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  • हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना  ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    हरियाणा की महत्वाकांक्षी ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना को प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वरूप देने और इसका बिहार से पंजाब तक राजनीतिक लाभ लेने की तैयारी शुरू कर दी है। अब यह योजना भाजपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। मुख्यमंत्री नायब सैनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर इस योजना की पहली किस्त उनके हाथों से दिलाने का अनुरोध करेंगे। भाजपा की मंशा साफ है कि इस योजना को हरियाणा तक सीमित न रखकर बिहार और पंजाब जैसे राज्यों जहां निकट भविष्य में चुनाव होने वाले हैं, वहां इसको प्रचारित कर इसका राजनीतिक लाभ लेना भी है।

    हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आज पंचकूला में राज्य स्तरीय समारोह में लाडो लक्ष्मी योजना का रजिस्ट्रेशन ऐप लॉन्च कर दिया। इस दिन सभी जिलों में मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के जरिए भी यही ऐप लॉन्च कराया गया। ताकि इसे एक बड़े सामूहिक कार्यक्रम का रूप दिया जा सके। सरकार ने इस लॉन्च को लेकर इतनी गंभीरता दिखाई है कि 22 और 23 सितंबर की सार्वजनिक छुट्टियों के बावजूद समाज कल्याण, स्वास्थ्य और नागरिक संसाधन सूचना विभाग के अफसरों की ड्यूटी लगी रही। पोर्टल का काम पूरा हो चुका है और लॉन्चिंग से पहले हर स्तर पर इसकी टेस्टिंग करवाई गई है।

    हरियाणा की योजना के सहारे भाजपा की पंजाब और बिहार की चुनाव वैतरणी पार करने की योजना  ‘दीनदयाल लाडो लक्ष्मी’ योजना लांच

    भाजपा सूत्रों का कहना है कि पहले सरकार इसे एक साथ एक लाख 80 हजार रुपए तक की पारिवारिक आय वाली महिलाओं के लिए लागू करने वाली थी लेकिन इसमें दिक्कत आ सकती थी इसलिए सरकार ने इसे तीन चरणों में लागू करने का फैसला किया है। पहले चरण में यह योजना एक लाख रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए है और दूसरे चरण में यह योजना एक लाख 80 हजार रुपए वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए आ जाएगी। इसके बाद 3 लाख रुपए सालाना आय वाले परिवार भी इसमें शामिल होंगे। पहले चरण में यह योजना 20 लाख महिलाओं को लाभान्वित करेगी लेकिन जब इसके तीनों चरण पूरे हो जाएंगे तो इसे 50 लाख महिलाओं को लाभ मिलने लगेगा।

    मुख्यमंत्री नायब सैनी के लिए यह योजना उनकी राजनीतिक साख से भी जुड़ी हुई है। भाजपा नेतृत्व उन्हें एक जनहितकारी और ठोस फैसले लेने वाले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट करना चाहता है। यही वजह है कि सैनी खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं कर रहे। इस योजना के साथ ही हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी देवीलाल और बंसीलाल की श्रेणी में आकर खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि अगर यह योजना बिना अड़चनों के लागू हो जाती है तो सैनी न सिर्फ राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय नेतृत्व की नजरों में भी भरोसेमंद चेहरे के रूप में उभरेंगे।

    बता दें कि 2024 विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने महिलाओं को 2100 रुपए प्रति माह देने का वादा किया था। बजट में इस मद के लिए 5000 करोड़ रुपए का प्रावधान भी कर दिया गया था। सरकार ने इस योजना को ऐसे हिसाब से जारी किया है कि जो सरकार ने अपने बजट में 5000 करोड रुपए का प्रावधान किया है फिलहाल उसे 5000 करोड रुपए में काम चल जाएगा। नए बजट में इसकी राशि बढ़ाकर सिर्फ 8000 करोड़ से 10 हजार करोड़ रुपए किए जाने का प्रावधान की बात सामने आ रही है।

    अब सरकार ने नई सरकार की गठन के 1 साल पूरा होने से पहले ही इस योजना की शुरुआत कर जनता के बीच यह संदेश देना चाहा है कि भाजपा अपने वादों को निभाती है। माना जा रहा है कि यह कदम विपक्ष की उस आलोचना को कमजोर कर देगा जिसमें सरकार पर चुनावी घोषणाएं भूल जाने का आरोप लगाया जाता रहा है।

