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  • Haryana News: खट्टर का गन्नौर MLA पर बड़ा खुलासा टिकट कटने पर कादियान ने धन्यवाद किया और रोकर छोड़ी भाजपा

    Haryana News: खट्टर का गन्नौर MLA पर बड़ा खुलासा टिकट कटने पर कादियान ने धन्यवाद किया और रोकर छोड़ी भाजपा

    Haryana News: हरियाणा के पूर्व सीएम एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर अपनी बात को सीधे सपाट रखने के लिए जाने जाते हैं। जो उनके दिल में होता है वहीं उनकी जुबान पर भी होता है। खट्टर ने विधानसभा चुनाव के 11 महीने बाद गन्नौर हलके से टिकट का राज खोला है। बोले- जिन दिनों टिकटों के निर्णय हो रहे थे, किसकी क्या राय थी? यह अंदर की बात तो बताना ठीक नहीं, लेकिन देवेंद्र कादियान को भाजपा का टिकट नहीं दे पाए। इनका मुझे फोन आया। मुझे लगा, उल्टा-सीधा बोलेगा, लेकिन इन्होंने कहा-धन्यवाद। मैंने कहा टिकट तो तुझे मिली तो नहीं धन्यवाद किस बात का। इस पर कादियान ने कहा, नहीं इसमें न आपका कसूर है, न मेरा कसूर है या न किसी और का कसूर है। ये तो किस्मत का ताना-बाना ही ऐसा है। शायद किस्मत में ही लिखा है कि मैं भाजपा की बजाय निर्दलीय खड़ा होकर लड़ जाऊं, लेकिन विश्वास दिलाता हूं कि जनता का प्यार अगर मिल गया तो मैं भाजपा से दूर नहीं जाऊंगा।

    देवेंद्र कादियान को खट्टर का करीबी माना जाता था, और आज भी वह खट्टर के करीबी हैं। ऐसे में उम्मीद थी कि खट्टर उन्हें भाजपा का टिकट दिलाएंगे। खट्टर शनिवार को गन्नौर के निर्दलीय विधायक देवेंद्र कादियान की ओर से आयोजित सातवें युवा सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि थे। विधायक की ओर से युवाओं को स्कूटी व साइकिलें वितरित की गईं।

    Haryana News: खट्टर का गन्नौर MLA पर बड़ा खुलासा टिकट कटने पर कादियान ने धन्यवाद किया और रोकर छोड़ी भाजपा

    देवेंद्र कादयान ने टिकट नहीं मिलने के बाद फेसबुक पर लाइव आकर कहा था कि मेरे से काम करवाया, मजदूरी नहीं दी। अक्टूबर 2024 में भाजपा की लिस्ट में नाम न आने पर देवेंद्र कादियान फेसबुक पर लाइव हुए थे। उन्होंने कहा था-पार्टी ने मेरे से काम करवाया, लेकिन मजदूरी नहीं दी। ये गलत बात है। मेरे बीमार पिता अस्पताल में हाथ में टीवी का रिमोट लेकर लेटे रहे कि बेटे की टिकट एनाउंस होगी। बच्चे होस्टल से फोन करके पूछ रहे हैं कि पापा आपको टिकट मिली। मैं साल 2019 से तैयारी कर रहा था। इसलिए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आया था। आज पार्टी छोड़ रहा हूं। यह कहते हुए कादियान रोने लगे थे।

    देवेंद्र कादियान ने निर्दलीय पर्चा भरा। वह मंचों पर फूट-फूटकर रोए। बोले-मेरे साथ धोखा हुआ है। इससे सहानुभूति लहर उनके पक्ष में बनती रही और आखिर में करीब 35 हजार से ज्यादा वोट से चुनाव जीत गए थे। कादियान को जहां 77 हजार से ज्यादा वोट मिले थे, कांग्रेस के कुलदीप शर्मा को 42000 वोट मिले थे।भाजपा प्रत्याशी को सिर्फ 17,605 वोट मिले थे।

