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  • DUSU चुनाव विजेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा नोटिस महंगी, कहा- छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिल रही हैं

    DUSU चुनाव विजेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा नोटिस महंगी, कहा- छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिल रही हैं

    दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों (DUSU) में प्रचार के लिए बेंटले, रॉल्स रॉयस व फरारी जैसी लग्जरी कारों और यहां तक कि जेसीबी के इस्तेमाल पर कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिल रही हैं, हमने तो इन कारों के बारे में सुना तक नहीं है।

    हाईकोर्ट ने कहा कि उम्मीदवारों व आयोजकों ने पिछले साल के न्यायिक आदेश से कोई सबक नहीं सीखा है, जिसमें उप्रदव, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कारण चुनाव परिणामों को रोक दिया गया था। हाईकोर्ट ने डूसू के नवनिर्वाचित अध्यक्ष आर्यन मान समेत अन्य विजयी घोषित उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर दिया है।

    DUSU चुनाव विजेताओं को दिल्ली हाईकोर्ट का कड़ा नोटिस महंगी, कहा- छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिल रही हैं

    हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि छात्र संघ चुनावों में इस तरह के प्रचार से बुरा और क्या हो सकता है। जेसीबी, बड़ी व लग्जरी कारों, चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल किया गया। छात्रों को इतनी महंगी कारें कहां से मिल रही हैं।

    चीफ जस्टिस देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने कहा कि हमने इन कारों के बारे में सुना तक नहीं है। सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने नवनिर्वाचित DUSU अध्यक्ष व ABVP के आर्यन मान, उपाध्यक्ष NSUI के राहुल झांसला के साथ-साथ सचिव कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव दीपिका झा को नोटिस जारी किए हैं। सचिव कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव दीपिका झा भी ABVP से हैं।

    हाईकोर्ट ने कहा कि छात्र संघ के चुनाव चाहे वह दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र संघ हो या उसके अन्य संबद्ध कॉलेजों का एक वार्षिक कार्यक्रम बन गया है। इस लग्जरी चुनाव पर रोक नहीं लग पा रही है। पिछले आदेश से किसी ने सबक नहीं लिया।

  • Bihar Assembly Elections: क्या बिहार में बिना विपक्ष के होंगे चुनाव? तेजस्वी यादव की धमकी से बदलेगा सियासी खेल?

    Bihar Assembly Elections: क्या बिहार में बिना विपक्ष के होंगे चुनाव? तेजस्वी यादव की धमकी से बदलेगा सियासी खेल?

    Bihar Assembly Elections नजदीक हैं और इसी बीच वोटर लिस्ट रिवीजन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे इस रिवीजन पर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्ति जताई है। खासकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इसे धांधली करार देते हुए कड़ा विरोध जताया है। तेजस्वी का कहना है कि अगर ऐसी गड़बड़ियां चलती रहीं तो विपक्ष चुनाव का बहिष्कार कर सकता है। यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

    तेजस्वी यादव की धमकी से बढ़ी बेचैनी

    तेजस्वी यादव ने साफ तौर पर कहा है कि उनकी पार्टी और महागठबंधन चुनाव का बहिष्कार करने पर विचार कर सकते हैं। उनका आरोप है कि वोटर लिस्ट में जानबूझकर छेड़छाड़ की जा रही है ताकि सत्ता पक्ष को फायदा हो। उन्होंने यह भी इशारा किया कि विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर जल्द ही बैठक हो सकती है। इस धमकी से सत्तारूढ़ एनडीए खेमे में हलचल मच गई है और आम जनता भी असमंजस में है कि चुनाव सही तरीके से होंगे या नहीं।

    Bihar Assembly Elections: क्या बिहार में बिना विपक्ष के होंगे चुनाव? तेजस्वी यादव की धमकी से बदलेगा सियासी खेल?

     क्या होगा अगर विपक्ष चुनाव नहीं लड़े?

    अगर वाकई विपक्ष चुनाव का बहिष्कार करता है तो यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है। बिहार जैसे बड़े राज्य में अगर सिर्फ एक गठबंधन मैदान में होता है तो लोकतंत्र की आत्मा को ठेस पहुंच सकती है। इससे पहले जम्मू-कश्मीर और मिजोरम में चुनाव बहिष्कार के मामले देखे गए हैं लेकिन वहां भी सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव को अवैध नहीं माना था। ऐसे में एनडीए के लिए यह चुनाव बिना मुकाबले की जीत जैसा हो सकता है।

     तेजस्वी यादव की सियासी रणनीति

    तेजस्वी यादव इस समय विपक्ष की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। उनके चुनाव बहिष्कार की चेतावनी को कई लोग एक सियासी दांव के रूप में भी देख रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह दबाव बनाने की कोशिश है ताकि चुनाव आयोग और सत्तापक्ष पर नैतिक दबाव बने। वहीं कुछ लोग इसे उनके चुनावी भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि अगर तेजस्वी खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे तो मुख्यमंत्री बनने का सपना कैसे पूरा करेंगे।

    लोकतंत्र की परीक्षा या सियासी चाल?

    बिहार की राजनीति इस समय एक नए मोड़ पर है जहां चुनाव से पहले ही लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रियाएं सवालों के घेरे में हैं। एक तरफ तेजस्वी यादव जैसे नेता चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर एनडीए खेमे में इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दिखाई दे रही। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष चुनाव बहिष्कार की राह पर जाता है या रणनीतिक बदलाव करता है।