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  • प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    हरियाणा की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। कांग्रेस के पूर्व नेता और जींद विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार रह चुके प्रदीप गिल, जो लंबे समय तक INLD में युवा प्रदेशाध्यक्ष के रूप में सक्रिय रहे, आज अपनी मूल पार्टी में वापसी कर रहे हैं। यह “घर वापसी” रोहतक की नई अनाज मंडी में ताऊ देवीलाल की 112वीं जयंती समारोह के दौरान हुई।

    प्रदीप गिल की वापसी से इनैलो को जींद और रोहतक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। हरियाणा में 2029 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर यह आयोजन एक सियासी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। रोहतक, जो हमेशा से जाट और किसान वोट बैंक का गढ़ रहा है, में इनैलो का यह कदम कांग्रेस और बीजेपी के लिए चुनौती पेश कर सकता है।

    प्रदीप गिल ने INLD में की घर वापसी, रोहतक-जींद में पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने की तैयारी शुरू

    प्रदीप गिल ने इनैलो में युवा प्रदेशाध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक काम किया और किसान-केंद्रित मुद्दों को युवाओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा और 2024 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में जींद सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोकी। हालांकि, वे जीत हासिल नहीं कर सके, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता ने उन्हें चर्चा में रखा। अब उनकी INLD में वापसी को पार्टी की रणनीति के तहत एक अहम कदम माना जा रहा है।

    प्रदीप गिल को राजनीति में ऐसे व्यक्ति के रूप में जाना जाता है जो राजनीतिक लाभ के लिए पार्टी नहीं बदलता है। जब हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार थी तब प्रदीप गिल की पत्नी अनीता गिल जिला परिषद की सदस्य बनी थी। हरियाणा में कांग्रेस सरकार ने जिला परिषद में अपना अध्यक्ष बनने के लिए पार्षदों को अपने पक्ष में कर रही थी। तब प्रदीप गिल को प्रदेश सरकार ने बड़े राजनीतिक पद का ऑफर भी किया था लेकिन प्रदीप गिल ने उसे स्वीकार नहीं किया था। जब तक उनकी पत्नी जिला पार्षद रही तब तक वह इनेलो में ही बने रहे। बाद में वह कांग्रेस में गए और टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ा और 8000 वोट हासिल किए।

    हाल ही में रोहतक से बलवान सिंह सुहाग (पूर्व जजपा उपाध्यक्ष) और उनके परिवार की इनैलो में वापसी के बाद प्रदीप गिल का यह कदम पार्टी के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। जिस रास्ते पर इस समय इनेलो चल रही है, उसे हरियाणा की राजनीति में आने वाले समय में बड़ी हलचल देखने को मिलेगी।

  • हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    हरियाणा सरकार ने शनिवार, 20 सितंबर को चावल वितरण अवधि को 15 मार्च से बढ़ाकर 30 जून कर दिया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस कदम से राज्य में लगभग 1,000 चावल मिलों को सीधे लाभ होगा। उन्होंने बताया कि मिल मालिकों को होल्डिंग फीस में लगभग 50 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।

    मिल मालिकों की मांगों को मिला मान्यता

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन ने सरकार को सूचित किया था कि भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने चावल की आपूर्ति में लगभग 45 दिन की देरी की। इससे मिल मालिक समय पर अपना कार्य पूरा नहीं कर पाए। उनकी मांग को मान्यता देते हुए सरकार ने बोनस पात्रता अवधि को 15 मार्च से 30 जून तक बढ़ा दिया। इसके अलावा, मिल मालिकों के लिए चावल वितरण अवधि को भी 30 जून तक विस्तारित किया गया।

    हरियाणा में चावल वितरण की अवधि बढ़ी, CM सैनी ने मिल मालिकों को 50 करोड़ रुपये की राहत का किया ऐलान

    किसानों के हित में सरकार का निर्णय

    सैनी ने कहा कि राज्य सरकार हमेशा किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रही है। इसी उद्देश्य से इस साल धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर की बजाय 22 सितंबर से शुरू होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी किसानों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है और दावा कर रही है कि भाजपा सरकार MSP प्रणाली को समाप्त कर देगी।