    भाजपा को हालांकि अपने बूते 48 सीटें मिलने से पूर्ण बहुमत मिल गया था। नतीजे आने के बाद सबसे पहले गन्नौर से निर्दलीय जीते देवेंद्र कादियान ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी।

    केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने इस बात को स्वीकार किया कि टिकट न मिलने के कारण उस वक्त उत्पन्न हुए ‘ताजा घटनाक्रम’ की वजह से ही सम्मान समारोह के आयोजन में देरी हुई थी। यह असल में सातवां नहीं बल्कि छठा व सातवां संयुक्त कार्यक्रम है। देवेंद्र कादियान ने उन्हें एक साल पहले से बुलाना शुरू कर दिया था कि छठा सम्मान समारोह कर लिया जाए।विधानसभा चुनाव के बाद एक ऐसा ‘मोड़’ आ गया था, जिसमें देवेंद्र सीधे चलने की बजाय एक मोड़ पर चले गए थे। उस वक्त ताजा-ताजा घटनाक्रम था। अगर मैं तुरंत छठे सम्मान समारोह में चला आता तो इसके संदेश पता नहीं कौन क्या लेकर जाता? देवेंद्र कादियान ने संकल्प लिया हुआ था कि आपके (खट्टर) आने के बाद ही कार्यक्रम किया जाएगा, अन्यथा कार्यक्रम नहीं होगा।

    मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि मुझे कोई अंतर नहीं लगता है कि देवेंद्र निर्दलीय या भारतीय जनता पार्टी से चुने गए हैं। खट्टर ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि कभी-कभी जब देवेंद्र कादियान के दिनों को याद करता हूं तो मैं भी अपनी यौवन अवस्था में चला जाता हूं। देवेंद्र ने अपने जीवन की शुरुआत सब्जी बेचकर की है और साल 1968 में उन्होंने (मनोहर लाल) भी सब्जी बेचकर शुरुआत की थी।

  • Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    Fake sign scam: लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव वह प्रक्रिया है, जो पारदर्शिता और ईमानदारी पर आधारित मानी जाती है। लेकिन हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव के नामांकन में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया जिसने देश को हैरान कर दिया। केरल के रहने वाले जैकब जोसेफ नामक व्यक्ति ने अपनी उम्मीदवारी दाखिल करते समय 22 सांसदों को प्रस्तावक और 22 सांसदों को अनुमोदक दिखाकर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। यानी कुल 44 सांसदों के नाम और हस्ताक्षर जाली साबित हुए। इस घटना ने पूरे चुनावी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    कैसे पकड़ा गया मामला?

    उपराष्ट्रपति चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया के तहत किसी भी उम्मीदवार के लिए यह जरूरी होता है कि उसके पास कम से कम 20 सांसदों का समर्थन (प्रपोजर) और उतने ही सांसदों का अनुमोदन (सेकेंडर) होना चाहिए। यही शर्त उम्मीदवार की वैधता को सुनिश्चित करती है।

    जैकब जोसेफ ने भी इस नियम का पालन करने का दिखावा किया और 22-22 सांसदों के हस्ताक्षर अपने नामांकन पत्र में जोड़ दिए। लेकिन गड़बड़ी तब सामने आई जब नामांकन पत्र में वाईएसआरसीपी के सांसद मिथुन रेड्डी का हस्ताक्षर मिला। जांच में पता चला कि रेड्डी इस समय जेल में हैं और उन्होंने किसी भी नामांकन पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसी बिंदु से संदेह गहराया और निर्वाचन आयोग ने मामले की गहन जांच शुरू की।

    जांच में खुला फर्जीवाड़ा

    22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच की गई। जैसे-जैसे छानबीन आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस फर्जीवाड़े का राज खुलता गया। कई सांसदों से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में न तो हस्ताक्षर किए हैं और न ही इस प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। इससे साफ हो गया कि जैकब जोसेफ ने पूरे मामले में धोखाधड़ी की है।

    चुनाव आयोग ने नामांकन की जांच के दौरान पाया कि इस बार कुल 46 उम्मीदवारों ने मिलकर 68 नामांकन दाखिल किए थे। पहले चरण में ही 28 नामांकन रद्द कर दिए गए। आगे की छानबीन के बाद सिर्फ दो नाम – सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुधर्शन रेड्डी – ही वैध पाए गए। दोनों ने चार-चार पर्चे दाखिल किए थे, जो जांच में सही साबित हुए।

    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश
    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    क्यों उठाए सवाल?

