और किसानों की मदद के लिए एक व्यापक योजना बनाई है।

    2300 गांवों में मलेन सफाई अभियान

    सरकार ने घोषणा की है कि 2300 से अधिक गांवों और वार्डों में एक मेगा सफाई अभियान चलाया जाएगा। हर गांव में JCB, ट्रैक्टर-ट्रॉली और मजदूरों की टीमें भेजी जा रही हैं। ये टीमें मलबा और कीचड़ हटाएंगी, मृत जानवरों का निपटान करेंगी और इसके बाद हर गांव में फॉगिंग की जाएगी ताकि कोई बीमारी न फैले। इस काम के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष फंड रखा गया है। प्रत्येक गांव को तुरंत 1 लाख रुपये दिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। लक्ष्य है कि 24 सितंबर तक मलबा हटाया जाए, 15 अक्टूबर तक सामाजिक स्थल ठीक हों और 22 अक्टूबर तक तालाब साफ कर दिए जाएं।

    पंजाब में मान सरकार का विशाल अभियान! 2300 गांवों में मलबा हटाने और स्वास्थ्य सेवा का वादा

    स्वास्थ्य सेवा और मेडिकल कैंपों का विस्तार

    सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दे रही है। बाढ़ प्रभावित 2303 गांवों में मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। इनमें 596 गांवों में पहले से मौजूद आम आदमी क्लिनिक में कैंप लगेंगे और बाकी 1707 गांवों में स्कूल, धर्मशाला, आंगनवाड़ी या पंचायत भवन में कैंप आयोजित किए जाएंगे। हर कैंप में डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और दवाइयां मौजूद रहेंगी। इसके अलावा, 550 एम्बुलेंस भी तैनात की गई हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल इलाज उपलब्ध हो सके।

    पशुधन की सुरक्षा और किसान सहायता

    मान सरकार ने बाढ़ से प्रभावित 2.5 लाख पशुओं की सुरक्षा के लिए भी पहल की है। 713 गांवों में पशु चिकित्सकों की टीमें पहुंची हैं। खराब चारे को हटाया जा रहा है, किसानों को पोटेशियम परमंगनेट दिया जा रहा है और प्रभावित पशुओं का टीकाकरण 30 सितंबर तक पूरा किया जाएगा। किसानों की सबसे बड़ी चिंता फसल की बिक्री है। इस बार सरकार ने फसल की खरीद जल्दी शुरू करने का फैसला किया है। 16 सितंबर से मंडियों में खरीद शुरू होगी और 19 सितंबर तक सभी मंडियां तैयार होंगी।

    जनता और सरकार का संकल्प

    मान सरकार का कहना है कि यह सिर्फ राहत कार्य नहीं बल्कि पंजाब को फिर से मजबूत बनाने का संकल्प है। सरकार ने जनता से भी अपील की है कि एनजीओ, युवा क्लब और सामाजिक कल्याण संगठन इस कार्य में सहयोग करें। हर संकट में पंजाब ने साथ लड़ाई लड़ी है और इस बार भी जब सरकार अपने लोगों के साथ खड़ी है, तो हर पंजाबी दिल से कहता है, “ऐ मान सरकार साड़े नाल खड़ी।”

  • हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा… लेकिन गर्भ में बेटियों की हत्या का काला खेल अब भी जारी

    हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा… लेकिन गर्भ में बेटियों की हत्या का काला खेल अब भी जारी

    हरियाणा में लिंगानुपात में 2015 के बाद से अब तक कुछ सुधार हुआ है लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हरियाणा में गर्भ में बेटियों की हत्या बंद हो गई है।हरियाणा के कुछ जगहों पर अभी भी गुपचुप तरीके से ‘गर्भ में बेटी की हत्या’ का काला कारोबार चल रहा है।

    अस्पतालों से लेकर गली-कूचों की दवा दुकानों तक, लिंग परीक्षण और अवैध गर्भपात के फैले जाल को तोड़ने की काेशिश प्रदेश सरकार लगातार कर रही है। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेज बताते हैं कि इस साल जनवरी से अब तक 120 से ज्यादा मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें डॉक्टर, दलाल और दवा आपूर्तिकर्ता सभी शामिल हैं।