    MSP में निरंतर वृद्धि

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने फसलों के लिए MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) को लगातार बढ़ाया है। 2014 में सामान्य धान का MSP 1,360 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 2,369 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इसी तरह, ग्रेड-ए धान का MSP 1,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,389 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इससे किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित होगा।

    किसानों और मिल मालिकों के लिए सरकार का संदेश

    सैनी ने किसानों से अपील की कि वे सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को समझें और अफवाहों में न आएं। उन्होंने कहा कि मिलों को समय पर चावल वितरण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक सहायता प्रदान की जाएगी। इस निर्णय से न केवल मिल मालिकों को राहत मिलेगी बल्कि किसानों को भी उनकी उपज के लिए बेहतर मूल्य और सुरक्षित वितरण प्रणाली सुनिश्चित होगी।

  • Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    Haryana: हरियाणा सरकार ने किसानों की सुविधा और नहर जल प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। सरकार ने जून 2020 में जारी अपने ही उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत जुई, सिवानी और हिसार जल सेवाएं प्रभागों से कुछ नहर तंत्र लोहारू डिवीजन में स्थानांतरित किए गए थे। इससे किसानों को पर्याप्त मात्रा में पानी मिल पाएगा और साथ ही उनकी समस्याओं का समाधान भी समय पर हो पाएगा।

    पांच वर्ष पहले सरकार द्वारा जारी आदेशों के बाद बनी नई व्यवस्था के चलते कई व्यवहारिक कठिनाइयां सामने आईं। नहरों के केवल टेल हिस्से लोहारू डिवीजन में रहे, जबकि हेड हिस्से अपने मूल प्रभागों के पास ही थे। इस विभाजन से नहर जल का कुशल प्रबंधन नहीं हो पाया और खासतौर पर टेल एंड पर बसे किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ा। जिससे उनकी फसल प्रभावित हुई।

    सरकार ने किसानों की इन समस्याओं को देखते हुए नहरों को उनके मूल प्रभागों को लौटा दिया है। इस कदम से हेड से लेकर टेल तक बेहतर नियंत्रण और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। पानी की आपूर्ति निष्पक्ष और भरोसेमंद ढंग से टेल एंड गांवों तक पहुंचेगी। फील्ड स्टाफ भी किसानों की शिकायतों के समाधान में अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार रहेगा। विभाग पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और कार्य की दोहराव भी समाप्त हो जाएगी।

    Haryana: हरियाणा सरकार ने अपना ही 5 साल पुराना फैसला पलटा, किसानों को होगा फायदा

    सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को सुविधा में कोई कमी न आए। वर्ष 2023 में सरकार ने गांव खेड़ा, ब्लॉक सिवानी, जिला भिवानी में 17.54 करोड़ रुपये की लागत से एकीकृत कार्यालय परिसर, नहर विश्राम गृह और स्टाफ आवासीय भवन को मंजूरी दी थी। यह परियोजना अब 80 प्रतिशत पूरी हो चुकी है और जल्द ही इसमें तीनों अहम कार्यालय—एसडीओ सिवानी (लोहारू डिवीजन, एलडब्ल्यूएस सर्किल), एसडीओ माइकाड़ा (माइकाड़ा डिवीजन) और एसडीओ सिवानी (सिवानी डिवीजन, वाईडब्ल्यूएस सर्किल)—एक ही छत के नीचे काम करेंगे। इससे किसानों को रोजमर्रा की समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।

    सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल नहर प्रबंधन सुचारू होगा बल्कि किसानों तक समय पर पानी पहुंच पाएगा। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और किसानों की संतुष्टि भी सुनिश्चित होगी। खासकर टेल एंड के किसान इस निर्णय से सीधा लाभ उठाएंगे और जल वितरण व्यवस्था में सुधार का अनुभव करेंगे।