    जैकब जोसेफ का नामांकन अब चुनाव से बाहर कर दिया गया है, लेकिन इसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक व्यक्ति इतनी बड़ी हिम्मत कैसे कर सकता है कि वह सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर कर दे और चुनाव प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश करे? यह घटना केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ सीधी छेड़छाड़ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फ्रॉड और फर्जीवाड़े की श्रेणी में आता है और इसके कानूनी नतीजे गंभीर हो सकते हैं। यह मामला संसद के गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। सवाल यह भी उठता है कि इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद कोई शख्स कैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर सकता है।

    निर्वाचन आयोग की सख्ती

    निर्वाचन आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और नामांकन से जुड़े सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित कर लिया है। उम्मीद है कि इस मामले पर आगे चलकर आधिकारिक जांच बैठाई जाएगी और जैकब जोसेफ से पूछताछ भी होगी। चुनाव अधिकारियों ने साफ कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं बल्कि लोकतंत्र की साख पर भी चोट पहुंचाती हैं।

    लोकतंत्र पर सवाल

    यह घटना यह दर्शाती है कि कुछ लोग लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रियाओं में भी शॉर्टकट तलाशने से बाज नहीं आते। उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के चुनाव में अगर फर्जी हस्ताक्षर जैसे मामले सामने आते हैं तो यह बेहद चिंताजनक है। हालांकि राहत की बात यह रही कि जांच प्रक्रिया ने इस गड़बड़ी को समय रहते पकड़ लिया, वरना चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता था।

    जैकब जोसेफ का नामांकन खारिज कर दिया गया है, लेकिन यह घटना आने वाले समय में चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नए मानक तय कर सकती है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और दोषी को किस तरह की सजा मिलती है। लेकिन इतना तय है कि यह प्रकरण लोकतंत्र की मजबूती के बजाय उसकी कमजोर कड़ी को उजागर कर गया है।

  • फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और साजिश के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री नायब सैनी को भेजी गई शिकायत के बाद की गई। शिकायत में कहा गया कि काजल देशवाल ने वार्ड-13 से चुनाव लड़ने के लिए बीसी-ए जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनाया था।

    BJP नेता की शिकायत पर जांच शुरू

    BJP नेता प्रदीप कुमार शर्मा ने शिकायत की थी कि काजल देशवाल ने वार्ड-13 से चुनाव जीतने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया और ज्योति शर्मा को हटाकर अध्यक्ष बनी। इस वार्ड को पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षित किया गया था। जांच में प्रमाण पत्र फर्जी साबित होने के बाद जून 2025 में उन्हें पद से हटाया गया।

    फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर बड़ी कार्रवाई! पानीपत जिला परिषद की पूर्व अध्यक्ष काजल देशवाल पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज

    जांच अधिकारियों ने दी जानकारी

    ADC पंकज यादव ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ACS से पत्र मिला जिसमें काजल की जाति पर संदेह जताया गया। इसके बाद DC ने जांच अधिकारी नियुक्त किया और DM से रिकॉर्ड प्राप्त कर पूरी रिपोर्ट ACS को सौंपी। DSP सतीश वत्स ने बताया कि मामले की जांच पहले से चल रही थी और अब आरोप साबित होने के बाद FIR दर्ज की गई है।