    अप्रैल में रोहतक जिले में पुलिस ने एक नर्स को गिरफ्तार किया। उसके पास से एमटीपी किट, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट और 12 महिलाओं के मेडिकल रिकॉर्ड मिले। इनमें से सात महिलाएं पहले से एक या दो बेटियों की मां थीं। यह मामला सरकारी फाइलों में ‘उच्च प्राथमिकता’ के तौर पर दर्ज हुआ और अब ट्रायल शुरू हो चुका है।

    हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा… लेकिन गर्भ में बेटियों की हत्या का काला खेल अब भी जारी

    स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने चंडीगढ़ में राज्य टास्क फोर्स की बैठक में साफ कहा, ‘अब केवल छापेमारी से काम नहीं चलेगा, पूरे नेटवर्क को तोड़ो।’ इसमें उन डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है, जो दोषी पाए जाएंगे। 120 में से 39 केस अदालत में पहुंच चुके हैं, 47 की जांच जारी है। बाकी मामलों में सबूत जुटाए जा रहे हैं।

    सुधीर राजपाल ने निर्देश दिया कि सभी सीएमओ पुलिस के साथ तालमेल बढ़ाएं और केस को दोषसिद्धि तक पहुंचाएं। ज्यादातर मामले शहरी और अर्द्ध-शहरी इलाकों में पकड़े गए हैं, जहां निजी अल्ट्रासाउंड सेंटर और क्लीनिक की भरमार है। यहां दलाल गर्भवती महिलाओं को लालच देकर अवैध परीक्षण और गर्भपात की ओर धकेलते हैं।

    महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान के विज्ञापन अब सिनेमाघरों में चल रहे हैं। साथ ही, एक डिजिटल डैशबोर्ड तैयार हो रहा है, जो राज्यभर में चल रही जागरूकता गतिविधियों की लाइव मॉनिटरिंग करेगा।

    2015 के बाद हरियाणा के लिंगानुपात में सुधार हुआ है, लेकिन अधिकारी मानते हैं कि काला कारोबार अब भी खत्म नहीं हुआ। सबसे मुश्किल हिस्सा है, इस गुप्त नेटवर्क के हर खिलाड़ी तक पहुंचना, जो कानून और समाज दोनों के खिलाफ खेल खेल रहा है। सुधीर राजपाल ने कहा कि यह सिर्फ कानून का मामला नहीं, यह समाज की आत्मा से जुड़ा सवाल है।

  • यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    यमुनानगर के प्राइवेट अस्पतालों के डॉक्टरों ने शुक्रवार को प्रशासन के खिलाफ जोरदार विरोध जताते हुए 12 घंटे की हड़ताल की। यह हड़ताल उस घटना के विरोध में की गई जिसमें आरोप है कि आयुष्मान कार्ड के मरीजों की जांच के लिए आए रेड टीम के डॉक्टरों ने एक महिला डॉक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया।

    काले बैंड पहनकर जताया विरोध

    घटना से गुस्साए प्राइवेट अस्पताल संचालक और डॉक्टर काले बैंड पहनकर जिला सचिवालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की अनदेखी और टीम के डॉक्टरों के असभ्य व्यवहार के कारण स्वास्थ्य सेवा बाधित हो रही है।

    यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों का हंगामा, 12 घंटे की हड़ताल में जताया विरोध

    डॉ. प्रियांका गर्ग ने किया खुलासा

    डॉ. प्रियांका गर्ग ने बताया कि जब रेड टीम के डॉक्टर उनके अस्पताल में पहुंचे, तो उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं डॉक्टर हूँ। जब मैंने जवाब दिया, तो उन्होंने मुझे अपने कमरे से जाने के लिए कहा। उन्होंने सवाल उठाया कि एक अस्पताल संचालक को इस तरह क्यों बाहर भेजा गया।

    आयुष्मान कार्ड वालों के मरीजों को गलत मार्गदर्शन

    डॉ. प्रियांका ने यह भी आरोप लगाया कि उनके अस्पताल ने भारतीय मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों का इलाज नहीं किया। बावजूद इसके, मरीजों ने अपने स्वीकृति पत्र के साथ इलाज कराया। उन्हें गलत जानकारी दी गई और मरीजों को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।

    अस्पताल और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा

    इस घटना ने यमुनानगर में प्राइवेट अस्पताल और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ा दिया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि अगर ऐसे व्यवहार को रोका नहीं गया, तो वे और बड़े पैमाने पर विरोध करेंगे। प्रशासन ने मामले की जांच का आश्वासन दिया है।