    बिहार में इसी साल और पंजाब में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और भाजपा हरियाणा की इस योजना को पंजाब और बिहार में प्रचारित करने का काम करेगी ताकि उसे इन राज्यों में राजनीतिक लाभ मिल सके और वहां की महिलाओं को पार्टी के साथ जोड़ना आसान हो सके।

    21 लाख महिलाओं तक पहुंचेगा लाभ

    योजना के पहले फेज में राज्य की करीब 21 लाख महिलाओं को शामिल किया गया है। इनमें उन परिवारों की महिलाएं हैं जिनकी सालाना आय एक लाख रुपए से कम है। 23 से 45 साल की 2 लाख 82 हजार 635 अविवाहित महिलाएं हैं, जो इसमें कवर होंगी। इसी तरह 18 लाख 16 हजार 621 विवाहित लाभार्थी महिलाएं हैं, जिनकी उम्र 23 से 60 साल है। 60 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद वृद्धावस्था पेंशन का लाभ आटोमेटिक तरीके से मिलना शुरू हो जाएगा। इस योजना में आने वाली महिलाओं को इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि 2 महीने में कम से कम एक बार वह अपने इस पैसे को निकाल लें। यह पैसा नहीं निकाले जाने की सूरत में यह राशि बंद हो जाएगी।

  • कांग्रेस नेता राहुल गांधी और Gen Z पोस्ट ने राजनीति का बढ़ाया तापमान, BJP ने राहुल गांधी को बताया देश विरोधी

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी और Gen Z पोस्ट ने राजनीति का बढ़ाया तापमान, BJP ने राहुल गांधी को बताया देश विरोधी

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी के Gen Z प्लान ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि देश के युवा, छात्र और Gen Z संविधान की रक्षा करेंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे। उन्होंने लिखा कि वे इस प्रयास में युवाओं के साथ खड़े हैं। साथ ही उन्होंने एक फोटो पोस्ट करते हुए कहा कि लोकतंत्र कभी मिटाया नहीं जा सकता।

    बीजेपी का तीखा आरोप

    राहुल गांधी के इस पोस्ट ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया। भाजपा ने कहा कि राहुल गांधी का मकसद देश में अराजकता फैलाना है। कांग्रेस चाहती है कि भारत में वही स्थिति बने जो श्रीलंका और बांग्लादेश में हुई। भाजपा ने राहुल गांधी के Gen Z प्लान को नेपाल की Gen Z क्रांति से जोड़ा। नेपाल में हाल ही में युवा और छात्र सड़कों पर उतर आए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने संसद और सुप्रीम कोर्ट की इमारतें जलाई, मंत्रियों और राष्ट्रपति के आवासों पर हमला किया। भाजपा अब पूछ रही है कि क्या राहुल गांधी भारत को नेपाल जैसा बनाना चाहते हैं।

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी और Gen Z पोस्ट ने राजनीति का बढ़ाया तापमान, BJP ने राहुल गांधी को बताया देश विरोधी

    प्रदीप भंडारी का बयान

    भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी को भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। उनका कहना है कि राहुल गांधी “Save Infiltrators” अभियान को बढ़ावा देने के लिए ऐसा कर रहे हैं। भाजपा ने राहुल गांधी को देश विरोधी ताकतों का पोस्टर बॉय भी बताया। प्रदीप भंडारी ने साफ किया कि राहुल गांधी का Gen Z प्लान नेपाल में हुई हिंसा की तरह भारत में भी स्थिति पैदा कर सकता है।

    अमित शाह का जवाब

    गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा देश से घुसपैठियों को हटाए बिना नहीं रुकेगी। उन्होंने कहा कि इन दिनों राहुल गांधी “वोट चोरी, वोट चोरी” का नारा दे रहे हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने बिहार में “वोट अधिकार यात्रा” की, लेकिन अमित शाह ने कहा कि असल में यह यात्रा बांग्लादेशी घुसपैठियों की रक्षा के लिए थी क्योंकि वे कांग्रेस के वोट बैंक का हिस्सा हैं। अमित शाह ने राहुल गांधी और उनके साथियों को चेतावनी दी कि भाजपा किसी भी हालत में लोगों के अधिकारों को छीने जाने नहीं देगी।