    अध्यक्ष पद पर अस्थिरता

    पिछले तीन सालों में पानीपत जिला परिषद के अध्यक्ष पद पर दो बार बदलाव हुआ। पहली बार ज्योति शर्मा को BJP के समर्थन से अध्यक्ष बनाया गया था। लेकिन विरोध शुरू होने के बाद उन्हें मार्च 2024 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद जून 2024 में काजल देशवाल ने अध्यक्ष पद संभाला। हालांकि, उनका पद एक साल बाद फर्जी जाति प्रमाण पत्र साबित होने पर खाली हो गया।

    BJP सदस्य बनने के बाद विवाद

    काजल देशवाल ने अध्यक्ष बनने के बाद BJP का दामन थामा और राज्य अध्यक्ष मोहन लाल बरोली के निर्देशों पर काम करने की बात कही। उनके फर्जी प्रमाण पत्र का खुलासा होने के बाद अब अध्यक्ष पद रिक्त है और जिला परिषद में राजनीतिक हलचल जारी है।

  • रेवाड़ी जिला परिषद, पंचायत समिति रेवाड़ी व डहीना के प्रधान व उपप्रधान का आज हुआ चयन

    रेवाड़ी जिला परिषद, पंचायत समिति रेवाड़ी व डहीना के प्रधान व उपप्रधान का आज हुआ चयन

    हरियाणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जारी निर्देशानुसार जिला परिषद के प्रधान व उपप्रधान पद का चुनाव कराने के लिए सदन की पहली बैठक जिला निर्वाचन अधिकारी (पं.) एवं डीसी अशोक कुमार गर्ग के मार्गदर्शन में शुक्रवार को लघु सचिवालय स्थित सभागार में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता एडीसी स्वप्निल रविंद्र पाटिल ने की। बैठक में जिला परिषद प्रधान व उपप्रधान पद का चुनाव निर्विरोध संपन्न हुआ।

    लघु सचिवालय में हुआ जिप प्रधान व उप प्रधान का चयन : एडीसी
    लघु सचिवालय परिसर में आयोजित जिला परिषद की पहली बैठक में एडीसी स्वप्रिल रविंद्र पाटिल ने जिला परिषद के वार्ड 14 से निर्वाचित पार्षद मनोज कुमार को प्रधान तथा वार्ड 18 से निर्वाचित पार्षद नीलम यादव को उप प्रधान घोषित किया। बैठक के उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए एडीसी पाटिल ने बताया कि शुक्रवार को जिला परिषद के प्रधान व उप प्रधान पद का चयन किया गया है जिसमें निर्धारित समय पर जिला परिषद के 14 पार्षद उपस्थित हुए।

    बैठक मे प्रधान व उप प्रधान पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू की गई जिसमे प्रधान व उप प्रधान पद के लिए एक-एक नामांकन दाखिल हुआ और निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के दौरान अन्य कोई दूसरा नामांकन दाखिल न होने की स्थिति में निर्वाचन आयोग की हिदायतों के अनुरूप आए हुए नामांकन में से ही प्रधान व उप प्रधान पद पर आवेदक मनोज कुमार व नीलम यादव को उक्त पदों के लिए निर्वाचित घोषित किया गया।

    एडीसी ने नवनिर्वाचित प्रधान मनोज कुमार व उप प्रधान नीलम यादव को निर्वाचन सर्टिफिकेट के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भागीदार बनने की अपील के साथ पौधा वितरित कर उन्हें अपने कार्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता व कर्तव्यनिष्ठां से करने का आह्वान करते हुए शुभकामनाएं दी। बैठक में डीडीपीओ एचपी बंसल सहित अन्य संबंधित अधिकारीगण मौजूद रहे।

    रेवाड़ी पंचायत समिति की प्रधान बनी ममता, उप प्रधान बने प्रदीप : एसडीएम

    शहर के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में पंचायत समिति रेवाड़ी के प्रधान व उप प्रधान पद के चुनाव को लेकर पहली बैठक एसडीएम रेवाड़ी होशियार सिंह की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पंचायत समिति रेवाड़ी से वार्ड नंबर 19 से जाडरा गांव निवासी पार्षद ममता का चुनाव प्रधान पद तथा वार्ड नंबर 8 से बाम्बड़ गांव निवासी पार्षद प्रदीप का चुनाव उप-प्रधान पद के लिए किया गया। गौरतलब है कि पंचायत समिति रेवाड़ी के प्रधान पद की सीट महिला के लिए आरक्षित है।