    किसानों के प्रति प्रतिबद्ध : श्रुति चौधरी

    सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि यह फैसला हमारी सरकार की किसानों के प्रति प्रतिबद्धता और नहर जल प्रबंधन को सुधारने का प्रमाण है। हम जमीनी हालात को देखते हुए पुराने फैसलों की समीक्षा करने से हिचकिचाते नहीं हैं। नहर प्रबंधन को सही दिशा देने के साथ-साथ हम आधुनिक ढांचे में भी निवेश कर रहे हैं ताकि हर किसान को सेवाएं आसानी और बिना किसी झंझट के मिल सकें।

  • Haryana News: आ गई तारीख, इस दिन से होगी धान की खरीद, 2369 रुपए प्रति क्विंटल खरीदेगी सरकार

    Haryana News: आ गई तारीख, इस दिन से होगी धान की खरीद, 2369 रुपए प्रति क्विंटल खरीदेगी सरकार

    Haryana News: केंद्र सरकार ने धान का MSP तय कर दिया है। हरियाणा में सामान्य धान 2,369 रुपए प्रति क्विंटल और ग्रेड ए का धान 2,389 रुपए प्रति क्विंटल खरीदा जाएगा। हरियाणा में धान की सरकारी खरीद मंगलवार से शुरू हो जाएगी। केंद्र सरकार ने इसकी स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    नीति के मुताबिक टूटा चावल ग्रेड ए और सामान्य में अधिकतम 25 फीसदी होगा। राज्य में वर्किंग चावल मिलों की संख्या 1445 है। सीएमआर कार्य करने के लिए प्रत्येक चावल मिलर को संबंधित जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा, ताकि वे ई-खरीद पोर्टल पर एजेंसियों के धान की कस्टम मिलिंग के लिए पात्र हो सकें। रजिस्ट्रेशन के लिए प्रत्येक चावल मिलर को प्रति मिल 3,000 रुपए का पंजीकरण शुल्क देना होगा। यह पंजीकरण एक साल के लिए होगा।

    प्रदेश भर में किसान लगातार धान और बाजरे की खरीद को लेकर धरना दे रहे हैं। करनाल में किसानों ने धान खरीद को लेकर एक दिन का उपवास रखा।

    Haryana News: आ गई तारीख, इस दिन से होगी धान की खरीद, 2369 रुपए प्रति क्विंटल खरीदेगी सरकार

    राज्य सरकार ने धान खरीद को मिलिंग नीति 2025-26 को मंजूरी दे दी है। इसके तहत यदि ठेकेदार समय पर धान का उठान नहीं करता है तो राइस मिलर्स धान उठा सकेंगे। इसमें जो भी खर्च होगा, उसका भुगतान हरियाणा सरकार करेगी। यह कदम धान की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उठाया गया है। हालांकि कस्टम मिलर राइस (CMR) की कीमतें अभी तक तय नहीं की गई हैं। राज्य सरकार का कहना है कि सीएमआर की कीमतें भारत सरकार से प्राप्त नहीं हुई हैं। भारत सरकार से प्राप्त होने पर इसे संबंधितों को प्रसारित किया जाएगा।

    पॉलिसी के मुताबिक धान की खरीद एक अक्टूबर से 15 नवंबर 2025 तक होगी। हालांकि राज्य सरकार ने पहले खरीद की अनुमति केंद्र सरकार से मांगी हुई है।

    बताया जा रहा है कि 22 या 23 सितंबर से धान की खरीद शुरू की जा सकती है। नीति में उल्लेख किया गया है कि कृषि विभाग के पूर्व अनुमानों के अनुसार हरियाणा की मंडियों और खरीद केंद्रों में लगभग 84 लाख मीट्रिक टन धान की आवक होगी। खरीद एजेंसियों की खरीद में हिस्सेदारी लगभग 54 लाख मीट्रिक टन होगी। खरीफ विपणन सत्र 2025-26 दौरान खरीद एजेंसियां केंद्रीय पूल में लगभग 36 लाख मीट्रिक टन कस्टम मिल राइस का योगदान देंगी।

  • Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी Abhay Chautala ने पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अंतिम संस्कार में भाजपा सरकार द्वारा राजकीय सम्मान न देने को कड़ी आलोचना का विषय बताया है। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति का अपमान है, बल्कि समाज के उस वर्ग का भी अपमान है जिससे मलिक ताल्लुक रखते थे — यानी किसान वर्ग। अभय चौटाला ने इस फैसले को ओछी राजनीति और किसान विरोधी मानसिकता की उपज करार दिया।

    सत्यपाल मलिक को किसानों का समर्थन देना पड़ा महंगा

    Abhay Chautala ने कहा कि सत्यपाल मलिक ने अपने कार्यकाल के दौरान किसानों के हितों की खुलकर वकालत की थी, खासकर तब जब केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून लागू किए थे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों के पक्ष में निर्भीक बयान दिए और भाजपा सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर सवाल उठाए थे। चौटाला ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उन्हें राजकीय सम्मान न देना उसी समर्थन की ‘सजा’ है जो उन्होंने किसानों को दी थी। यह फैसला उन सभी लोगों को संदेश देने की कोशिश है जो सरकार के खिलाफ बोलते हैं या किसान हितों की पैरवी करते हैं।

    Abhay Chautala बोले- किसान हितैषी सत्यपाल मलिक का अपमान, भाजपा ने दिखाई ओछी मानसिकता

    लोकतंत्र के खिलाफ है यह सोच

    अभय सिंह चौटाला ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर यह दिखाना चाहती है कि किसी भी विरोधी स्वर को दबाया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह रवैया लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। सरकार के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि जो भी किसान हित की बात करेगा, उसे या तो अनदेखा किया जाएगा या अपमानित किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि यह सिर्फ सत्यपाल मलिक का नहीं, हर उस किसान का अपमान है जिसने अपने हक के लिए संघर्ष किया।

    जनता का प्रेम ही सच्ची श्रद्धांजलि

    अभय चौटाला ने कहा कि सत्यपाल मलिक को न दिए गए राजकीय सम्मान से उनकी जनप्रियता और उनके विचारों की ताकत कम नहीं होती। उन्होंने कहा कि जनता का बेशुमार प्यार, किसानों का आशीर्वाद और संघर्षशील सोच ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने देश के किसानों, युवाओं और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे इस ओछी मानसिकता का लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण जवाब दें। अब समय आ गया है जब देश को यह दिखाना होगा कि वह अपने सच्चे जननायकों को इज्जत और सम्मान देना जानता है, चाहे सत्ता में बैठी ताकतें उन्हें न पहचानें।

  • Dushyant Chautala का बड़ा हमला, बोले- गायब है नायब सरकार, किसानों को सताने की साजिश चल रही है!

    Dushyant Chautala का बड़ा हमला, बोले- गायब है नायब सरकार, किसानों को सताने की साजिश चल रही है!

    पूर्व उपमुख्यमंत्री और जननायक जनता पार्टी (जजपा) के नेता Dushyant Chautala ने गुरुवार को हरियाणा के जींद जिले में उचाना हलके के विभिन्न गांवों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की और लोगों की समस्याएं सुनीं। चौटाला ने इस दौरे में राज्य की मौजूदा बीजेपी सरकार को आड़े हाथों लेते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार को “गायब सरकार” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह सरकार जनहित से पूरी तरह कट चुकी है और जनता की समस्याओं की ओर इसका कोई ध्यान नहीं है।

    खाद विक्रेताओं को नोटिस देना किसानों के खिलाफ साजिश

    दुष्यंत चौटाला ने सरकार द्वारा खाद विक्रेताओं को नोटिस दिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर खाद विक्रेताओं पर अनावश्यक पाबंदियां लगाकर किसानों को पीड़ित कर रही है। उचाना क्षेत्र में कई खाद विक्रेताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिससे व्यापारियों के बीच डर का माहौल है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम किसानों को खाद से वंचित रखने की साजिश है। खाद विक्रेता किसान और सरकार के बीच की कड़ी हैं, और उन पर कार्रवाई करके सरकार सीधे किसानों को चोट पहुंचा रही है।

    Dushyant Chautala का बड़ा हमला, बोले- गायब है नायब सरकार, किसानों को सताने की साजिश चल रही है!

    सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं

    चौटाला ने कहा कि मौजूदा सरकार की नीतियां पूरी तरह किसान विरोधी हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकार की गलत योजनाओं और कुप्रबंधन के कारण इस बार खेतों में खाद की सप्लाई समय पर नहीं हो पाई, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ। अब जब किसान किसी तरह खाद प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं, तो विक्रेताओं को नोटिस देकर उन्हें और परेशान किया जा रहा है। इससे साफ होता है कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सोच किसानों के प्रति नकारात्मक है और वह कृषि व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

    चौटाला का आह्वान – सरकार को जवाब देंगे किसान

    अपने दौरे के दौरान चौटाला ने गांवों के लोगों से बातचीत करते हुए उन्हें आश्वस्त किया कि जजपा हमेशा किसानों, मजदूरों और व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए संघर्षरत रहेगी। उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में जनता इस सरकार की किसान विरोधी नीतियों का मुंहतोड़ जवाब देगी। दुष्यंत चौटाला ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को सरकार की नीतियों के प्रति जागरूक करें और जजपा के साथ एक मजबूत किसान हितैषी विकल्प के रूप में खड़े हों। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है एक ऐसी सरकार की जो किसानों के दर्द को समझे, न कि उन्हें नोटिस और पाबंदियों से डराए।

  • असम-राजस्थान के किसानों के लिए राहत की पहल! Shivraj Singh Chouhan का बड़ा ऐलान

    असम-राजस्थान के किसानों के लिए राहत की पहल! Shivraj Singh Chouhan का बड़ा ऐलान

    नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री Shivraj Singh Chouhanने असम के कृषि मंत्री अतुल बोरा और राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा से मुलाकात की। इस बैठक में दोनों राज्यों की कृषि, बागवानी और ग्रामीण विकास से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर राज्य के किसानों की समस्याओं को प्राथमिकता से देख रही है और समाधान के लिए कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।

    असम के बाढ़ और सूखा प्रभावित किसानों को जल्द राहत

    बैठक में असम के कृषि मंत्री बोरा ने राज्य में हाल ही में आई बाढ़ और सूखे की स्थिति से अवगत कराया। इस पर केंद्रीय मंत्री ने सहानुभूति जताते हुए आश्वासन दिया कि वे जल्द ही प्रभावित जिलों का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि असम के किसानों की पीड़ा को समझते हुए केंद्र सरकार हरसंभव सहायता करेगी। बाढ़ और सूखा दोनों ही स्थितियों में प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए राज्य और केंद्र मिलकर काम करेंगे।

    असम-राजस्थान के किसानों के लिए राहत की पहल! Shivraj Singh Chouhan का बड़ा ऐलान

    फसल वैरायटी अधिसूचना और डिजिटल फॉर्म छूट पर निर्देश

    असम के किसानों को उपयुक्त फसल वैरायटी नहीं मिल पाने की समस्या पर भी चर्चा हुई। मंत्री शिवराज सिंह ने ICAR को निर्देश दिए कि वे राजमा, मसूर, सूर्यमुखी, चारा मक्का, लहसुन और प्याज जैसी फसलों की नई वैरायटी को अधिसूचित करें। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत डिजिटल फार्मर रजिस्ट्री की अनिवार्यता से छूट देने के भी निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें।

    नकली बीज और खाद पर केंद्र सख्त

    राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने राज्य में नकली बीज और खाद की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। इस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के साथ धोखा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। केंद्र सरकार इस दिशा में कानून को और सख्त बनाएगी और गड़बड़ी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर सभी मुख्यमंत्रियों को पत्र भी भेजा गया है।

    कृषि विकास के लिए केंद्र-राज्य समन्वय जरूरी

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों को हल करने के लिए राज्यों और केंद्र के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी सुझावों और समस्याओं का परीक्षण करके त्वरित समाधान निकाला जाए। यह बैठक न केवल समस्याओं को सुनने बल्कि समाधान की दिशा में गंभीरता से काम करने की एक मजबूत पहल थी।