    तेजस्वी यादव और लालू यादव पर निशाना

    अमित शाह ने सिर्फ राहुल गांधी पर हमला नहीं किया, बल्कि तेजस्वी यादव और लालू प्रसाद यादव को भी निशाने पर लिया। गृह मंत्री ने कहा कि जब वोटर लिस्ट से घुसपैठियों के नाम हटाए जा रहे हैं तो लालू यादव की परेशानी बढ़ रही है, लेकिन इसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बिहार से घुसपैठियों को बाहर करना है तो एनडीए को इतनी बड़ी बहुमत के साथ फिर से सरकार बनानी होगी कि तेजस्वी यादव अगली बार चुनाव लड़ने की हिम्मत भी न कर सकें।

  • वायरल वीडियो पर बोले कांग्रेस सांसद तारिक अनवर, कहा- लू से बिगड़ी तबीयत, इसलिए कंधों पर उठा ले गए लोग

    वायरल वीडियो पर बोले कांग्रेस सांसद तारिक अनवर, कहा- लू से बिगड़ी तबीयत, इसलिए कंधों पर उठा ले गए लोग

    कांग्रेस सांसद तारिक अनवर इन दिनों सुर्खियों में हैं। रविवार को उन्होंने बिहार के कटिहार जिले के मनिहारी और बरारी के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। इस दौरान एक वीडियो सामने आया जिसमें ग्रामीण उन्हें अपने कंधों पर उठाकर ले जाते दिखे। वीडियो वायरल होने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस को आड़े हाथों लिया। वहीं अब तारिक अनवर ने खुद इस पूरे मामले पर सफाई दी है।

    वीडियो वायरल होने के बाद दी सफाई

    तारिक अनवर ने कहा कि उस समय बहुत गर्मी थी और उन्हें हल्का हीट स्ट्रोक हो गया था। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने स्नेहवश उन्हें कंधों पर उठाया क्योंकि वहां कीचड़ भरा इलाका था। लोगों का कहना था कि अगर वह चलते तो फिसल सकते थे और गिर सकते थे। अनवर ने कहा कि ग्रामीणों ने प्यार और चिंता दिखाते हुए उन्हें उठाया और इसमें कोई और बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि असुविधा के कारण लोग खुद उन्हें आगे ले जाने लगे।

    वायरल वीडियो पर बोले कांग्रेस सांसद तारिक अनवर, कहा- लू से बिगड़ी तबीयत, इसलिए कंधों पर उठा ले गए लोग

    चुनाव में जीत की उम्मीद जताई

    तारिक अनवर ने इस मौके पर आगामी चुनाव को लेकर भी विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि आज बिहार की जनता पूरे विपक्ष को अपने कंधों पर उठाने के लिए तैयार है। उन्होंने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इस यात्रा में लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला। युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में सामने आए। इससे साफ है कि विधानसभा चुनाव में जनता विपक्ष को पूरा समर्थन देगी।

    बीजेपी ने किया कड़ा हमला

    वायरल वीडियो को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी नेता शाहजाद पूनावाला ने कहा कि तारिक अनवर को बाढ़ पीड़ित इलाकों में भी वीवीआईपी प्रोटोकॉल चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि कांग्रेस की मानसिकता गरीब विरोधी है। यहां तक कि जब वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे थे तब भी वे लोगों के कंधों पर बैठकर निरीक्षण कर रहे थे।

    कांग्रेस पर गरीब विरोधी मानसिकता का आरोप

    बीजेपी ने अपने आधिकारिक X हैंडल से भी तारिक अनवर का वीडियो साझा किया और लिखा कि कांग्रेस की गरीब विरोधी सोच उजागर हो गई है। उन्होंने कहा कि बाढ़ पीड़ित गांवों का दौरा करने आए कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ग्रामीणों के कंधों पर सवारी करते दिखाई दिए। यह न केवल पीड़ितों के दर्द को और बढ़ाने जैसा है बल्कि गरीबों और ग्रामीणों का अपमान भी है। बीजेपी ने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस कब तक गरीबों का इस तरह से अपमान करती रहेगी।

  • Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    Fake sign scam: लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव वह प्रक्रिया है, जो पारदर्शिता और ईमानदारी पर आधारित मानी जाती है। लेकिन हाल ही में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव के नामांकन में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया जिसने देश को हैरान कर दिया। केरल के रहने वाले जैकब जोसेफ नामक व्यक्ति ने अपनी उम्मीदवारी दाखिल करते समय 22 सांसदों को प्रस्तावक और 22 सांसदों को अनुमोदक दिखाकर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर दिए। यानी कुल 44 सांसदों के नाम और हस्ताक्षर जाली साबित हुए। इस घटना ने पूरे चुनावी सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    कैसे पकड़ा गया मामला?

    उपराष्ट्रपति चुनाव में नामांकन की प्रक्रिया के तहत किसी भी उम्मीदवार के लिए यह जरूरी होता है कि उसके पास कम से कम 20 सांसदों का समर्थन (प्रपोजर) और उतने ही सांसदों का अनुमोदन (सेकेंडर) होना चाहिए। यही शर्त उम्मीदवार की वैधता को सुनिश्चित करती है।

    जैकब जोसेफ ने भी इस नियम का पालन करने का दिखावा किया और 22-22 सांसदों के हस्ताक्षर अपने नामांकन पत्र में जोड़ दिए। लेकिन गड़बड़ी तब सामने आई जब नामांकन पत्र में वाईएसआरसीपी के सांसद मिथुन रेड्डी का हस्ताक्षर मिला। जांच में पता चला कि रेड्डी इस समय जेल में हैं और उन्होंने किसी भी नामांकन पर हस्ताक्षर नहीं किए। इसी बिंदु से संदेह गहराया और निर्वाचन आयोग ने मामले की गहन जांच शुरू की।

    जांच में खुला फर्जीवाड़ा

    22 अगस्त को नामांकन पत्रों की जांच की गई। जैसे-जैसे छानबीन आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इस फर्जीवाड़े का राज खुलता गया। कई सांसदों से संपर्क किया गया तो उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उन्होंने किसी भी उम्मीदवार के पक्ष में न तो हस्ताक्षर किए हैं और न ही इस प्रक्रिया की जानकारी दी गई है। इससे साफ हो गया कि जैकब जोसेफ ने पूरे मामले में धोखाधड़ी की है।

    चुनाव आयोग ने नामांकन की जांच के दौरान पाया कि इस बार कुल 46 उम्मीदवारों ने मिलकर 68 नामांकन दाखिल किए थे। पहले चरण में ही 28 नामांकन रद्द कर दिए गए। आगे की छानबीन के बाद सिर्फ दो नाम – सी.पी. राधाकृष्णन और बी. सुधर्शन रेड्डी – ही वैध पाए गए। दोनों ने चार-चार पर्चे दाखिल किए थे, जो जांच में सही साबित हुए।

    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश
    Fake sign scam: उपराष्ट्रपति चुनाव में 44 सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर से नामांकन का पर्दाफाश

    क्यों उठाए सवाल?

    जैकब जोसेफ का नामांकन अब चुनाव से बाहर कर दिया गया है, लेकिन इसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर एक व्यक्ति इतनी बड़ी हिम्मत कैसे कर सकता है कि वह सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर कर दे और चुनाव प्रक्रिया को गुमराह करने की कोशिश करे? यह घटना केवल तकनीकी गड़बड़ी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ सीधी छेड़छाड़ है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम फ्रॉड और फर्जीवाड़े की श्रेणी में आता है और इसके कानूनी नतीजे गंभीर हो सकते हैं। यह मामला संसद के गलियारों में चर्चा का विषय बन चुका है। सवाल यह भी उठता है कि इतनी कड़ी निगरानी के बावजूद कोई शख्स कैसे फर्जी दस्तावेज तैयार कर सकता है।