    डहीना पंचायत समिति-प्रधान बने कर्णपाल, उप प्रधान बनी विजय कुमारी : तहसीलदार

    डहीना पंचायत समिति की पहली बैठक तहसीलदार प्रदीप देशवाल की अध्यक्षता में हुई। बैठक में पंचायत समिति वार्ड 5 से पार्षद कर्णपाल को प्रधान व वार्ड 14 से पार्षद विजय कुमारी को उप प्रधान घोषित किया गया।

  • जिला परिषद चुनाव परिणाम: देखें रेवाड़ी जिला परिषद चुनाव परिणाम,किस उम्मीदवार की चमकी किस्मत

    जिला परिषद चुनाव परिणाम: देखें रेवाड़ी जिला परिषद चुनाव परिणाम,किस उम्मीदवार की चमकी किस्मत

    रेवाड़ी जिले के आज जिला परिषद के परिणाम आज आ चुके है.रेवाड़ी जिले मे 18 जिला परिषद और 143 ब्लॉक समिति के लिए मतगणना आज की गई है. जिला में कुल 5 लाख 61 हजार मतदाताओं में से 4 लाख 67 हजार वोट पॉल हुई थी. रेवाड़ी में 7 ब्लॉक है .जिसमें से 5 ब्लॉक के सेक्टर गर्ल्स कॉलेज और दो ब्लॉक की मतगणना जैन स्कूल रेवाड़ी में की गई है. मतगणना को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.

    रेवाड़ी – जिला परिषद चुनाव परिणाम

    वार्ड 1 – विनोद कुमार

    वार्ड 2 – शारदा यादव

    वार्ड 3 जीवन हितेषी

    वार्ड 4 नीरज कुमार

    वार्ड 5 सुनीता

    वार्ड 6 सुरेंद्र कुमार

    वार्ड 7 मीनाक्षी

    वार्ड 8 जयसिंह

    वार्ड 9 लक्ष्मी देवी

    वार्ड 10 सरोज मेहरा

    वार्ड 11 मनीराम

    वार्ड 12 सुनीता

    वार्ड 13 निरंजन

    वार्ड 14 मनोज

    वार्ड 15 रेखा

    वार्ड 16 मीना

    वार्ड 17 महेद्र सिंह

    वार्ड 18 नीलम

    वार्ड 14 पर बना रहा था संशय , पहले सजन को जीता बताया फिर मनोज जीते।

     

     

  • भारत निर्वाचन आयोग ने सीधा संवाद व संचार स्थापित करने के लिए लांच की बीएलओ ई -पत्रिका

    भारत निर्वाचन आयोग ने सीधा संवाद व संचार स्थापित करने के लिए लांच की बीएलओ ई -पत्रिका

    डीसी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अशोक कुमार गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया कि बीएलओ के कार्य को और अधिक आसान एवं सुविधाजनक बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बीएलओ ई-पत्रिका जारी की गई है। इस पत्रिका में आयोग अपने अनुभव, चुनौतियों को सांझा करते हुए बीएलओ के कर्तव्य और कहानी को प्रकट करेंगे।

    उन्होंने कहा कि बीएलओ हर मतदाता के लिए सूचना का प्राथमिक स्त्रोत है। उनकी सुविधा के लिए बीएलओ ई-पत्रिका की शुरूआत की गई है। इस पत्रिका से बीएलओ को मतदाताओं की सेवाओं के लिए अधिक से अधिक जानकारी मिलेगी और अच्छा मार्गदर्शन मिलेगा। उन्होंने बताया कि ई-पत्रिका आयोग की एक नई पहल है। उन्होंने कहा कि बीएलओ ई-पत्रिका स्वतंत्र, निष्पक्ष व पारदर्शी चुनाव की दिशा में आयोग का सराहनीय कदम है। इससे बीएलओ को तकनीकी जानकारी मिल सकेंगी।

    बीएलओ ई-पत्रिका बीएलओ का करेगी मार्गदर्शन, सभी जानकारियां होंगी शामिल-

    जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि चुनाव आयोग के अनुसार बीएलओ ई-पत्रिका में ईवीएम-वीवीपीएटी जैसे विषय शामिल होंगे। इसमें प्रशिक्षण, आईटी, विशेष सारांश संसोधन, नवीनतम स्वीप, मतदान केन्द्रों पर गतिविधिया, पोस्टर बैल्ट सुविधा, सुगम चुनावी साक्षरता क्लब, अद्वितीय जागरूक मतदाता पहल, राष्टरीय मतदाता दिवस के साथ-साथ बीएलओ के साथ औपचारिक बातचीत भी शामिल होंगी। बीएलओ ई-पत्रिका को *https://ecisveep.nic.in/ebook/BLO-E-Patrika-hindi/index.html* व ईसीआई.जीओवी.इन वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है।

  • नगर निकाय चुनाव: शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान करवाना हम सब की जिम्मेदारीः धनपत सिंह

    नगर निकाय चुनाव: शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान करवाना हम सब की जिम्मेदारीः धनपत सिंह

    धनपत सिंह ने कहा कि 19 जून को 18 नगर परिषद और 28 नगर पालिका के लिए चुनाव होगा। नगर परिषद के लिए कुल 456 वार्ड हैं। इसमें 54 वार्ड एससी, 36 एससी महिलाओं, 123 महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, इसके अतिरिक्त 243 वार्ड अनारक्षित हैं। इसी तरह नगर पालिका में कुल 432 वार्ड हैं, इसमें से 53 एससी, 37 एससी महिलाओं, 116 महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं, शेष बचे 226 वार्ड अनारक्षित हैं। आज नामांकन की आखिरी तारीख है। 6 जून को स्क्रूटनी होगी।

     

    आदर्श आचार संहिता का पालन करें सभी राजनीतिक दल और उम्मीदवार

    धनपत सिंह ने कहा कि चुनाव की घोषणा के दिन से ही प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू है। सभी राजनीतिक दल व उम्मीदवार इसका पालन करें। चुनाव के दौरान कोई भी राजनीतिक दल यदि चुनावी पोस्टर या दीवारों पर रंगाई आदि करवाए तो चुनाव के बाद इसे जरुर साफ करवाए। इसके अतिरिक्त सरकारी संपत्ति पर कोई भी प्रचार सामग्री न लगाई जाए। मतदान के दिन पोलिंग बूथ पर मतदाता को लाने के लिए कोई भी राजनीति दल या उम्मीदवार अपने वाहनों का प्रयोग न करे।

    जाति या धर्म के नाम पर न मांगे वोट

    राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने कहा कि हमारा समाज जाति व धर्म में बंटा हुआ है लेकिन चुनाव के दौरान कोई भी उम्मीदवार या पार्टी जाति या धर्म के नाम पर वोट न मांगे। इसके साथ-साथ उकसावे की राजनीति न करें। उम्मीदवारों पर बिना सुबूत के कोई आरोप-प्रत्यारोप न किया जाए। मतदान से जुड़े अधिकारियों का पूरा सहयोग करें। यदि कोई गड़बड़ी नजर आए तो इसकी शिकायत रिटर्निंग आफिसर को करें। मतदाता को शराब व पैसे के लालच में फंसाने की कोशिश न करें। शांतिपू्र्ण व निष्पक्ष चुनाव करवाने में चुनाव आयोग का सहयोग करें।

     