    निर्वाचन आयोग की सख्ती

    निर्वाचन आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और नामांकन से जुड़े सभी रिकॉर्ड को सुरक्षित कर लिया है। उम्मीद है कि इस मामले पर आगे चलकर आधिकारिक जांच बैठाई जाएगी और जैकब जोसेफ से पूछताछ भी होगी। चुनाव अधिकारियों ने साफ कहा कि इस तरह की गतिविधियां न केवल नियमों का उल्लंघन हैं बल्कि लोकतंत्र की साख पर भी चोट पहुंचाती हैं।

    लोकतंत्र पर सवाल

    यह घटना यह दर्शाती है कि कुछ लोग लोकतंत्र की सबसे अहम प्रक्रियाओं में भी शॉर्टकट तलाशने से बाज नहीं आते। उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के चुनाव में अगर फर्जी हस्ताक्षर जैसे मामले सामने आते हैं तो यह बेहद चिंताजनक है। हालांकि राहत की बात यह रही कि जांच प्रक्रिया ने इस गड़बड़ी को समय रहते पकड़ लिया, वरना चुनाव की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता था।

    जैकब जोसेफ का नामांकन खारिज कर दिया गया है, लेकिन यह घटना आने वाले समय में चुनावी पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर नए मानक तय कर सकती है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और दोषी को किस तरह की सजा मिलती है। लेकिन इतना तय है कि यह प्रकरण लोकतंत्र की मजबूती के बजाय उसकी कमजोर कड़ी को उजागर कर गया है।

  • Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    Haryana Congress में अंतर्कलह थमने का नाम नहीं ले रही है। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री संपत सिंह के बेटे गौरव के ट्वीट ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। गौरव ने बिना किसी नाम लिए कांग्रेस की हार के लिए पार्टी के एक वरिष्ठ नेता को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि यह नेता हर सभा में INLD, BSP, JJP और HLP को वोट काटने वाली पार्टियां बताते थे लेकिन अब समय आ गया है कि खुद उनके बारे में सवाल पूछे जाएं।

    वोट कटवा से ‘सरकार कटवा’ तक का आरोप

    गौरव ने अपने ट्वीट में तीखा सवाल खड़ा किया कि चुनाव आते ही कांग्रेस को सत्ता से वंचित करने वाला कौन है। उन्होंने कहा कि पार्टी के एक बड़े नेता की वजह से कांग्रेस को हर बार हार का सामना करना पड़ता है। उनका इशारा इस तरफ भी था कि जो नेता दूसरों को वोट कटवा बताते हैं वही असल में खुद ‘सरकार कटवा’ बन चुके हैं। गौरव ने लिखा कि अब जनता को यह जानने का हक है कि असली ‘फिक्सर’ कौन है।

    Haryana Congress में बढ़ता घमासान! सीनियर नेताओं पर खुद के बेटे ने उठाए सवाल

    सीनियर नेताओं के नाम पर सस्पेंस बरकरार

    गौरव ने ट्वीट में किसी नेता का नाम नहीं लिया लेकिन हरियाणा कांग्रेस में यह चर्चा गर्म हो गई है कि उनका इशारा किसकी ओर है। पार्टी के कई कार्यकर्ता और स्थानीय नेता इस बात को लेकर कयास लगा रहे हैं कि गौरव ने इशारा करके किसी बड़े चेहरे पर हमला बोला है। इससे यह भी साफ हो गया है कि अंदरूनी गुटबाजी अब खुलकर सामने आ चुकी है।

    कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी

    हरियाणा में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता से बाहर है और जब चुनाव नजदीक आते हैं तो इस तरह के बयान पार्टी के लिए और मुश्किलें खड़ी कर देते हैं। गौरव का बयान यह दर्शाता है कि पार्टी के भीतर का विश्वास लगातार कमजोर हो रहा है। कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच समन्वय की कमी साफ झलक रही है जिससे जनता का भरोसा भी डगमगाता है।

    क्या हाईकमान लेगा संज्ञान?

    अब सबकी निगाहें कांग्रेस हाईकमान की ओर हैं कि क्या वह इस बयानबाजी पर कोई एक्शन लेगा। गौरव का यह बयान न केवल पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए एक और बड़ी चुनौती बन सकता है। अगर अब भी इस गुटबाजी पर लगाम नहीं लगी तो पार्टी को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।