    चुनाव खर्च पर रहेगी आयोग की नजर

    धनपत सिंह ने कहा कि चुनाव में होने वाले खर्च पर आयोग की पूरी नजर रहेगी। चुनाव खत्म होने के 30 दिन के अंदर-अंदर प्रत्येक उम्मीदवार को अपना चुनावी खर्च का ब्यौरा जिला उपायुक्त कार्यालय में जमा करवाना होगा। ऐसा न करने वाले उम्मीदवारों को आगामी 5 वर्ष के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव खर्च की राशि में भी इजाफा किया है।

     

    पहले नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में 10 लाख की राशि खर्च करने की अनुमति थी, इसे अब बढ़ाकर 10 लाख 50 हजार रुपये कर दिया है। इसी तरह नगर पालिका सदस्य के लिए 2 लाख 25 हजार रुपये की राशि को बढ़ाकर 2 लाख 50 हजार रुपये कर दिया है। इसी तरह नगर परिषद के अध्यक्ष पद के लिए खर्च की राशि 15 लाख को बढ़ाकर 16 लाख रुपये कर दिया गया है। वहीं नगर परिषद के सदस्य की खर्च राशि 3 लाख 30 हजार को बढ़ाकर साढ़े तीन लाख रुपये कर दिया गया है।

     

    साफ छवि के उम्मीदवारों को मिले जगह

    धनपत सिंह ने कहा कि चुनाव में साफ छवि के उम्मीदवारों को जगह मिलनी चाहिए। जिन उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वे कम से कम दो अखबारों में इस संबंध में जरुर प्रकाशित करें और इसकी जानकारी संबंधित जिला उपायुक्त को दें। उन्होंने कहा कि चुनाव के दिन पोलिंग बूथ पर पार्टियों या उम्मीदवारों द्वारा लगाया जाने वाला पोलिंग एजेंट उसी वार्ड का होना चाहिए।

     

    ईवीएम से नहीं हो सकती कोई छेड़छाड़

    धनपत सिंह ने अपनी मौजूदगी में राजनीतिक दलों के सामने ईवीएम की प्रेजेंटेशन दिलवाई। इसके बाद उन्होंने कहा कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है।

     

    समय पर रिपोर्ट पूरी करें इलेक्शन ऑब्जर्वर

    धनपत सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण चुनाव आयोजित करवाने के लिए आयोग ने आईएएस, आईपीएस और आबकारी और कराधान आयुक्तों को बतौर इलेक्शन ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। इसमें जरनल इलेक्शन ऑब्जर्वर के तौर पर 25 आईएएस, पुलिस इलेक्शन ऑब्जर्वर के तौर पर 21 आईपीएस और चुनावी खर्च देखने वाले इलेक्शन ऑब्जर्वर के तौर पर 21 आबकारी और कराधान आयुक्तों को नियुक्त किया है।

     

    धनपत सिंह ने इन्हीं के साथ बैठक की और उन्हें चुनाव के संबंध में दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सभी इलेक्शन ऑब्जर्वर उम्मीदवारों व चुनाव से जुड़ी अलग-अलग रिपोर्ट को सहीं समय पर पूरा करें। पुलिस अधिकारी शांतिपूर्ण चुनाव करवाने के लिए सभी पोलिंग बूथ पर पैनी नजर बनाकर रखें। जहां भी किसी तरह की गड़बड़ी की सूचना मिले, तत्काल चुनाव आयोग को सूचित करें और आरोपियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करें।

     

     

  • नगर परिषद चुनाव के लिए चार जून तक दाखिल होंगे नामांकन

    नगर परिषद चुनाव के लिए चार जून तक दाखिल होंगे नामांकन

    डीसी गर्ग ने कहा कि बावल में निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम बावल संजीव कुमार की देखरेख में नगरपालिका चुनाव प्रक्रिया सम्पन्न होगी। उन्होंने कहा कि निर्वाचन अधिकारी द्वारा नामांकन कक्ष, हेल्प डेस्क व अन्य इंतजामों को किया गया है। डीसी ने हेल्प डेस्क पर मौजूद कर्मचारियों से नामांकन से जुड़े दस्तावेजों के बारे में निर्देश दिए हैं कि कोई उम्मीदवार या प्रतिनिधि पूछताछ के लिए आए तो उसे सभी आवश्यक दस्तावेजों के बारे में उपयुक्त जानकारी दी जाए, साथ ही मांगने पर नामांकन प्रपत्र व चेक लिस्ट उपलब्ध कराई जाए।

     

    3 4 को कर सकते हैं नामांकन: एसडीएम
    नगर पालिका बावल आम चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी एवं एसडीएम संजीव कुमार ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग व डीसी के दिशा निर्देशों अनुरूप नामांकन प्रक्रिया को लेकर सभी इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने बताया कि नामांकन पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया 30 मई से आरंभ हो चुकी है जोकि आगामी चार जून 2022 तक चलेगी।

    उन्होंने बताया कि तीन व चार जून को निर्धारित समय प्रात:11 बजे से तीन बजे तक नामांकन दाखिल किए जा सकेंगे। छह जून को नामांकन पत्रों की जांच पड़ताल होगी और नामांकन वापिस लेने का समय सात जून 2022 को सुबह 11 बजे से दोपहर बाद तीन बजे निर्धारित किया गया है। सात जून 2022 को दोपहर बाद तीन बजे चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों को चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाएगा। जिसके बाद आगामी 19 जून को मतदान करवाया जाएगा और 22 जून को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

  • The States Braces for Protests Over New COVID Rules

    The States Braces for Protests Over New COVID Rules

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    Good design is making something intelligible and memorable. Great design is making something memorable and meaningful.

    Dieter Rams

    Most users search for something interesting (or useful) and clickable; as soon as some promising candidates are found, users click. If the new page doesn’t meet users’ expectations, the back button.

    A good website should be easy to navigate

    Not all websites are made equal. Some websites are simple, logical, and easy to use. Others are a messy hodgepodge of pages and links.

    How are innovations in robotics changing the way we perceive the world?

    Without website navigation, your visitors can’t figure out how to find your blog, your email signup page, your product listings, pricing, contact information, or help docs.

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    Quick and easy access to the content they’re after is more important for your website users than a… visually-stunning design.

    Bad navigation is an especially common problem. We’ve all struggled to find things on disorganized websites without any logical structure. It feels hopeless.

    Using “complex large pictures”. Because a carousel generally carries a lot of picture messages, complex large pictures result in low performance and “slow loading rate” of the sites, especially.

    Creating visual rhythms in your layouts

    In design, rhythm is created by simply repeating elements in predictable patterns. This repetition is a natural thing that occurs everywhere in our world. As people, we are driven everyday.

    Why does Bluetooth use lossy rather than lossless compression

    One of the best ways to use repetition and rhythm in web design is in the site’s navigation menu. A consistent, easy-to-follow pattern—in color, layout, etc. Gives users an intuitive .

    Elements that can help website visual composition

    Nobody enjoys looking at an ugly web page. Garish colors, cluttered images and distracting animation can all turn customers “off” and send them shopping “somewhere else”. Basic composition rules to create more effective:

    • Direct the Eye With Leading Lines
    • Balance Out Your Elements
    • Use Elements That Complement Each Other
    • Be clear about your “focal points” and where you place them

    Diving into UX and UI design

    UX and UI: Two terms that are often used interchangeably, but actually mean very different things. So what exactly is the difference?

    Styles come and go. Good design is a language, not a style.

    Massimo Vignelli

    UX design refers to the term “user experience design”, while UI stands for “user interface design. Both elements are crucial to a product and work closely together. But despite their relationship, the roles themselves are quite different.

    Ensure that interactive elements are easy to identify

    Good design guides the user by communicating purpose and priority. For that reason, every part of the design should be based on an informed decision” rather than an arbitrary result of personal taste or the current trend.

    Breaking down the barriers

    Design is not the end-all solution to all of the worlds problems — but with the right thinking and application, it can definitely be a good beginning to start tackling them.